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Film review: ‘हाई जैक’ फिल्म का नाम होना चाहिए था क्रैश लैंडिंग

आकर्ष खुराना के पास एक अच्छी फिल्म की सभी सामग्री थी लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: May 18, 2018 10:45 PM IST

Abhishek Srivastava

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Film review: ‘हाई जैक’ फिल्म का नाम होना चाहिए था क्रैश लैंडिंग
निर्देशक: आकर्ष खुराना
कलाकार: सुमित व्यास, कुमुद मिश्रा, शिव सुब्रमण्यम, मंत्रा

आकर्ष खुराना की फिल्म ‘हाई जैक’ से एक बात तो पूरी तरह से साफ हो जाती है कि अगर लोग बदले हुए बॉलीवुड के बारे में बात करने लगे हैं तो कुछ लोगों के लिए इसका मतलब ये भी है कि आप फिल्म के नाम पर कुछ भी जनता को परोस सकते हैं. ‘हाई जैक’ को लेकर इसके निर्देशक आकर्ष खुराना और इसके निर्माता फैंटम जिसमें अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवानी और विकास बहल जैसे दिग्गज जुड़े हुए हैं का शायद फिल्म के रिलीज के पहले यही मानना होगा कि सिटकॉम कॉमेडी की दुनिया में ये फिल्म शायद एक बेंच मार्क फिल्म साबित हो लेकिन उनका तीर निशाने से कितना दूर लगा है इस बात का पता उनको कुछ दिनों में लग जाएगा. कॉमेडी और प्रयोग के नाम पर आप कुछ भी बना सकते हैं, ‘हाई जैक’ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है. कम शब्दों में कहें तो इस फिल्म से दूरी बनाकर रखने में ही भलाई है.

कंपनी के चार कर्मचारी खुद की ही कंपनी के विमान की हाई जैकिंग कर लेते हैं

फिल्म की कहानी एक फ्लाइट की हाई जैकिंग के बारे में है जो गोवा से दिल्ली जा रही है. जिस कंपनी की ये उड़ान है वो कुछ आर्थिक घोटाले की वजह से बंद होने वाली है और ये उड़ान उसकी आखिरी उड़ान है. उसी उड़ान में कंपनी के मालिक नांबियार (शिव सुब्रमण्यम) का एक सुटकेस भरा सोना भी जा रहा है जिसका मकसद है दिल्ली में कुछ उच्च पदों के लोगों के हाथों को गर्म करना. कंपनी के चार कर्मचारी अपने मालिक की इस नीयत को भांप लेते हैं और सबक सिखाने के लिए उस फ्लाइट की हाई जैकिंग कर लेते हैं. उसी फ्लाइट से राकेश (सुमित व्यास) भी दिल्ली जा रहे हैं जिनके डीजे बनने के सपने पर गोवा में पानी फिर गया था. उनकी मंशा यही थी कि अपने संगीत के प्रदर्शन से वो जो भी रुपए कमाएंगे उसकी मदद से वो अपने पिता के क्लिनिक को बचा लेंगे. राकेश को गोवा मे फिर भी रुपए मिल जाते हैं लेकिन कुछ ड्रग्स की तस्करी करने वाले लोगों की ओर से जिसके एवज में उनको ड्रग्स गोवा से दिल्ली ले जाना है. अब हाई जैकिंग के दौरान क्या-क्या घटनाएं घटती हैं ये फिल्म उसी को बयान करती है.

फिल्म का हर पहलू बेहद कमजोर है

‘हाई जैक’ को देखकर सबसे पहले इसी बात का ख्याल आता है कि इसके स्क्रीनप्ले पर किसी ने भी मेहनत नहीं की है. ‘हाई जैक’ के दौरान एक पैसेंजर की मौत भी हो जाती है लेकिन उसके क्या परिणाम होते हैं ये बताने की कोशिश नहीं की गई है. फिल्म के बीच में जब सुमित व्यास खुद को बचाने के लिए स्मगलिंग के ड्रग्स खुद ले लेते हैं तो उसके बाद यही लगता है कि फिल्म की कहानी को भी एक तरह का नशा हो गया है यानि कि इसके बाद कुछ भी फिल्म के साथ ठीक नहीं रहता है. सुमित व्यास और कुमुद मिश्रा जैसे कुछ लोग हैं इस फिल्म में जो इसके पहले अपने अभिनय क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं लेकिन जब फिल्म की कहानी और स्क्रीन प्ले ही लचर है तो उसकी क्रैश लैंडिंग होनी निश्चित है. सधा हुआ अभिनेता भी किसी फिल्म को बचा नहीं सकता है. फिल्म के बाकी कलाकारों के अभिनय क्षमता पर टिप्पणी करना शब्दों की ही बर्बादी होगी. हर एंगल से ये फिल्म एक बचकानी फिल्म नजर आती है जिसकी प्रोडक्शन क्वालिटी बेहद ही साधारण है. आकर्ष खुराना की निर्देशन के बारे में यही कहना ठीक होगा कि फिल्म की कहानी के लिए सामाग्री उनके पास जरूर है लेकिन उसका इस्तेमाल किस तरह से करना है इसकी जानकारी उनको नहीं है.

आकर्ष खुराना के पास एक अच्छी फिल्म की सभी सामग्री थी लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं

ऐसा नहीं है की चीजों को देखकर हंसी नहीं आती है. जब सुमित व्यास एक कमांडो को अपने पेशे के बारे में म्यूजिक के माध्यम से बताने की कोशिश करते हैं तो उसे देखने में मजा आता है. या फिर तनेजा के रोल में कुमुद मिश्रा जब अपनी पत्नी की किसी भी बात को लेकर उनसे भिड़ जाते हैं उसको देखने में हंसी आती है. कुछ उसी तरह से डायलॉग भी एक-दो जगहों पर गुदगुदाते हैं लेकिन पूरी फिल्म में ये ठहर नहीं पाते हैं. देखकर बेहद आश्चर्य होता है कि फैंटम का नाम इस फिल्म के साथ जुड़ा हुआ है. ड्रग्स के आड़े में फिल्म के निर्देशक ने हंसाने की कोशिश की है लेकिन ये कोशिश धरी की धरी रह जाती है. इसमें कोई शक नहीं कि अपनी इस कॉमेडी के माध्यम से फिल्म के निर्देशक देश के राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं पर के व्यंग्य कसना चाहते थे लेकिन नतीजा कुछ और ही निकलकर आया है. इस फिल्म का नाम ‘हाई जैक’ के बदले में क्रैश लैंडिंग होना चाहिए था. जितनी दूरी आपकी फिल्म से बनी रहेगी आपके लिए बेहतर रहेगा.

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