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Happy Birthday Shreya Ghoshal: क्यों कल्याण जी आनंद जी और संजय लीला भंसाली की खोज मानी जाती हैं श्रेया घोषाल?

श्रेया घोषाल को बचपन से ही गाने का शौक था. जब से उन्होंने बोलना सीखा तभी से गाना भी शुरू कर दिया

Updated On: Mar 12, 2019 10:52 AM IST

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh

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Happy Birthday Shreya Ghoshal: क्यों कल्याण जी आनंद जी और संजय लीला भंसाली की खोज मानी जाती हैं श्रेया घोषाल?

संजय लीला भंसाली बहुत पारखी फिल्मकार हैं. ‘खामोशी’ और ‘हम दिल दे चुके सनम’ के बाद वो ‘देवदास’ बना रहे थे. ‘देवदास’ उनका बहुत बड़ा प्रोजेक्ट था. अव्वल तो शरत बाबू की इस किताब पर पहले भी फिल्में बन चुकी थीं. दूसरा ये फिल्म बजट के लिहाज से महंगा सौदा थी. शाहरूख खान, माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय जैसी बड़ी स्टारकास्ट के साथ-साथ संजय लीला भंसाली ने फिल्म के एक-एक पक्ष के लिए बड़ी मेहनत की थी. संगीत तैयार करने की जिम्मेदारी उन्होंने इस्माइल दरबार को सौंपी. जो हम दिल दे चुके सनम में हिट म्यूजिक दे चुके थे. फिल्म में ऐश्वर्या राय ने पारो का रोल किया था.

ऐश्वर्या राय का प्लेबैक सिंगर कौन हो, इस सवाल का जवाब ढूंढने में संजय लीला भंसाली ने काफी मेहनत की. उन्हें एक ऐसी आवाज चाहिए थी जो ‘यंग’ हो और उसमें एक मासूमियत भी हो. इसके लिए उनके दिमाग में एक गायिका थी जिसके गाने वो पिछले दो साल से सुन रहे थे. उस गायिका को भी बॉलीवुड में ‘एंट्री’ का इंतजार था. उन्होंने उस गायिका के हिंदी गाने के अलावा मराठी में गाए गाने भी सुने. अंत में उन्होंने तय किया कि वो पारो के लिए प्लेबैक सिंगिग उसी 16 साल की लड़की से कराएंगे. उस लड़की को उन्होंने मौका दिया और उस लड़की ने उन्हें शानदार गाने दिए. आज फिल्म इंडस्ट्री उसी लड़की को श्रेया घोषाल के नाम से जानती है. जिनका आज जन्मदिन है.

श्रेया को बचपन से ही गाने का शौक था. जब से बोलना सीखा तभी से गाना भी शुरू कर दिया. मां को गाने का शौक था. वो अच्छा गाती थीं. उन्होंने अपनी बेटी को संगीत सिखाना शुरू किया. राजस्थान के कोटा के पास रावतभाटा नाम की एक छोटी सी जगह है. श्रेया का परिवार वहीं रहता था. परेशानी ये थी कि वहां आस-पास इंजीनियर और साइंटिस्ट ही रहा करते थे. वहां संगीत को लेकर कोई खास माहौल नहीं था. बावजूद इसके श्रेया ने अपनी मां के साथ-साथ स्कूल के टीचर से भी संगीत सीखना शुरू कर दिया. वो राजस्थानी लोकगीत के अच्छे कलाकार थे. इस तरह बचपन से ही संगीत जिंदगी का अहम हिस्सा हो गया. इसके बाद 90 के दशक में श्रेया घोषाल एक रिएलिटी शो में आई. उस शो के होस्ट सोनू निगम थे. फाइनल में श्रेया घोषाल ने फिल्म ‘लेकिन’ का ‘सुनियो जी’ गाना गाया. ये एक मुश्किल गाना था. लेकिन रिएलिटी शो में जीत मुश्किल गाने गाकर ही मिलती थी.

लिहाजा श्रेया ने हिम्मत की और उन्होंने लता जी के गाए उस गाने को बहुत अच्छी तरह निभाया. शो के जज थे जाने-माने संगीतकार कल्याण जी आनंद जी. कल्याण जी ने उसी रोज श्रेया के पापा को ये कह दिया था कि उन्हें इस लड़की को लेकर बॉम्बे आना चाहिए. उस वक्त श्रेया घोषाल की उम्र 11-12 साल रही होगी. श्रेया के पापा वैसे तो इंजीनियर थे लेकिन उन्हें भी संगीत का शौक था. उन्हें कल्याण जी की बात समझ आ गई. उन्होंने बचपन से अपनी बेटी को गाते गुनगुनाते देखा भी था. बंगाली परिवारों में संगीत को लेकर एक स्वाभाविक दिलचस्पी होती है. जो श्रेया के परिवार में भी थी. लिहाजा श्रेया बॉम्बे पहुंच गईं. बाद में श्रेया ने महेश चंद्र शर्मा और मुक्ता भीड़े से शास्त्रीय संगीत की तालीम ली. इसके अलावा बॉम्बे पहुंचने के बाद उन्होंने कल्याण जी के यहां भी संगीत की बारीकियां सीखीं.

देवदास की सफलता ने श्रेया घोषाल को बहुत जल्दी ‘लाइमलाइट’ में ला दिया. उस फिल्म में उन्होंने बैरी पिया, सिलसिला ये चाहत का, मोरे पिया और डोला रे डोला जैसे शानदार गाने गाए. बैरी पिया की गायकी की लोकप्रियता को आप ऐसे समझ सकते हैं कि ये गाना लता मंगेशकर जैसी महान गायिका के पसंदीदा गानों में शुमार है. ये श्रेया की आवाज का ही जादू था कि उन्हें इन गानों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से लेकर नेशनल अवॉर्ड तक सबकुछ हासिल हुआ. अपनी पहली ही फिल्म से उन्होंने फैंस का दिल जीत लिया. इसके बाद अगले साल श्रेया घोषाल ने फिल्म जिस्म के गानों से धूम मचाई. ‘जादू है नशा है’ गाना वाकई नशा बनकर छा गया. फिल्मफेयर अवॉर्ड से लेकर स्क्रीन अवॉर्ड्स तक हर जगह श्रेया छा गईं. सुनिधि चौहान के बाद श्रेया घोषाल दूसरी ऐसी लोकप्रिय प्लेबैक सिंगर बनीं जो रिएलिटी शो के जरिए इस मुकाम तक पहुंची. हालांकि श्रेया और सुनिधि के बीच बड़ा फर्क ये है कि सुनिधि चौहान ने कभी भी संगीत की परंपरागत तालीम नहीं ली है. यहां एक दिलचस्प बात बताते चलें कि अरिजीत सिंह और मोनाली ठाकुर जैसे गायक रिएलिटी शो में हार के बाद भी अपना नाम बनाने में कामयाब रहे हैं.

2004 के बाद से लेकर अभी तक श्रेया घोषाल फिल्म इंडस्ट्री की टॉप गायिकाओं में से एक हैं. उनके खाते में सैकड़ों हिट गाने हैं. उन्होंने इस दौर के सभी संगीतकारों के साथ काम किया है. उनका मानना है कि अगर अलग-अलग मूड के गाने गाने हैं तो अलग-अलग मूड के गाने सुनने भी चाहिए. श्रेया अगर फिल्म पहेली में ‘धीरे जलना’ गाती हैं जो जब वी मेट में ‘ये इश्क हाय बैठे बिठाए जन्नत दिखाए’ भी गाती हैं. उनके गाए दोनों गाने लोगों का दिल जीतते हैं. मौजूदा दौर ‘वेराइटी’ से भरा हुआ है. इसमें अपनी जगह बनाए और बचाए रखने के लिए मेहनत करनी होती है. श्रेया घोषाल इन बातों से वाकिफ हैं. इसका सबूत है फिल्म ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ का गाना- पल-पल हर पल. जो उन्होंने कई बार रिकॉर्ड किया. ऐसा नहीं कि रिकॉर्डिंग में उनसे कोई गलती हुई थी बल्कि ऐसा इसलिए क्योंकि गाने में लगातार बदलाव होते रहे. हर कोई चाहता था कि एक सुपरहिट गाना तैयार हो. सभी की मेहनत रंग लाई. उस गाने को लोगों ने बहुत प्यार दिया. करीब डेढ़ दशक के अपने प्लेबैक सिंगिग करियर में श्रेया घोषाल चार नेशनल अवॉर्ड्स जीत चुकी हैं. उनके खाते में 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड हैं. समय का पहिया घूम चुका है, अब वो खुद रिएलिटी शो में जज बनती हैं.

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