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ग्रैमी अवार्ड विनर संदीप दास: उंगलियों की बदमाशी ने विजेता बनाया

छह साल की उम्र में भी संदीप खिलौने के बजाए तबला की मांग करते थे.

Updated On: Feb 17, 2017 12:15 PM IST

Bhasha

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ग्रैमी अवार्ड विनर संदीप दास: उंगलियों की बदमाशी ने विजेता बनाया

ग्रैमी अवार्ड विजेता तबला वादक संदीप दास का स्कूली समय से तबला वादन से लगाव था. एक मौके पर स्कूल के एक टीचर ने उनके पिता से क्लास में पढ़ाई के दौरान मेज पर उंगली थिरकाने को लेकर उनकी शिकायत की थी.

पिछले रविवार को 'यो यो मा' के साथ संदीप दास के सिल्क रोड इन्सेंबल 'सिंग मी होम' ने वर्ल्ड म्यूजिक श्रेणी में ग्रैमी अवार्ड जीता है.

संदीप दास के बड़े भाई कौशिक दास और पटना स्थित संत जेवियर हाई स्कूल जहां उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई की वहां के एक शिक्षक ने उनसे जुड़ी मधुर यादों को साझा किया है.

संदीप का बचपन

23 जनवरी 1971 को जन्मे संदीप दास ने पटना स्थित संत जेवियर हाई स्कूल में पढ़ाई करते हुए साल 1986 में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी.

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ग्रैमी जीतने के बाद अपनी टीम के अन्य साथियों के साथ संदीप दास. तस्वीर: फेसबुक पेज से

संदीप के बड़े भाई कौशिक ने बताया कि एक बार उनके स्कूल के एक शिक्षक ने उनके पिता से शिकायत की थी कि संदीप क्लास के दौरान अपनी उंगलियों से मेज को बजाते हैं.

लेकिन उनके परिवार वाले जानते थे कि तबला से लगाव होने के कारण उनकी उंगलियां अपने-आप थिरकने लगती थीं.

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संत जेवियर स्कूल के प्रिंसिपल फादर जेकब ने बताया कि स्कूल में एसेंबली के दौरान संदीप दास की इस उपलब्धि के बारे में बताए जाने पर बच्चों ने जोरदार ताली बजाकर खुशी जतायी.

संत जेवियर स्कूल के सहायक, फादर मनीष ओस्टा ने बताया कि संदीप दास के पटना आने पर उनके स्कूल ने उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया है.

संदीप दास के बड़े भाई कौशिक दास ने बताया कि स्कूल की पढाई के बाद हम लोग शाम में घर पर संगीत का अभ्यास किया करते थे.

हमारे गाने पर मिट्ठु यानि संदीप दास तबला बजाया करता था और मेरा गाना खत्म हो जाने पर भी वह तबला बजाना जारी रखता था जिसको लेकर हमारे बीच लड़ाई भी होती थी.

कौशिक स्कूली शिक्षा के दौरान गायन करते थे और इस समय पड़ोसी राज्य झारखंड के एचईसी में नौकरी करते हैं.

पिता की पारखी नजर

उन्होंने बताया कि उनके पिता ने संदीप के भविष्य को शुरूआती दौर में ही पढ़ लिया था.

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अवार्ड लेने के लिए मंच पर जाते हुए संदीप दास. तस्वीर: फेसबुक पेज से

उन्होंने पीएंडटी क्लब में तबला वादक शिव कुमार सिंह से तबला वादन की शुरुआती शिक्षा लेने के बाद उन्हें पंडित किशन महाराज के पास बनारस ले गए.

कौशिक ने बताया कि हर शनिवार को सप्ताहिक जांच परीक्षा के बाद उनके पिता एक सूटकेस में अपना और संदीप का कपड़ा रखकर स्कूल आते और वहां से सीधे वाराणसी जाते थे और सोमवार की सुबह वहां से लौटने पर संदीप स्कूल ड्रेस पहने सीधे स्कूल आते थे.

उन्होंने बताया कि किशन महाराज के यहां तबला वादन के अभ्यास के दौरान संदीप की उंगली में दरार आ जाती थी.

लेकिन वह अपना अभ्यास जारी रखते और उनका अभ्यास बीच रात से सुबह चार बजे तक जारी रहता.

कौशिक ने बताया कि पांच, छह साल की उम्र में भी संदीप खिलौने के बजाए तबला की मांग करते थे. हमारे घर में आज भी संदीप द्वारा इस्तेमाल किए गए सैकड़ों तबला मौजूद हैं.

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