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बर्थडे स्पेशल: ‘धन्नो’ से कैसे बनीं सितारा देवी ‘कथक क्वीन’?

सितारा देवी ने मधुबाला से लेकर काजोल तक को नचाया, बनीं बॉलीवुड की कथक क्वीन

Arbind Verma Updated On: Nov 08, 2017 06:55 PM IST

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बर्थडे स्पेशल: ‘धन्नो’ से कैसे बनीं सितारा देवी ‘कथक क्वीन’?

‘धन्नो’ से ‘कथक क्वीन’ बनीं सितारा देवी का आज जन्मदिन है. इस मौके पर गूगल उन्हें डूडल बनाकर सम्मानित कर रहा है. जब इनका जन्म हुआ था उस वक्त उनका मुंह टेढ़ा था जिसकी वजह से सितारा देवी के माता-पिता ने उन्हें खुद से अलग कर दिया था. महज आठ साल की उम्र में इनका विवाह हो गया था.

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सितारा देवी ने कथक की दुनिया में अपना ऐसा नाम बनाया कि लोग उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे. उनका नाम जुबां पर आते ही उनका चेहरा आंखों में तैरने लगता था. वो जब ताल पर थिरकती थीं तो सबको एक अलग ही दुनिया की सैर करवाती थीं.

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8 नवंबर 1920 को सितारा देवी का जन्म कलकत्ता में हुआ था. उनका नाम वैसे तो धनलक्ष्मी था लेकिन घर में सभी लोग उन्हें धन्नो कहकर बुलाते थे. सितारा देवी ने मधुबाला, रेखा, माधुरी दीक्षित और काजोल को अपनी अदाएं सिखाईं और ताल पर नचवाया. 2014 में उनकी उम्र 94 साल की थी जब उनकी मृत्यु हो गई.

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आपको बता दें कि, जन्म से ही सितारा देवी का मुंह टेढ़ा था जिसकी वजह से उनके माता-पिता उन्हें देखना नहीं चाहते थे. जब उन्होंने सितारा देवी को पहली बार देखा था तो वे डर गए थे. माता-पिता ने उन्हें एक दाई को पालने को दे दिया. जब उनकी उम्र आठ साल की हुई तो उनका विवाह करा दिया गया. स्कूल जाने की जिद की वजह से उनका विवाह टूट गया और फिर उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ नृत्य सीखा.

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एक बार एक अखबार में उनके नृत्य के बारे में खबर छपी जिसमें उनके नृत्य के बारे में लिखा गया था. एक लड़की धन्नो ने अपने नृत्य से दर्शकों का दिल जीता. इस खबर को पढ़ते ही उनके माता-पिता की राय बदल गई. इसी वाकिये के बाद उनका नाम धन्नो से बदलकर सितारा देवी रख दिया गया जिन्होंने अपने नाम के मुताबिक शोहरत हासिल की.

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