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Review तुम्हारी सुलु : इसे देखकर आप कहेंगे 'हमारी सुुलु'

हर मिडिल क्लास परिवार को तुम्हारी सुलु में उनकी कहानी नजर आएगी

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Abhishek Srivastava Updated On: Nov 18, 2017 10:28 AM IST

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Review तुम्हारी सुलु : इसे देखकर आप कहेंगे 'हमारी सुुलु'
निर्देशक: सुरेश त्रिवेणी
कलाकार: विद्या बालन, मानव कौल, नेहा धूपिया

किसी समय कहानी और द डर्टी पिक्चर जैसी फिल्मों से लोगों के दिलों पर राज़ करने वाली विद्या बालन का जादू पिछले कुछ सालों से बॉक्स ऑफ़िस पर बेअसर साबित हुआ है. विद्या की पिछली कुछ फिल्में मसलन कहानी 2, हमारी अधूरी कहानी, घनचक्कर, बेग़म जान इत्यादि को जनता ने सरे से नकार दिया था. अफ़सोस की बात यह थी कि सभी फिल्मों में विद्या के अभिनय की जमकर तारीफ हुई थी लेकिन फिल्म के निर्देशन और लचर स्क्रीनप्ले ने उनका साथ नहीं दिया था.

इस हफ्ते की रिलीज़ तुम्हारी सुलु से लगता है की विद्या बालन के करियर के सूखापन का अब अंत होने वाला है. इस फिल्म सफल होने की सारी सामाग्री मौजूद है. अगर विद्या ने अपने शानदार अभिनय से लोगों का ध्यान एक बार फिर से आकर्षित किया है तो वहीं दूसरी तरफ तुम्हारी सुलु अपनी कहानी में मानवीय दृढ़ निश्चय से क्या क्या संभव हो सकता है यह बताने की कोशिश काफी मनोरंजक तरीके से की है जो आपको बांध कर रखती है. तुम्हारी सुलु इस हफ्ते सिनेमा हॉल में आपकी चॉइस होनी चाहिए.

स्टोरी

इस फिल्म की कहानी सुलोचना दुबे (विद्या बालन) और अशोक दुबे (मानव कौल) की है जो मुंबई के सुदूर इलाके में रहते हैं. अगर अशोक एक गारमेंट कंपनी में बतौर मैनेजर काम करके घर में पैसे लाता है तो वहीं दूसरी तरफ सुलोचना घर पर रहकर अपने 11 साल के बच्चे को पालती है. लेकिन इन सब के बीच सुलोचना के अपने ही सपने हैं. मिडिल क्लास परिवार होने की वजह से हालात सुलोचना के खिलाफ है लेकिन उसकी आशावादी सोच उसे हमेशा इसी बात का एहसास दिलाती है की वह सफल हो सकती है.

Tumhari Sulu

जिंदगी सुचारु रूप से चलती रहती है इस तीन लोगों के हंसते खेलते परिवार में. खुशी और गम आते जाते रहते हैं. लेकिन एक दिन जब सुलोचना को एक रेडियो स्टेशन में रात के रेडियो शो का आरजे बनने का जब मौका मिलता है तब सभी की जिंदगी बदल जाती है. सच मायनों में कहें तो इस फिल्म में ह्रषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी की फिल्मों में जिस तरह के परिवार हमने देखें हैं उसकी खुश्बू आपको इस फिल्म में मिलेगी.

एक्टिंग

तुम्हारी सुलु उन फिल्मों की कतार में खड़ी होती है जिसमे सभी का अभिनय सधा हुआ है जिसका असर फिल्म पर पड़ता है. कहने का मतलब यह है की जो भी ख़ामियां हैं वो ढक जाती हैं. विद्या बालन ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि मौजूदा अभिनेत्रियों में अभी भी उनकी कूवत ऐसी है कि अब उनके लिए रोल लिखे जाने लगे हैं. सुलोचना दुबे के किरदार को उन्होंने इतने शानदार तरीके से निभाया है कि और किसी अभिनेत्री की कल्पना आप उस रोल में नहीं कर सकते हैं.

मानव कौल ने अभिनय से 10 सालों का वनवास लिया था और आने के बाद उन्होंने शुरुआत फिल्म काईपोचे से की थी. उनको देखकर ऐसा लगता है की हर फिल्म के साथ वो सीढ़ी चढ़ते जा रही है. उनका रोल एक ऐसे पति का है जो अपनी पत्नी को खुश रखने की कोशिश करता है लेकिन साथ ही साथ दफ्तर में अपने काम के दबाव की पीड़ा के गुस्से को दबाकर भी चलता है. मानव का काम बेहद सधा हुआ है. इस बार इस फिल्म में ग्लैमर के बदले नेहा धूपिया के काम के दीदार हुए हैं. लेकिन सही मायनों में एक अच्छी फिल्म बनाने का सेहरा अगर किसी के सर जाता है तो वो है फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी.

डायरेक्शन

तुम्हारी सुलु को देखकर ये कही से भी नहीं लगता है की ये सुरेश की यह पहली फिल्म है. खैर उनके बारे में यह बताना जरूरी हो जाता है की जिस मौका-मौका विज्ञापन सीरिज़ ने भारत पाकिस्तान क्रिकेट मैचेस के दौरान सुर्खियाँ बटोरी थी उनको बनाने वाले सुरेश ही थे.

अगर कोई पूछे कि इस फिल्म में कमाल की बात क्या है तो शायद इसका उत्तर कोई भी तुरंत नहीं दे पायेगा लेकिन जिस तरह से इस फिल्म मे आम जिंदगी को चित्रित किया है वो कहीं न कहीं दिल को छू जाती है. लोगों के किरदार फिल्म में ऐसे हैं जिनको देखकर यह लगता है की अरे यह तो हमारे पड़ोस में ही रहता है.

जब तक फिल्म का माहौल हल्का और खुशनुमा रहता है तब तक फिल्म को देखने में बेहद मज़ा आता है लेकिन जब ड्रामा की मात्रा घर में बढ़ जाती है सुलु के आरजे बनने के बाद तब फिल्म में थोड़ा ढीलापन आ जाता है. लेकिन इससे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है. मिडिल क्लास परिवार इस फिल्म से खुद को काफी हद तक अपने को करीब पाएंगे क्योंकि अधिकतर की चाहत यही होती है कि वो जीवन में आगे बढ़े और कुछ नया करें.

VIDYA BALAN IN TUMHARI SULU

फिल्म का यही सार भी है. लगभग 2 घंटे और 20 मिनट की इस फिल्म की लेंथ को और भी कम किया जा सकता था. तुम्हारी सुलु की कहानी मानवीय दृढ़ निश्चय की है जिसको आम इंसानी रिश्तों के तार में पिरोया गया है. इस वीकेंड अगर आपका कुछ पुख्ता प्लान नहीं है तो आप इस फिल्म को ज़रूर देख सकते हैं. आपको अपनी या फिर आसपास के माहौल की झलक ज़रूर देखने को मिलेगी जो आपको लुभायेगी.

 

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