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Exclusive : नेपोटिज्म से आपको सिर्फ डेब्यू मिल सकता है, करियर नहीं – उत्कर्ष शर्मा

फिल्म जीनियस की रिलीज के बाद उत्कर्ष शर्मा ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड और नेपोटिज्म पर की है एक्सक्लूसिव बातचीत

Updated On: Aug 29, 2018 03:37 PM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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Exclusive : नेपोटिज्म से आपको सिर्फ डेब्यू मिल सकता है, करियर नहीं – उत्कर्ष शर्मा
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डायरेक्टर अनिल शर्मा के बेटे उत्कर्ष शर्मा की फिल्म जीनियस इस हफ्ते रिलीज हो चुकी है. इस फिल्म से उत्कर्ष शर्मा और इशिता सिंह ने बॉलीवुड में डेब्यू किया है. हमने बात की बॉलीवुड के इन दो नए स्टार्स से जो अपनी फिल्म की रिलीज हो लेकर बेहद एक्साइटिड नजर आए.

उत्कर्ष आप फिल्मी फैमिली से आते हैं, कब से आपको लगा कि मैं अपना करियर बॉलीवुड में बनाऊंगा?

जी, गदर में मैंने चाइल्ड आर्टिस्ट का काम किया था, फिल्म में सनी देओल के बेटे के रोल में आपने जरूर मुझे नोटिस किया होगा. उस दौरान मुझे नहीं लगा था कि मैं बॉलीवुड में अपना करियर बनाऊंगा, क्योंकि मुझे उस वक्त ये लाइन बहुत कठिन लगी. यहां सब कुछ रीयल करना पड़ता है. एक्टिंग, स्टंट्स, डांस, फिटनेस बहुत कुछ...तब मुझे था कि मैं कभी फिल्मों में नहीं आऊंगा. क्योंकि फिल्मी फैमिली से था तो पापा का मैं छोटे-छोटे कामों में हाथ बंटाया करता था. इसलिए इस फील्ड में मैं बचपन से काम करता हूं. सलमान खान की वजह से मैं फिल्मों में आया हूं. सलमान खान वैसे कैमरे के बाहर एकदम अलग हैं लेकिन जैसे ही वो कैमरे के सामने आते हैं बिल्कुल अलग बन जाते हैं. वो हीरो बन जाते हैं और कौन फिल्मों में उनकी तरह नहीं बनना चाहता. तब उनको देखकर मुझे लगने लगा कि मुझे एक्टर ही बनना है.

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कितने साल पहले आपने पक्का मन करके डिसाइड कर लिया था कि अब तो बॉलीवुड में ही जाना है?

जब में 16-17 साल का था, तब से दोस्तों की शॉर्ट फिल्म्स में मैंने एक्टिंग शुरू कर दी थी. फिर मैं अमेरिका चला गया फिल्म मेकिंग पढ़ने के लिए. वहां मैंने एक्टिंग भी सीखी. मुझे फिल्म मेकिंग की जानकारी है. मैंने फिल्में बनते भी देखा है. फिल्मों की किताबी पढ़ाई भी की है. इसलिए अच्छा-बुरा जो भी था मुझे उसका एक्सपीरियंस है.

फिल्म जीनियस आपको कैसे मिली?

जब में कॉलेज के सेकेंड ईयर में था, उस वक्त पापा ने ये स्टोरी एक 40-45 ईयर के एक्टर के लिए लिखी थी. मेरे पिता ऐसी फिल्में बनाते नहीं हैं, जिसमें किसी का डेब्यू हो सके. उनकी फिल्में गदर,वीर टाइप लार्जर दैन लाइफ के एक्टर्स के लिए होती हैं. जब ये स्क्रिप्ट लिखी गई थी उस वक्त इसका कैरेक्टर डेवलप करने में मैंने पापा की मदद की थी. वो लेकिन एक अलग जोन की फिल्म थी. जब मैं यहां आया तो उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास एक स्टोरी है जिसका नाम है जीनियस. मैंने उनसे कहा कि ये तो वो ही स्टोरी है तो उनका जवाब था कि इसे मैंने पूरी तरह से बदल दिया है. मैं यूथ के बारे में कुछ कहना चाहता हूं जो वेस्टर्न टाइप का हो लेकिन अंदर से उसके दिल में देशभक्ति की जुनून हो. तो मुझे लगा कि हां ये मेरे लिए सही स्क्रिप्ट है.

क्या डायरेक्टर अनिल शर्मा के साथ आपको कभी लगा कि आप यंग जेनेरेशन और पापा पुराने विचारों वाले निर्देशक?

मैं ये कभी नहीं मानता हूं कि कोई फिल्ममेकर ओल्ड स्कूल है. हॉलीवुड में सबसे बड़े फिल्ममेकर्स आज भी स्टीवन स्पिलबर्ग हैं, मार्टिन स्कॉरसेज ही हैं. क्लिंट ईस्टवुड हैं, जो आज भी ऐसी फिल्में बनाते हैं जो वहां के यंग डायरेक्टर्स नहीं बना सकते. मैं मानता हूं कि डायरेक्टर वाइन की तरह होता है जो उम्र के साथ और फाइन होता जाता है. राजकपूर सर ने अपनी जिंदगी का बेस्ट काम अपनी ओल्ड ऐज में किया था. अनिल शर्मा की ये स्क्रिप्ट जरूर मसाला फिल्म है लेकिन ये काफी मॉर्डन फिल्म है. दो जीनियसों की बाजुओं से ज्यादा ये दिमाग की लड़ाई है. मैं जरूर उनको सलाह देता हूं लेकिन फिर भी मैं ये मानता हूं कि डायरेक्टर को ही पता होता है कि फिल्म कैसे बनानी है. जैसे गदर के वक्त सभी ने ये कहा था कि उसमें से हैंडपंप वाला सीन निकाल दीजिए लेकिन वो सीन आज भी उस फिल्म का सबसे ऑइकॉनिक सीन है.

अनिल शर्मा से आपका रिश्ता सेट पर पिता-पुत्र वाला था या एक्टर-डायरेक्टर वाला?

सेट पर वो मुझे वैसे ही ट्रीट करते थे जैसे वो नवाज सर को या मिथुन सर को करते थे. जैसे इशिता को करते थे. मैं हमेशा उनकी सुनता था क्योंकि मैं भले ही अमेरिका से फिल्ममेकिंग पढ़कर आया हूं लेकिन मैं बॉलीवुड में काम करने आया हूं. यहां की फिल्ममेकिंग की जानकारी जितनी डायरेक्टर अनिल शर्मा को है मुझे नहीं है. उन्होंने लेजेंड्री एक्टर्स के साथ काम किया है. मेरी तो अभी शुरुआत है. हमारी बातें हमेशा क्रिएटिव होती थीं. मैंने पहले भी उनके साथ काम किया था इसलिए मैं उनको हमेशा समझता हूं. एक डायलॉग के लिए उन्होंने मुझे मसूरी में मैदान के दस चक्कर लगवाए ताकि चेहरे पर थकान न लगे. ये वो हार्ड टास्क मास्टर हैं.

Utkarsh Sharma with Anil Sharma

नवाजुद्दीन सिद्दीकी और मिथुन चक्रवर्ती के साथ क्या आपको फेस करने में डर लगा?

जी बिल्कुल, पहली बार जब मैं मिथुन सर के साथ शॉट देने जा रहा था तो मैं काफी नर्वस था. लेकिन ये एक्टर्स इतने रिफाइन हैं कि उन्हें पता होता है कि सामने नया एक्टर है तो वो और सहज हो जाते हैं. बड़े एक्टर्स की खूबी यही है कि वो आपका काम और अच्छा और आसाना कर देते हैं.

आपके कैरेक्टर वासुदेव शास्त्री के बारे में बताइए?

वासुदेव शास्त्री मथुरा-वृंदावन का है. छोटे शहर से आता है, उसके सपने बड़े हैं. जीनियस है. पैदा ही हुआ था तो पुजारियों ने उसे पाला. आईआईटी में जाता है. 21 साल में वो रॉ से जुड़ जाता है. उसने वेद भी पढ़ा है विज्ञान भी पढ़ा है. उन्हीं परिस्थितियों में वो फंस जाता है. जिससे उसकी लाइफ कॉप्लीकेटेड है. लेकिन इतने लेयर्स हैं कि आपको बड़ा मजा आएगा देखने में.

इसमें एक होली का गाना है, उसके बारे में आप क्या सोचते हैं?

ये होली में आने वाला ट्रेंडिंग गाना है. इतना अच्छा म्यूजिक है. इस होली में तो ये जमकर बजेगा. हमने 10 ट्रक गुलाल उड़ाया है. जो बहुत ही धमाकेदार था. वृंदावन के सुंदर मंदिरों में इसे फिल्माया गया है. इसे देखकर हर किसी को होली खेलने का मन कर जाएगा.

आपकी फैमिली मथुरा की है. आपकी वहां की क्या यादें हैं?

फिल्म के शूट से पहले में एक ही बार मथुरा गया था. इस बार जब मेरा शूट के लिए जाना हुआ. इस बार में वहां खूब लोगों के साथ रहा. बिहारी जी के मंदिर के लोगों के साथ और वहां के पंडों के साथ मुझे रहने का मौका मिला. मैं वहां किसी को बताता नहीं था कि मैं एक्टर हूं लेकिन फिर भी लोगों को पता चल जाता था तो लोग मिलने आते थे. वहां के लोगों की ये खासियत है कि वो लोग दिल से जुड़ जाते हैं. अब जब फिल्म आ रही है तो वहां हमें बिना प्रमोशन के भी शानदार रिस्पांस मिल रहा है.

नए एक्टर्स की जमात में फिट होने के लिए आपकी क्या तैयारी है?

मेरी सबसे बड़ी तैयारी ये थी कि मैंने एक्टिंग पर काफी काम किया है. इस फिल्म में मैंने काफी रियलिस्टिक रहने की कोशिश की है. मैं चाहता तो डेब्यू फिल्म में काफी कुछ कर सकता था मुझे टैप डांस आता है. ब्रेकडांस आता है लेकिन मैंने कैरेक्टर को पकड़ने की कोशिश की है. कोई हीरोगीरी नहीं की है. और जैसे जैसे रोल आते जाएंगे, मैं तैयारी करता रहूंगा.

आपका ड्रीम रोल क्या है?

मैं बॉलीवुड में एक्टिंग करने आया हूं. मैं ऐसे कैरेक्टर्स प्ले करना चाहता हूं जिनमें वेरिएशन करने को मिले. मैं एक ही चीज को बार-बार रिपीट नहीं करना चाहता हूं.

आपने फिल्ममेकिंग की पढ़ाई की है, डायरेक्शन करने का क्या इरादा है?

मेरे अंदर फिलहाल तो एक्टिंग की आग है. मैं अभी लोगों के लिए फिल्मों में रोल करना चाहता हूं. कहने की आग अभी मेरे अंदर जगी नहीं है. जब जागने लगेगी तभी इस पर और काम करूंगा.

आप फिल्मी फैमिली से हैं तो नेपोटिज्म पर आपसे एक सवाल तो बनता है. क्या हैं आपके विचार इस पर?

हमारी फिल्म में भी मेरी हीरोइन इशिता का कोई बैकग्राउंड नहीं है. उनको फिल्म मिल गई. आपको नेपोटिज्म से एक मौका मिल सकता है लेकिन ये बॉलीवुड में आपका करियर नहीं बना सकता. ये पैशन वाली लाइन है. इसमें कमिटमेंट से लगे रहना पड़ता है. चाहे कोई फिल्मी फैमिली से आ जाए लेकिन वो चलेगा तभी जब तक पैशन है, टैलेंट है.

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