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Exclusive : 5 साल में 100 फिल्मों से बॉलीवुड की स्टोरी टैलिंग को बदल देगा ‘यूडली’ – सिद्धार्थ आनंद कुमार

यूडली की फिल्मों अज्जी और ब्रिज मोहन अमर रहे को क्रिटिकली जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है

Updated On: Sep 02, 2018 08:23 PM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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Exclusive : 5 साल में 100 फिल्मों से बॉलीवुड की स्टोरी टैलिंग को बदल देगा ‘यूडली’ – सिद्धार्थ आनंद कुमार
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‘यूडली’, फिल्मों की दुनिया में ये एक ऐसा नाम है जिसने पिछले एक साल में ‘स्टोरी’ को फिल्मों का ‘हीरो’ बना दिया है. संगीत के मशहूर बैनर सारेगामा के बैनर तले यूडली की अज्जी, कुछ भीगे अल्फाज़ और ब्रज मोहन अमर रहे जैसी फिल्में आ चुकी हैं. इस फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत ये ही है कि जिसने भी इन फिल्मों को अभी तक देखा है उसे जितने इसे स्टार्स याद नहीं हों लेकिन इनकी स्टोरी दिमाग में छपी हुई है.

यूडली के पीछे की क्रिएटिव सोच और इसके वाइस प्रेसिडेंट सिद्धार्थ आनंद कुमार से हमने एक लंबी बातचीत की और उनसे जानने की कोशिश की कि वो आने वाले वक्त में दर्शकों को कैसे सरप्राइज करने वाले हैं?

सिद्धार्थ आपसे पिछली बार जब मुलाकात हुई थी उस वक्त आपका 12 फिल्में रिलीज करने का प्लान था, वो कहां तक पहुंचा है?

जी, अज्जी पीवीआर के साथ हमने मिलकर बॉक्स ऑफिस पर रिलीज कर दी थी, हमारी दूसरी फिल्म ब्रजमोहन अमर रहे, इन दिनों नेटफिलिक्स पर स्ट्रीम हो रही है. ऑनिर की ‘कुछ भीगे अल्फाज़’ अक्टूबर से नेटफिलिक्स पर आपको देखने को मिलेगी. हमने चार फिल्में नेटफिलिक्स को बेच दी हैं.

पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड फिल्मों का कॉन्टेंट बहुत तेजी से बदल गया है, अब घटिया फिल्मों के लिए यहां जगह नहीं है...आप इस बदलाव को कैसे देख रहे हैं?

जी, बिल्कुल सही कहा आपने. हम लोग भी इस पर एनालिसिस करते रहते हैं क्योंकि हमारा तो बिजनेस ही ये ही है कि आगे क्या बनाएं...अब यहां पर रीयल और लॉजिकल स्टोरीज चलने लगी हैं. अभी भी कमर्शियल और नॉन-कमर्शियल फिल्मों में फर्क है. कमर्शियल फिल्मों में पैकेजिंग ज्यादा रहती है, एक्टर्स बड़े होते हैं. उससे इनका एक फ्रैंचाइज बन गया है.

अगर आप सलमान सलमान के साथ ट्यूबलाइट बनाएंगे तो वो फेल हो जाएगी. ये वैसी ही बात हो गई जैसे आप मैकडोनाल्ड्स में आए और मैंने आपसे पूछा कि आप कौन सा बटर चिकिन खाएंगे...ट्यूबलाइट मैंने देखी अच्छी फिल्म थी लेकिन चली नहीं क्योंकि वहां पर कुछ ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई, जैसा लोगों को सलमान की फिल्म से एक्सपेक्टेशन होता है, वो वहां नहीं मिला.

कमर्शियल सिनेमा और हमारे इंडिपेंडेंट सिनेमा में अभी थोड़ा फर्क है. हमारी फिल्मों के लिए जब आप आएंगे तो आपका एटिट्यूड ने नहीं होगा कि मैं राजा हूं, मुझे एंटरटेन करो. जो कमर्शियल सिनेमा के साथ होता है. हमारे यहां स्टोरी पर ज्यादा जोर है...ना कि वैसे एंटरटेन करने पर. ऑडियंश की हमेशा डिमांड थी कि हमें अच्छी पिक्चरें दिखाओ लेकिन अब उसे फिल्ममेकर्स ने समझ लिया है. जैसे अक्षय कुमार एक फ्रैंचाइज बन गए हैं, वो हमारे नई जेनेरेशन के मनोज कुमार हैं. उसने देशभक्ति की फिल्मों की उम्मीद अब दर्शकों को है.

आप दूसरों से अलग कैसे हैं?

हम अब ये ट्राइ कर रहे हैं कि हमारा क्या फ्रैंचाइज हो. तो हम ये पहचान बनाने में लगे हैं कि हमारी फिल्मों की स्टोरी सबसे अलग हो, ऐजी हो, डीप हो. डेप्थ स्टोरी का मतलब ये नहीं है कि सारी फिल्मों डार्क होंगी. जैसे हमने चार पहली जो फिल्में बनाई ब्रजमोहन अमर रहे सहित, वो डार्क थी. ये फिल्म है तो कॉमेडी लेकिन डार्क है. लेकिन अब हमने थिमैटिक फिल्मों पर काम शुरू कर दिया है. जो इनसे एकदम अलग है. अभी हम एक और फिल्म के साथ तैयार हैं, जिसका नाम है हबड्डी, ये मराठी फिल्म है. एक गांव के तोतले बच्चे की कहानी है. और गांव से निकलकर ये बच्चा शहर जाता है और चैंपियन बनता है. इसमें हमारा थिमैटिक ये है कि आप खुद को कैसे ठीक कर सकते हैं.

आप रीजनल फिल्मों में भी आ रहे हैं इसका प्लान कैसे बना?

बॉक्स ऑफिस पर हमारे जैसे प्लेयर्स के लिए एक समस्या आ रही है. बिना स्टार्स की फिल्मों के लिए थिएटर्स में बने रहना मुश्किल काम है. थिएटर्स में वो ही फिल्में टिक सकती हैं जिनकी पब्लिसिटी बहुत बड़े लेवल पर होती है. लेकिन हमारी फिल्मों को वर्ड ऑफ माउथ से जब तक दो-तीन हफ्तों में पब्लिसिटी मिलती है थिएटर्स तब तक उसको हटा देते हैं. क्योंकि बड़े स्टार्स की फिल्में रिलीज हो रही होती हैं. लेकिन रीजनल सिनेमा में अभी भी छोटी फिल्मों के लिए मौका है. रीजनल फिल्मों में हमारा काम बन जाता है क्योंकि हमें अपनी पहचान बिना बदले स्टोरी बताने का मौका मिल रहा है. ये बॉक्स ऑफिस के साथ भी है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ भी है. अब ज्यादा ध्यान सभी का रीजनल सिनेमा पर है.

दर्शकों को लेकर आपकी रिसर्च क्या है?

जी, हमारे दर्शक बहुत तेजी से मैच्योर हो रहे हैं, या हो गए हैं. हमने रिसर्च की है कि छोटे शहरों में लोग रात को फोन पर कॉन्टेंट ज्यादा देखते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को वो फैन बन रहे हैं. ऐसे में सब कुछ बहुत तेजी से बदल रहा है. 80 के दशक में जैसे सेट पैटर्न फिल्मों का होता है था. डांस, ड्रामा, एक्शन और रोमांस वाला वो अब कम हो रहा है...फिल्में एक ही डायरेक्शन में जाती हैं. म्यूजिक है भी तो एक्टर्स उस पर लिप सिंक नहीं कर रहे हैं. ये सब कुछ वीडिओ ने आकर बदल दिया है और हम इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

Yoodlee

क्या हम ये मानकर चलें कि अगले पांच साल में बॉक्स ऑफिस पर फिल्में रिलीज होना बंद हो जाएगा?

बॉक्स ऑफिस पर हमारे सामने जो दिक्कत आई थी वो ये थी कि हमारी फिल्मों को पब्लिसिटी वर्ड ऑफ माउथ से मिलती है. ऐसे में जब कोई फिल्म देखने का दो हफ्ते बाद मन बनाता है तो उसे कहीं भी थिएटर में ये फिल्म देखने को नहीं मिलती. ऐसे में हमने ये प्लान ही बदल दिया कि हम सारी फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर ही रिलीज करेंगे. थिएटर्स का बिजनेस ही ऐसा है, टैक्सेशन इसमें बड़ी दिक्कत है, तो उनकी मजबूरी हो गई है कि वो सिर्फ बड़ी फिल्मों को ही दिखाएं, जिसमें भीड़ हाउसफुल स्टाइल में देखने आए. हमारा कल्चर अब काफी बदल गया है. इंटरनेट ने इसे पूरी तरह से बदला है. हम शॉपिंग करने की आदतें बदल चुके हैं तो फिल्में देखने की भी बदल रही हैं.

आपकी फिल्मों का रिकवरी कैसे हो रही है?

मैं आपको बता दूं कि अब तक हमने जितनी भी फिल्में रिलीज कर दी हैं हम प्रॉफिट में हैं. हमने फिल्मों का स्टॉक कर लिया है और फिल्में लगातार बना भी रहे हैं. हमने एक ऐसा मॉडल बना लिया है कि हम बड़ी लेवल पर आइटम सॉन्ग टाइप का काम नहीं कर रहे हैं. ऐसे में हमारी कॉस्ट कंट्रोल में रहती है. हमने एक्टर्स को अपनी फिल्मों में रॉयलिटी का पार्टनर बनाया है. क्योंकि फिल्मों में सबसे ज्यादा पैसा एक्टर्स लेकर जाते हैं वो हमसे जुड़ रहे हैं क्योंकि उनकी फिल्में लाइफटाइम चलेंगी और वो हमेशा पैसा कमाते रहेंगे. इसी मॉडल पर अब दूसरे बड़े प्रोडक्शन हाउस भी काम कर रहे हैं.

आपकी आने वाले फिल्में कौन सी हैं?

हमारी एक फिल्म हामिद है. उस पिक्चर में एक सात साल के बच्चे के पिता गायब हो जाते हैं. पता नहीं उनको कौन ले गया. वो स्कूल जाता है वहां से 786 नंबर डायल करता है. अल्लाह से बात करता है कि मेरे अब्बू को वापस कर दो. हम इसकी रिलीज कश्मीर में करना चाहते हैं. वहां हम मीडिया में इसकी पब्लिसिटी करेंगे. जब तक ये फिल्म दिल्ली और मुंबई में आएगी इसका वर्ड ऑफ माउथ बन गया होगा. जैसा फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड विनिंग फिल्मों को साथ होता है. अक्टूबर में हमारी कुछ भीगे अल्फाज़ आ रही है, एक और फिल्म हमारी आश्चर्य फक इट है, जो जल्दी ही आपको नेटफिलिक्स पर देखेगी.

आप बॉक्स ऑफिस पर कब आ रहे हैं?

हम जल्दी ही बॉक्स ऑफिस पर नजर आएंगे. क्योंकि अगर बड़ा बिजनेस करना है तो आपको जनता के पास सीधे जाना पड़ेगा. हम अब तक बड़े स्टार्स के साथ काम नहीं कर पाए हैं लेकिन अगर बड़े स्टार्स के साथ काम करने को तैयार हैं. हमें फिल्में बनाना आ गया है. तो हम जल्दी ही बॉक्स ऑफिस विनर्स भी बनाने के लिए तैयार हैं.

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