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Exclusive : वेब सीरीज 'स्टिल अबाउट सेक्शन 377' के 'गे कपल' की देहाती कहानी से रूबरू कराएंगे अमित खन्‍ना

एलजीबीटी कम्यूनिटी पर आधारित वेब सीरिज का दूसरा सीज़न 'स्टिल अबॉउट सेक्शन 377' निर्देशक अमित खन्ना लेकर आ रहे हैं.

Updated On: Sep 15, 2018 12:30 AM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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Exclusive : वेब सीरीज 'स्टिल अबाउट सेक्शन 377' के 'गे कपल' की देहाती कहानी से रूबरू कराएंगे अमित खन्‍ना
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इन दिनों वेब सीरीज को खासा पसंद किया जा रहा है. डिजिटल प्‍लेटफार्म आने से इनमें अब और तेजी देखी जा रही है. जिसके चलते अब नए-नए विषयों पर इनका निर्माण किया जा रहा है. इन वेब सीरीज का अपना एक दर्शक है। हाल ही में एलजीबीटी कम्यूनिटी पर आधारित 'ऑल अबॉउट सेक्शन 777' नामक वेब सीरिज आई थी.

अब इसका दूसरा सीज़न 'स्टिल अबॉउट सेक्शन 377' नाम से लेकर निर्देशक अमित खन्ना आ रहे हैं. जिनसे हमने एक लंबी बातचीत की और उनसे जानने की कोशिश की कि अपनी दूसरे सीजन से जरिए दर्शकों को कैसे सरप्राइज करने वाले हैं?

अमित जी वर्तमान में पूरा भारत देश समलैंगिकता पर आए सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के जश्‍न में डूबा हुआ है, क्‍या आपको लगता है कि यह फैसला समाज में फैली पुरानी धारणाओं को दूर कर पाएगा..? आपके मुताबिक क्‍या सच में यह एलजीबीटीक्यू समूहों को मुख्यधारा में लाने और एक मजबूत समावेशी समाज को बनाने में मदद कर सकता है..?

'हां' बिल्‍कुल, धारा 377 का खत्‍म होना पहला कदम है, इसको एक शानदार शुरूवात तौर पर देखा जा रहा है. हमे निश्चित तौर पर इस मुद्दे में सामाजिक स्‍वीकार्यता की समस्‍या का सामना करना पड़ेगा. लेकिन एलजीबीटीक्यू समूह को किसी विशेष रूप में देखने की जरूरत नहीं है. इसे सामान्‍य व्‍यवहार के साथ ठीक किया जा सकता है. हमको यह समझना चाहिए की गे और लेस्बियन एक स्‍थिती है जो सामान्‍य है. इसे ना प्रचारित करना चाहिए, जिससे कि यह किसी की पहचान बने. हमें इस बिषय पर खुलकर बात करने की जरूरत है और इसे दूर करने के लिए कुछ प्रयास करना चाहिए. वहीं प्रमुखता से एलजीबीटीक्यू को लेकर स्कूलों/कॉलेजों और सिनेमा जैसे विभिन्न प्रभावशाली माध्यमों से इसको लेकर जागरूकता फैलाना ही महत्वपूर्ण है.

Poster

एलजीबीटीक्यू अधिकारों की लड़ाई में अधिक सक्र‍िय होने बाद भी आप इस लड़ाई को लड़ने वालों की पहली पंक्‍ति में क्‍यों नहीं हैं..?

मैं अपनी रचनात्मक शारीरिक क्षमता के जरिए लोगों को जागरुक करने में खुश हूं. मुझे लगता है हम सभी ने इस कारण के लिए अपने तरीके से कुछ ना कुछ जरूर किया है. वहीं अलग दिखने के लिए आगे आने की जरूरत नहीं है. पर्दे के पीछे काम करना ही किसी भी बदलाव का एक अहम पहलू है।

अपनी इस वेब सीरीज के जरिए एलजीबीटीक्यू समूह से आपको किस तरह की प्रतिक्र‍िया मिली है..?

जी, हमें अपनी इस वेब सीरीज के जरिए एलजीबीटीक्यू समूह का शानदार रिस्‍पॉन्‍स मिला है. उनके द्वारा दिए जा रहे मैसेज यह बताते हैं कि हमारी यह सीरीज, परिवार और दोस्‍तों के नजरिए में बदलाव को लेकर उनकी किस हद तक और कैसे मदद कर रही है. हमें इस बात की बेहद खुशी होती है जब हमें लगता है कि हमारा शो इतने सारे विचार और उनके सामाजिक विरोधाभास होने के वावजूद भी लोगों को एक कर रहा है.

दूसरे सीजन की प्रमुख विशेषताएं क्‍या हैं ?

दूसरे सीजन में भारत के ग्रामीण इलाके की कहानी को दर्शाया गया है. गांव में लोगों को 'एलजीबीटी कम्यूनिटी' के बारे में बहुत कम जानकारी है. वे इसे एक बीमारी मानते हैं. दूसरे भाग में फोकस रूरल एरिया पर है. इस बार ट्रांसजेंडर ट्रेक भी दिखाया गया है. जिसका अंत अच्‍छा तो नहीं लेकिन सच्‍चाई यही है. यह शायद ही पहले किसी वेब सीरिज में दर्शाया गया हो.

इस सीरीज में आपका सबसे पसंददीदा किरदार कौन सा है ?

मेरा सबसे पसंदीदा किरदार दादी का है जो हमेशा सबको हंसाती है और प्यार करती है. अपनी इस उम्र के बावजूद पूरी जिंदगी जीना चाहती है.

क्‍या ऐसा कोई किरदार है जो आप पर आधारित हो ?

ऐसा कोई किरदार नहीं है जो मुझ पर आधारित हो.

निरंजन इयेंगर ने आपके लिए डायलॉग लिखे हैं, जककि वह करण जौहर कि अधिकांश फिल्‍मों में काम कर चुके हैं. आपने उन्‍हें अपनी इस सीरीज के लिए कन्विंस किया ?

निरंजन मेरा अच्‍छा दोस्‍त है, जब उसने इसका पहला सीजन देखा तो उसकी काफी तारीफ की. वहीं जब मैंने दूसरे सीजन की स्क्रिप्ट उसको सुनाई तो वह उसे बेहद पसंद आई और वह तुरंत हमारे साथ शामिल हो गया. उसने हमेशा मुझे प्रोत्साहित किया और बहुत ही सहायक रहा. मैं उसके कीमती समय और इनपुट के लिए वास्तव में आभारी हूं.

क्‍या आप ऐसा सोचते हैं कि सामान्‍य लोगों को मुख्‍य रूप से एलजीबीटीक्यू समूह पर बेस्‍ड सीरीज दिखाना मुश्किल है? क्या यह आपको सही दिखाता है.

हम आपको बता दें कि हमारी यह सीरीज एलजीबीटीक्यू के बारे में है, लेकिन एलजीबीटीक्यू के लिए नहीं. और इसीलिए मुझे नहीं लगता कि हमें सीधे कम्‍यूनिटी को कन्विंस करने की जरूरत है क्योंकि हमारे शो में कोई प्यार करने जैसे सीन नहीं हैं, यह आपक नजरिए के बारे में है, प्यार के बारे में सच्ची भावनाओं के बारे में, जो हर व्यक्ति वास्तव में इस शो के माध्यम से सीधे समुदाय से अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त कर रहा है.

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