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पुण्यतिथि विशेष : किन परिस्थितियों में यश चोपड़ा ने रखी थी यशराज स्टूडियो की नींव

यश चोपड़ा के जीवन की कुछ अनसुनी कहानियां जिनकी वजह से चोपड़ा परिवार में पड़ी थी दरार

Updated On: Oct 21, 2017 04:18 PM IST

Sunita Pandey

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पुण्यतिथि विशेष : किन परिस्थितियों में यश चोपड़ा ने रखी थी यशराज स्टूडियो की नींव

कहानी बिल्कुल यश चोपड़ा की फिल्म 'दाग' के स्टाइल में घटी. 'दाग' का हीरो सुनील (राजेश खन्ना) अपनी नवविवाहिता पत्नी सोनिया (शर्मीला टैगोर) के साथ हनीमून मानाने विदेश जाता है, और वहां से लौटने के बाद दोनों अलग होने का फैसला कर लेते हैं. यश चोपड़ा ने भी बी.आर चोपड़ा के साथ यही किया.

अपनी शादी के बाद वे हनीमून मानाने स्विजरलैंड गए और वहां से जब वापस लौटे तो उन्होंने अपने बड़े भाई के बैनर बी.आर फिल्म से खुद अलग करके यशराज फिल्म की स्थापना की. इस घटना ने बी.आर के सपनों को चूर- चूर कर दिया. क्योंकि वो अपने परिवार को जीते जी दो धड़ों में बंटते नहीं देखना चाहते थे.

बी.आर चोपड़ा ने सिखाया फिल्म विधा का पाठ

यशजी को सीनियर चोपड़ा बेइंतहा प्यार करते थे. वो उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे. लेकिन यश जी की रोमांटिक कल्पना इतनी सधी हुई थी कि बी.आर चोपड़ा ने उन्हें फिल्मों में लाना ही बेहतर समझा.

उन्होंने यश चोपड़ा को न केवल फिल्म विधा का पाठ पढ़ाया, बल्कि उन्हें यहां स्थापित करने का के लिए करोंडो रुपये का दांव लगाकर फिल्में भी बनाई.

'धूल का फूल' ने रचा सफलता का इतिहास

बी.आर चोपड़ा ने जब यश चोपड़ा को 'धूल का फूल' में निर्देशन का पहला अवसर दिया तो फिल्म की अलग थीम के कारण लोगों ने यहां तक घोषणा कर दी कि यह बी.आर फिल्म की आखिरी फिल्म होगी. निर्देशक के रूप में यश चोपड़ा का नाम आने के बाद वितरकों ने भी फिल्म से हाथ खींच लिये. एक बोल्ड फिल्म बनाने के लिए वितरक बी.आर चोपड़ा जैसे अनुभवी निर्देशक पर तो विश्वास कर सकते थे, लेकिन यशजी पर भरोसा करने को कतई तैयार नहीं थे, पर बी.आर  चोपड़ा टस से मस नहीं हुए.

yash chopra

यह फिल्म उनकी भावनाओं से जुड़ी थी, क्योंकि इसके द्वारा उनका छोटा भाई अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर रहा था. यश चोपड़ा के लिए उन्होंने राजकुमार जैसे बड़े स्टार से भी पंगा मोल ले लिया. 'धूल का फूल' की सफलता में कोई कोर-कसर बाकी न रहे इसीलिए बी.आर चोपड़ा ने राजकुमार जैसे स्टार को मुहमांगी कीमत पर साइन किया.

चूंकि यश चोपड़ा नए थे इसीलिए राजकुमार ने बी.आर पर दबाव डाला कि उन्हें शूटिंग के समय हमेशा सेट पर मौजूद रहना होगा. यश चोपड़ा को जब यह बात मालूम पड़ी तो बी.आर चोपड़ा ने राजकुमार को फिल्म से चलता कर अशोक कुमार को ले लिया. समस्त चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उन्होंने यह फिल्म पूरी की. 'धूल का फूल' ने सफलता का जो इतिहास रचा वह एक अलग कहानी है.

मां के कारण भाइयों के रिश्तों में पड़ी दरार

'धूल का फूल ' के साथ यश चोपड़ा इंडस्ट्री में स्थापित हो गए. बी.आर चोपड़ा खुश थे कि उन्होंने छोटे भाई के प्रति अपना फर्ज अदा किया. साल 1951 में जब यश अपने बड़े भाई से मिलने मुंबई आ रहे थे तो उनकी मां ने बी.आर के लिए एक संदेश भी भेजा था कि इसे अपने से भी बड़ा आदमी बनाना और 'धूल का फूल' जैसी हिट फिल्म बनाकर बी.आर चोपड़ा ने यश चोपड़ा को सचमुच बड़ा आदमी बना दिया. लेकिन इसी बड़े आदमी ने शादी के बाद अपनी अलग राह पकड़कर उन्हें इतना बड़ा झटका दिया कि उन्होंने छह महीने तक बिस्तर ही पकड़ लिया.

बी.आर का सदमा इतना बड़ा था कि तीन दिनों तक बिना खाये-पीए वे बिस्तर पर पड़े रहे, जिसके कारण उनका स्वास्थ तेजी से गिरने लगा. डॉक्टर की सलाह पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया. काफी दवा के बाद बी.आर स्वस्थ तो हो गए लेकिन उनके निजी रिश्तों में हमेशा के लिए दरार पड़ गई.

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