S M L

सेंसर बोर्ड के संस्कारी थानेदार, बख्श दीजिए !

सेंसर बोर्ड के मेंबरान और उन जैसे साहेबान, आपसे किसने कहा कि- अच्छी महिलाएं गाली नहीं बकती ?

Ankita Virmani Ankita Virmani Updated On: Feb 25, 2017 09:47 PM IST

0
सेंसर बोर्ड के संस्कारी थानेदार, बख्श दीजिए !

सेंसर बोर्ड थाने के थानेदार और भारत में संस्कारों की रक्षा में अालोक नाथ से भी ज्यादा सजग पहलाज निहलानी के थाने में एक और लफंगी फिल्म को पकड़ा गया है.

फिल्म का नाम है ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’. इस फिल्म के ऊपर आरोप है कि ये छिछोरी, पोर्न और बदजुबान है. वैसे तो ये इस तरह की पहली फिल्म नहीं है लेकिन जिस चीज ने इसे खतरनाक और समाज विरोधी बना दिया वो इसका एक ‘औरत प्रधान’ फिल्म होना है.

C5VQkwrVYAIgzJE

‘मस्तीजादे’, ‘क्या कूल हैं हम’ को जनता के काबिल मान ली गईं तो शायद इसलिए क्योंकि वो तो पुरुष प्रधान फिल्में थीं और डोनाल्ड ट्रंप तो कह ही चुके हैं कि पुरुषों के बीच इसी तरह का मजाक चलता है.

वैसे दोषी पहलाज निहलानी नहीं हैं. लड़कियों के पापा, भाई, ब्वॉयफ्रेंड, पति, टीचर लगभग हर किस्म के पुरुष ने जो हमेशा से किया है वही निहलानी कर रहे हैं.

यानी महिला मां, बहन, बेटी, देवी, प्रेमिका, बॉस से ले कर चूंचूं के मुरब्बे तक सब कुछ बन जाए लेकिन बने उनके हिसाब और अंदाज से. वैसे बनते टाइम इस बात को भी ध्यान में रखना होता है कि जीवन के उस हिस्से में महिला के लिए सबसे महत्वपूर्ण कौन सा पुरुष है. पहले पिता जी, फिर अगर हुआ तो ब्वॉयफ्रेंड, फिर पति और बॉस बाद में बेटा या ओल्ड एज होम वाले.

एक लड़के के शादी से पहले, पहले क्या बाद में भी चार रिश्ते हो सकते हैं. पर शादी के लिए लड़की सबको वर्जिन ही चाहिए. वो क्या पहने, कितने समय तक घर से बाहर रहे, किसके साथ जाए, किससे शादी करे, दोस्त वो किसे बनाए, कितने बजे तक फोन पर बात करे, ये सारे फैसले हमेशा मर्द लेते हैं.

क्यूं भला?

अब आप कहेंगे कि स्त्री का सम्मान पुरुष नहीं बचाएगा तो कौन बचाएगा. बचाने के लिए आप लड़की के पीछे-पीछे डंडा लेकर चलते तो भी ठीक था लेकिन आपने डंडा मार कर उसे घर के नियमों के अंदर बंद कर दिया.

ये ही सारी चीजें क्यों उसके चरित्र के बारे में फैसला करेंगी?

लड़की की छोटी स्कर्ट आपको बता देती है कि वो आपके साथ रात गुजार लेगी, और उसका हंस के बात करना और शराब पीना तो इस बात पर ठप्पा है. है ना?

केवल स्कर्ट लड़की की और उसके आगे-पीछे, ऊपर-नीचे के सभी फैसले आपके, क्यों. और तो और लड़की की आजादी की लड़ाई भी पुरुष लड़ रहे हैं. कुछ तो लड़की के भरोसे छोड़ दो भाई.

Lipstick Under My Burkha

'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' महिला प्रधान फिल्म है जो महिलाओं की कल्पनाएं को लेकर बनाई गई है (फोटो: फेसबुक से साभार)

लड़का गाली दे तो बदजुबान, लड़की दे तो घटिया

लड़का शराब और सिगरेट पिए तो गंदे शौक. लेकिन लड़की पिए तो गंदा कैरेक्टर.

वैसे एक बात बताऊं आप गाली देते हैं या नहीं, शराब-सिगरेट पीते है या नहीं, गर्लफ्रेंड एक है या चार इससे महिलाओं को लेना-देना नहीं है.

अब तक जरा गनीमत थी कि औरतें 'मंडी', 'बैंडिट क्वीन', 'बेंड इट लाइक बेकहैम' जैसी फिल्में बना और देख पाती थीं. पर संस्कारों की जो आंधी चली है उसमे ये दिया भी बुझ गया.

आप एक महिला होने के नाते क्या देखेंगी और फिल्म में किस रूप में एक महिला को देखेंगी, इसका फैसला भी सेंसर बोर्ड करेगा.

सेंसर बोर्ड का फरमान कहता है कि, 'यह फिल्म महिला प्रधान है जो कि औरतों की कल्पनाएं को लेकर बनाई गई है. इस फिल्म में सेक्सुअल सीन हैं और ऑडियो पोर्नोग्राफी है’.

कौन से संस्कार?

भाई साहब, बोर्ड के मेंबरान और उन जैसे साहेबान आपसे किसने कहा कि अच्छी महिलाएं गाली नहीं बकती या ऑडियो पोर्न में उनकी दिलचस्पी नहीं है. अगर आपके घर की लड़कियां आपकी बात मान रही हैं तो इस बात की कोई गारंटी नहीं कि वो आपसे सहमत हैं.

अलंकृता श्रीवास्तव के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी चार महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जो समाज की बनाई बेड़ियों को तोड़कर जिंदगी जीना चाहती हैं.

यकीन मानिए ‘डर्टी पिक्चर’ से किसी भी महिला ने आहत हो कर आत्महत्या नहीं की. ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ देख कर भी कोई नहीं आत्महत्या करेगी. न ही गाली बकेगी और ना कुछ और अश्लील करेगी.

सेंसर बोर्ड का कहना है कि इस फिल्म में एक खास तबके को संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है. वैसे तो सेंसर बोर्ड थाने के थानेदार पहलाज निहलानी से ज्यादा शिकायत नहीं होनी चाहिए क्योंकि उनके खुले विचारों का सबूत तो यूट्यूब पर भरपूर मौजूद है. यकीन ना हो तो उनकी बनाई फिल्म अंदाज का ये गाना देखिए.

क्या खूब भावनाओं को पिरोया है. शब्द हैं

खड़ा है खड़ा है खड़ा है

खड़ा है खड़ा है खड़ा है

दर पर तेरे आशिक खड़ा है

वैसे ये किसी ने नहीं कहा कि ये आशिक संस्कारी और मां-बहनों का सम्मान करने वाला नहीं है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi