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पैडमैन चैलेंज: औरतों के लिए लड़ने वाला नहीं, सेक्सिस्ट है बॉलीवुड

बॉलीवुड की फिल्मों में महिला कलाकारों को वस्तु की तरह पेश किया गया है

Updated On: Feb 07, 2018 08:38 AM IST

FP Staff

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पैडमैन चैलेंज: औरतों के लिए लड़ने वाला नहीं, सेक्सिस्ट है बॉलीवुड

बॉलीवुड हमेशा से यह दावा करता आया है कि वह महिलाओं के प्रति संवेदनशील है और नारीवाद का समर्थक. अब जबकि अक्षय कुमार सैनिटरी नैपकिन से जुड़े मुद्दे पर फिल्म बना रहे हैं. अक्षय और दूसरे कई स्टार अब महिलाओं की स्वतंत्रता, अधिकारों और उनके सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं. लेकिन ऐसे अनगिनत मौके आए हैं जब बॉलीवुड की फिल्मों में महिला कलाकारों को वस्तु की तरह पेश किया गया है. इसके साथ ही ऐसे कई डायलॉग और गाने हैं जो महिलाओं के प्रति हद से ज्यादा सेक्सिस्ट हैं, इसके साथ ही वो कई गलत रवायतों को बढ़ावा देते हैं.

कमबख़्त इश्क़

मैरिज से पहले लड़कियां सेक्स ऑब्जेक्ट होती हैं और मैरिज के बाद दे ऑब्जेक्ट टू सेक्स

मैरिज से पहले लड़कियां सेक्स ऑब्जेक्ट होती हैं और मैरिज के बाद दे ऑब्जेक्ट टू सेक्स

कमबख़्त इश्क़ के अक्षय कुमार पैड मैन के अक्षय कुमार की तरह लड़कियों के बारे में अच्छी सोच वाले तो बिलकुल भी नहीं लगते. आखिर उनके इस डायलॉग के बाद तो बिलकुल नहीं.

सिंह इज किंग

सिंह इज किंग का गाना याद है 'भूतनी के'

सिंह इज किंग का गाना याद है 'भूतनी के'

सिंह इज किंग फिल्म का गाना 'भूतनी के' खूब हिट हुआ. हर शादी से पार्टी तक में हर जगह इस पर लोग खूब नाचे. देश में कई लोगों की जिंदगी शादी मैटेरियल होना न होना जीवन भर की समस्या हो सकता है ऐसे में ये गाना खराब से कहीं ज्यादा है.

दबंग

प्यार से दे रहे हैं रख लो, वरना थप्पड़ मारके भी दे सकते हैं

प्यार से दे रहे हैं रख लो, वरना थप्पड़ मारके भी दे सकते हैं

फिल्म दबंग में सलमान खान की दबंगई में कहीं आप यह डायलॉग तो नहीं भूल गए जब बीइंग ह्यूमन वाले सल्लू भाई कहते हैं 'प्यार से दे रहे हैं रख लो, वरना थप्पड़ मारके भी दे सकते हैं'. घरेलू हिंसा अपराध है.

राउडी रठौड़

औरत का खास खयाल दो ही उमर में बहुत रखना पड़ता है. एक जब उसकी उमर होवत है सतराह, तब साला बढ़ जाता है खतरा. और जब औरत हो जावत है तीस, ओ साली बन जावत है चीज

औरत का खास खयाल दो ही उमर में बहुत रखना पड़ता है. एक जब उसकी उमर होवत है सतराह, तब साला बढ़ जाता है खतरा और जब औरत हो जावत है तीस, ओ साली बन जावत है चीज

राउडी रठौड़ के डायलॉग तो आपने सुने ही होंगे. हाल ही में आ रही फिल्मों में अक्षय कुमार को आप नारीवादी समझ रहे हैं तो याद कीजिए उनका ये डायलॉग 'औरत का खास खयाल दो ही उमर में बहुत रखना पड़ता है. एक जब उसकी उमर होवत है सतराह, तब साला बढ़ जाता है खतरा. और जब औरत हो जावत है तीस, ओ साली बन जावत है चीज'

प्यार का पंचनामा पार्ट-2

लड़कियों की तो जात ही कमीनी होती है'.

लड़कियों की तो जात ही कमीनी होती है'.

अगर आप बॉलीवुड को फैमिनिस्ट समझते हैं तो आपको प्यार का पंचनामा जरूर देखना चाहिए आपके सारे भ्रम टूट जाएंगे. वैसे इस फिल्म का डायलॉग तो किसी न किसी दोस्त के मुंह से सुना ही होगा 'लड़कियों की तो जात ही कमीनी होती है'.

जब वी मेट

अकेली लड़की तो खुली तिजोरी की तरह होती है

अकेली लड़की तो खुली तिजोरी की तरह होती है

कई सारी लड़कियां 'जब वी मेट फिल्म' की गीत की तरह बनना चाहती है. लेकिन क्या आपको गीत का वो डायलॉग याद है जब गीत कहती है 'अकेली लड़की तो खुली तिजोरी की तरह होती है'. अगर फिल्म में ये कहना सही है तो उन नेता जी के बयान में क्या गलती थी, जब उन्होंने कहा था 'रात को लड़कियां स्कर्ट पहन कर बाहर घूमेंगी तो...' वैसे करीना के एक 'आयटम सॉन्ग' की लाइनें हैं, मैं तो तंदूरी मुर्गी हूं यार, गटका ले सैंया अल्कोहॉल से.

कभी-कभी

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है

70 के दशक के कई गाने आपके जहन में बस गए होंगे. आप पुराने गानों की धुन गुनगुनाते होंगे तो ये गाना तो जरूर आपके लबों पर आ जाता होगा.

'कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है, के ये बदन ये निगाहें, मेरी अमानत हैं ये गेसुओं की घनी छांव है मेरे खातिर,ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं '

लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि इस गाने में एक नारीवादी बॉलीवुड नारी के बदन, आखों, होंठों और बाहों को नायक की जायजाद बता रहा है.

इसके अलावा शाहरुख खान कुछ-कुछ होता में कहते हैं कि लड़की ऐसी हो जिसे मां से मिलवाया जा सके. हालांकि करन जौहर ने कई साल बाद इसके लिए माफी भी मांगी थी. इसी तरह से फिल्म रांझणा देखिए. आपको फिल्म कितनी भी अच्छी लगी हो, धनुष की ऐक्टिंग कितनी अच्छी लगी हो, फिल्म एक स्टॉकर और मानसिक रोगी की सनक को 'सच्चे प्यार' की तरह दिखाती है. एक बार घबराकर गले लगाने का मतलब प्रेम नहीं होता कुंदन बाबू.

dhanush ranjhanaa

इसी तरह आपको अक्षय कुमार की फिल्म तीस मार खां का वो डायलॉग याद रखना चाहिए, औरत की लुटती हुई इज्जत और तीस मार खान को कैद करना दोनों बेकार हैं. हमारे सारे हीरो तीस मार खां ही तो हैं.

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