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Saturday Special : बॉलीवुड इन कश्मीर 'प्यार का सिलसिला पुराना है...'

कश्मीर के हालात इन दिनों नाजुक दौर से भले ही गुजर रहे हों लेकिन फिल्मों में कश्मीर की खूबसूरती देखकर हमेशा लोग यहां घूमने के लिए बेताब हो उठते हैं

Updated On: Jun 30, 2018 12:02 PM IST

Bharti Dubey

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Saturday Special : बॉलीवुड इन कश्मीर 'प्यार का सिलसिला पुराना है...'

या...हू... फिल्म जंगली (1961) में बर्फीले पहाड़ों पर फिसलते हुए शम्मी कपूर ने ये आवाज लगाई थी और ये आवाज आज भी उती ही स्टाइलिश बनी हुई है. उसके बाद न केवल शम्मी कपूर एक स्टार के रूप में उभर कर सामने आए, बल्कि कश्मीर की उस जगह की अलौकिक सुंदरता का अनुभव चाहने वाले लोगों की भारी संख्या वहां पहुंचने लगी. तब से वह जगह बॉलीवुड का एक अभिन्न अंग बन गया. खासकर, शम्मी-शर्मिला टैगोर अभिनीत, कश्मीर की कली (1964) की सफलता के साथ.

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कश्मीर घाटी ने उस समय की कुछ सबसे शानदार और रोमांटिक हिंदी फिल्मों में एक प्रमुख भूमिका निभाई. इनमें आरज़ू (1965), मेरे सनम (1965), कभी-कभी (1976), नूरी (1979), सिलसिला (1981), रोजा (1992), दिल से (1998), मिशन कश्मीर (2000), एलओसी:कारगिल (2003), यहां (2005), शौर्य (2008), लम्हा (2010), रॉकस्टार (2011), जब तक है जान (2012), भाग मिल्खा भाग (2013) और हाईवे (2014) शामिल हैं. हालिया रीयल लाइफ जासूसी थ्रिलर, राज़ी पूरी तरह से कश्मीर में शूट की गई थी. विक्की कौशल अभी घाटी में उरी की शूटिंग कर रहे हैं.

विक्की कौशल का कहना है कि वो कश्मीर की खूबसूरती से अभिभूत हैं. विक्की ने यहां लगातार दस दिन तक अपनी फिल्म राजी का भी शूट किया था. विक्की कहते हैं कि उन्होंने कश्मीर के बारे में जैसा सुना था वैसी टेंशन यहां उन्हें देखने को नहीं मिली. लोगों ने बहुत उत्साह से उनका स्वागत किया और जमकर मेहमान नवाजी भी की. उनकी कार का ड्राइवर तो उन्हें सेब के बागों में भी ले गया जहां उन्होंने जमकर ताजे सेबों का लुत्फ उठाया.

Bollywood-Kashmir

फिल्म विश्लेषक दिलीप ठाकुर ने देखा है कि कैसे भारतीय सिनेमा शूट के लिए पहली बार स्टूडियो से बाहर निकल कर कश्मीर पहुंचा. दिग्गज निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर, बीआर चोपड़ा और शक्ति सामंत समेत प्रमुख फिल्म निर्माताओं की सूची है, जिन्होंने कश्मीर का उपयोग अपने सिनेमा में बड़े पैमाने पर किया था. कश्मीर के साथ बॉलीवुड का यह संबंध सुभाष घई के कर्मा के साथ ठहर गया था. इलाके में आतंकवाद बढ़ने के साथ, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने अपने इस पसंदीदा लोकेशन से एक ब्रेक ले  लिया. सिर्फ, भारी सुरक्षा के बीच संजय दत्त और ऋतिक रोशन अभिनीत और विधु विनोद चोपड़ा ने अपनी फिल्म (मिशन कश्मीर) को यहां शूट किया था.

Jab tak hai jaan

कश्मीर में जब सुभाष घई श्रीदेवी के साथ कर्मा के एक गीत की शूटिंग कर रहे थे, तभी उन्होंने वहां माधुरी दीक्षित को देखा. माधुरी वहां फिल्म आवारा बाप की शूटिंग के लिए आईं थी, जहां उनके नायक राज एन सिप्पी थे. घई और कोरियोग्राफर सरोज खान, दोनों ने माधुरी को बुलाया और कहा कि उन्हें छोटी फिल्मों में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. घई ने माधुरी को राम लखन से रिलॉन्च किया.

बुनियादी ढांचे की कमी

अभी कश्मीर में एक वेब सीरिज की शूटिंग कर रही वृत्तचित्र फिल्म निर्माता रितु असरानी ने कहा कि कश्मीर अभी भी एक ऐसी जगह है, जिसे बहुत कम तलाशा गया है. यहां कई ऐसे स्थान हैं, जिन्हें सामने लाने की आवश्यकता है. रितु ने कहा, "मैं इसके लिए बॉलीवुड को दोष नहीं दे सकती, लेकिन यहां बुनियादी ढांचे की कमी है और लोकेशन तक जाने के लिए सही संपर्क मार्ग नहीं है."

रितु पर्यटन को बढ़ावा देने का पूर्ण श्रेय बॉलीवुड को देती हैं. उन्होंने कहा, 'कश्मीर की कली का गाना चांद सा रोशन चेहरा ने डल झील को अमर कर दिया है. मुझे लगता है कि बॉलीवुड उन जगहों पर शूटिंग करके बड़ी भूमिका निभा सकता है, जिनकी खोज अभी नहीं हुई हैं. इसलिए अगर बॉलीवुड ऐसी जगहों को अपनी फिल्मों के जरिए उभारता है तो पर्यटक धरती के इस जन्नत में मौजूद इन नई जगहों पर आने के लिए दुबारा लौट कर आ सकते है.''

रोमांस का प्रतीक

प्रेमियों के स्वर्ग के रूप में प्रसिद्ध कश्मीर की प्रसिद्धि फिल्मों की शूटिंग के साथ और बढ़ी है. वरिष्ठ लेखक चैतन्य पादुकोण ने कहा, "दर्शक सिल्वर स्क्रीन पर निर्मित रोमांटिक आभा को अपनी असल जिन्दगी में महसूस करना और उसे अपने जीवन में उतारना चाहते है. मैंने लोगों को 'याहू' चिल्लाते और बर्फ से फिसलते हुए देखा है, ठीक शम्मी कपूर की तरह. मैंने पर्यटकों को डल झील के शिकारों में शम्मी कपूर की तरह कूदते हुए भी देखा है. हालांकि, 90 के दशक में स्विट्ज़रलैंड ने घाटी की जगह ले ली. फिर भी कश्मीर हर फिल्म निर्माता की पहली पसंद है.”

कश्मीर का हमेशा से बॉलीवुड के साथ एक अंतरंग संबंध था. फिल्म बेताब के नाम पर वहां एक स्थान भी है क्योंकि इस फिल्म की शूटिंग वहां हुई थी. यश चोपड़ा ने यह भी सुनिश्चित किया कि उनके सभी नायक और नायिका कश्मीर में रोमांस करे.

सलमान ने हाल ही में रेस 3 के कई सीन्स कश्मीर में शूट किए हैं

सलमान ने हाल ही में रेस 3 के कई सीन्स कश्मीर में शूट किए हैं

उनकी ज्यादातर फिल्में, 2004 की एपिक वीर-जारा समेत, कश्मीर में ही शूट की गई थी. सिलसिला फिल्म को याद करते हुए ठाकुर कहते हैं, "सिलसिला में पहले पद्मिनी कोल्हापुरी और परवीन बाबी को लिया जाना था. चोपड़ा, बच्चन से मिलने कश्मीर गए थे, जहां बच्चन एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. वहीं पर सिलसिला के लिए रेखा और जया बच्चन को लाने का फैसला किया गया था."

फिल्मों में कश्मीर हमेशा से बॉलीवुड कथा का हिस्सा रहा है. पादुकोण ने कहा, "न केवल कहानियां, यहां तक कि गानों ने भी कश्मीर को बढ़ावा दिया. चाहे वह कश्मीर की कली हूं मैं... (जंगली) या ये कश्मीर है (बेमिसाल) जैसा गीत हो. कश्मीर से निकली शुरुआती कहानियां रोमांटिक थीं, जो रोजा फिल्म के साथ बदल गईं. रोजा ने रोमांस की जगह कश्मीर की तनावग्रस्त हालात को अपनी कहानी बनाया."

नकली कश्मीर

बॉलीवुड ने कुल्लू मनाली को कश्मीर के रूप में दिखा कर दर्शकों को धोखा देना शुरू कर दिया. रोजा फिल्म में कश्मीर की अशांति को दिखाने के लिए कुल्लू मनाली में शूटिंग की गई थी. ऐसे ही मुद्दे पर बनाई गई कुछ फिल्में है, जैसे यहां, जिसे शुजीत सरकार ने खूबसूरती से शूट किया था.

कश्मीरी फिल्म निर्माता डैनिश रेन्ज़ू, जिन्होंने न्यू जर्सी इंडियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीता, ने अशांति के दौरान कश्मीर की हाफ विडो की दुर्दशा को दिखाया, लेकिन एक नए और सकारात्मक अन्दाज के साथ. रेन्ज़ू कहते हैं, "मेरी फिल्म कश्मीरी पात्रों के साथ असली कश्मीर की खोज करती है, जो न केवल कश्मीरियों की दुर्दशा दिखाती है, बल्कि आगे का रास्ता भी दिखाती है.'' रेन्ज़ू भारत में अपनी फिल्म रिलीज करने की योजना बना रहे है. उनकी दो और फिल्में पाइपलाइन में हैं.

लॉस एंजिल्स स्थित फिल्म निर्माता बॉलीवुड से एक अनुरोध करते है. वे कहते हैं, "यदि बॉलीवुड कश्मीर विषय और कश्मीरी पात्रों पर फिल्में बना रहा हैं, तो हम चाहेंगे कि वे कश्मीर की वास्तविकता के लिए प्रामाणिक हो. उन्हें ऐसी कहानियां कहनी चाहिए, जो लोगों की भावनाओं के साथ न्याय करते हैं, साथ ही आशा की किरण भी दिखाते हो. मुझे हैदर बहुत पसंद आया. यह आखिरी फिल्म थी जिसने कश्मीरी दुर्दशा को सबसे प्रामाणिक तरीके से दिखाया."

कश्मीर में बने फिल्म इंडस्ट्री 

मेघना गुलजार की राज़ी 2018 की सबसे ज्यादा सराही गई फिल्मों में से एक रही है. फिल्म निर्माता कश्मीर में राज़ी की शूटिंग और इस स्थान से जुडी बचपन की यादों के बारे में बताती है.

आलिया भट्ट की राज़ी की शूटिंग भी कश्मीर में ही हुई और इस फिल्म ने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया

आलिया भट्ट की राज़ी की शूटिंग भी कश्मीर में ही हुई और इस फिल्म ने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया

“खूबसूरत बात यह है कि 30 साल बाद कश्मीर वापस लौटने के बाद भी एक चीज बरकरार थी, तमाम बदलावों के बावजूद. इनमें से कुछ अच्छे बदलाव थे तो कुछ बुरे. लेकिन इस सब के बीच जो एक चीज बरकरार थी, वो थी लोगों की रिश्तों में गर्माहट और कश्मीरीयत, कम से कम हम जिन लोगों से मिले, उनमें तो ये बात थी ही. हां वहां चुनौतियां थी.

खासकर कुछ लॉजिस्टिकल चैलेंज. क्योंकि हमने जो लोकेशंस चुने थे, वो शहर से दूर थे. हम दूरदराज के क्षेत्र चाहते थे, क्योंकि यह यह फिल्म की आवश्यकता भी थी. लेकिन ये सब संभव हो पाया, क्योंकि हमारे पास एक बहुत ही शानदार प्री-प्रोड्क्शन टीम और बहुत ही अच्छे स्थानीय लोग थे. उन्होंने हमारी मदद की. कश्मीर में कोई फिल्म इंडस्ट्री नहीं है. वहां कोई जूनियर कलाकार संघ नहीं है कि आप जा कर जूनियर आर्टिस्ट ले आए. हम रात में शादी की शूटिंग कर रहे थे. स्थानीय लोग खड़े थे, बिना कुक्छ पाने की आशा किए. यह महत्वपूर्ण है कि कश्मीर में अधिक से अधिक फिल्म उद्योग का समर्थन किया जाए, क्योंकि युवा पीढ़ी की आजीविका खतरे में है.''

मेघना एक ऐसी जगह वापस जा रही थी, जहां वह श्रीनगर के ओबेरॉय पैलेस में अपने माता-पिता के साथ समय बिताती थी. मेघना याद करती हैं, "जब हमारे माता-पिता वहां शूटिंग करते थे, हम सभी, श्वेता, अभिषेक, गोल्डी, करिश्मा कपूर, करीना चिनार के पेड़ के पास खेलते थे. चिनार के पेड़ आज भी वहां खड़े हैं और आज मेरा बेटा वहां खेल रहा था, उसी चिनार के पेड़ के नीचे. यह बताता है कि जितनी अधिक चीजें बदली है, उतनी ही चीजें आज भी अपनी जगह पर है. यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस लेंस से देख रहे हैं.

क्या सरकार को कला का समर्थन कर वहां फिल्म उद्योग बनाने में मदद करनी चाहिए? मेघना ने कहा, "कई कश्मीरी अभिनेता हैं, लेकिन वे इतने विशिष्ट हैं कि अपनी भाषा, लहजा और शारीरिक बनावट के कारण कोई भी रोल नहीं कर सकते है. हम उनसे पंजाबी का कैरेक्टर नहीं करवा सकते है. उनमें से ज्यादातर कश्मीरी कैरेक्टर ही अच्छे से निभा सकते है. इसलिए, उन्हें प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है? “प्रशिक्षण एक शिल्प है, लेकिन जो मैं कह रही हूं, वह एक आनुवांशिक तथ्य है. आप फिजिकल विशेषताओं का क्या करोगे. अश्वर्त भट्ट मेरी फिल्म में हैं, कश्मीरी हैं, इसलिए उन्हें किसी भी प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं थी. राजी की भूमिका के लिए वे बिल्कुल फिट थे.''

बॉलीवुड में कश्मीरी प्रतिभा

बॉलीवुड में कई कश्मीरी कलाकारों ने जगह बनाई है. फिल्म निर्माता घाटी में जब कोई फिल्म शूट कर रहे होते हैं तो वे भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि फिल्म के लिए स्थानीय अभिनेताओं और तकनीशियनों को लिया जाए और प्रशिक्षित किया जाए. कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा ने बताया,“हाल ही में राजी की शूटिंग कर चुकी आलिया ने इसे धरती का सबसे शानदार जगह बताया. यहां के लोगों की गर्मजोशी की जम कर तारीफ की. महेश भट्ट की जलेबी और निर्देशक इम्तियाज अली की लैला-मजनू कश्मीर पृष्ठभूमि के साथ प्रेम कहानी हैं. दक्षिण भारतीय फिल्में भी श्रीनगर, गुलमर्ग और सोनमर्ग में शूट की जा रही है.

सलमान खान हाल ही में रीलिज रेस 3 की शूटिंग शुरू करने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से मिले. कश्मीर से आने वाले फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने बताया, "1989-90 के बाद से जम्मू-कश्मीर की स्थिति काफी अस्थिर रही है. चीजें नियंत्रण से बाहर हो गईं और स्थानीय राजनीतिक दलों के समर्थन से आतंकवाद बढ गया. फिल्म उद्योग हमेशा की तरह राजनीति से दूर रहा, न केवल कश्मीर बल्कि अन्य स्थानों पर भी. जहां तक कश्मीर का सवाल है, आतंकवाद ने बॉलीवुड को प्रभावित नहीं किया क्योंकि यह उनकी आय का स्रोत है. वे जानते हैं कि हम घाटी में वापस नहीं जाएंगे, इसलिए उन्होंने शूटिंग के लिए परेशानी नहीं पैदा की. उद्योग को प्रमुख मुद्दों के प्रति चिंता दिखानी चाहिए और घाटी से संबंधित वास्तविकताओं से नजर नहीं चुराना चाहिए. जम्मू-कश्मीर सरकार ने उद्योग को लुभाने के लिए अपने स्तर पर सर्वोत्तम प्रयास किया, ताकि वे दुनिया को बता सकें कि घाटी में स्थिति सामान्य है.'

एक अधूरा ख्वाब

बॉलीवुड हब्बा खातून के जीवन को लंबे समय से स्क्रीन पर लाने की कोशिश करता रहा है. महबूब खान ने सायारा बानो और दिलीप कुमार के साथ अपनी फिल्म की घोषणा की थी. 80 के दशक में, बीआर चोपड़ा ने जीनत अमान, संजय खान और नौशाद के साथ फिल्म बनाने की कोशिश की. आखिरी प्रयास मुजफ्फर अली ने किया था, जो डिंपल कपाडिया और विनोद खन्ना के साथ फिल्म बनाना चाहते थे. फिल्म निर्माता के लिए ये एक ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है, लेकिन इसे अब तक नहीं बनाया जा सका है.

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