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REVIEW ब्लैकमेल: इरफान खान के लिए आपका 'ब्लैकमेल' होना तो बनता है

इरफान खान की ये फिल्म आपको उनके बेहतरीन अभिनय का पूरा मजा देगी

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Abhishek Srivastava Updated On: Apr 06, 2018 10:05 AM IST

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REVIEW ब्लैकमेल: इरफान खान के लिए आपका 'ब्लैकमेल' होना तो बनता है
निर्देशक: अभिनय देव
कलाकार: इरफान, कीर्ति कुल्हारी, अरुणोदय सिंह, प्रद्युमन सिंह, गजराज राव, ओमी वैद्य

ब्लैकमेल विषय के ऊपर तमाम हिंदी फिल्मों के दीदार दर्शकों को पहले हो चुके हैं लेकिन अभिनय देव की ब्लैकमेल के बारे में कहना पड़ेगा कि यह एक अलग कोशिश है जिसके लिए इस फिल्म की तारीफ करनी पड़ेगी.

डार्क ह्युमर के अंदाज़ में इस विषय को कहने की कोशिश की गई है. लेकिन जिस तरीके से कहानी कही गई है उसको देखकर उतना मजा नहीं आता है. कहानी में कई लूपहोल्स हैं और इसके लीनियर अंदाज की वजह से आपको आगे का खासा अंदाज़ा पहले ही हो जाता है.

अलबत्ता इरफ़ान खान के शानदार अभिनय की वजह से आपका दिल फिल्म में लगा रहता है. ब्लैकमेल की तारीफ डार्क ह्यूमर को एक बार फिर से जिन्दा करने की कोशिश के लिए की जानी चाहिए ना कि इसके ट्रीटमेंट या कहानी के लिए. ब्लैकमेल से यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभिनय की पिछली दो फिल्में जब बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली थी तब उन्होंने सेफ्टी नेट के लिए अपनी पहली फिल्म दिल्ली बेली का जॉनर चुना.

हर कोई एक दूसरे को ब्लैकमेल कर रहा है

ब्लैकमेल की कहानी देव (इरफान खान) की है जिनकी पत्नी है रीना (कीर्ति कुल्हारी) और दोनों की शादी शुदा जिंदगी थोड़ी बेरंग सी हो गई है. देव एक टॉयलेट पेपर कंपनी में काम करता है और बोर जिंदगी और उधारी में डूबे होने की वजह से वो अपना ज्यादातर समय ऑफिस में ही बिताता है.

ऑफिस में उसका दोस्त है आनंद (प्रद्युमन सिंह) जो उसे एक दिन समय से पहले घर पहुंच कर अपनी पत्नी को फूल देकर चौंकाने का उपाय देता है. लेकिन जब देव घर पहुंचता तो मामला कुछ और ही होता है. देव जब बिस्तर में अपनी पत्नी को अपने पूर्व ब्वॉयफ़्रेंड रंजीत (अरुणोदय सिंह) के साथ देखता है तो अपना आपा खोने की बजाय उसे अपने उधारी की याद आती है और वहीं पर वो रंजीत को ब्लैकमेल करने का प्लान बनता है ताकि उसे कुछ पैसे मिल जाएं और वो अपने घर और कार की किश्तें चुका सके. रंजीत अपने दिवालियेपन की वजह से वो रकम अपनी पत्नी डॉली से मांगता है जिसे इस बात की शंका है कि उसके पति का कही पर कोई चक्कर चल रहा है.

Blackmail

इस बीच डॉली के पिता जो की एक कॉर्पोरेटर है रंजीत से उस रकम की मांग करते हैं जो उनकी बेटी ने दिया था. इसके बाद रंजीत खुद एक अज्ञात ई-मेल के जरिये रीना को ब्लैकमेल करने लगता है ताकि अपनी पत्नी के पिता को वो रकम लौटा सके. रीना ब्लैकमेल में मांगे गए रकम के लिए अपने पति की शरण में जाती है.

देव वो रकम अपनी पत्नी को दे देता लेकिन जब दफ्तर में ब्लैकमेल का यह किस्सा देव अपने दोस्त आनंद को बताता है जिसके जरिये उसकी ऑफिस की गर्लफ़्रेंड को पता चल जाता है तब चीज़े और भी उलझ जाती है. आनंद की गर्लफ़्रेंड प्रभा देव को ब्लैकमेल करना शुरू देती है और उसके बाद एक अलग खेल शुरू होता है.

फिल्म की जान इरफान ही हैं

इसमें कोई शक नहीं कि ब्लैकमेल की जान निस्संदेह रूप से इरफान ही हैं. यह अचरज की बात है की फिल्म में उनके डायलॉग ज्यादा नहीं हैं लेकिन उनके बारे में यह भी सही है की वो बहुत कुछ अपनी आंखों से बयां कर देते हैं. देव के रोल में इरफ़ान ने अपनी पूरी मेहनत झोंक दी है. कीर्ति कुल्हारी रीना के रोल में है और उनका भी स्क्रीन प्रेजेंस ज्यादा नहीं है लेकिन इसके बावजूद फिल्म में उनका अभिनय शानदार है. पिंक और इंदु सरकार में हमे उनके जिस अभिनय प्रतिभा के दर्शन हुए थे उसी परंपरा को उन्होंने आगे बढ़ाया है.

अरुणोदय सिंह के खाते में पिछली जो भी फिल्में आई थी वो बेअसर साबित हुई थी लेकिन इस फिल्म को देखकर यही लगता है की उन्होंने अपनी धार वापस पा ली है. दिव्या दत्ता का रोल छोटा है लेकिन असरदार है. इसके अलावा ओमी वैद्या, गजराज राव, प्रद्युमन सिंह सपोर्टिंग भूमिका में फिल्म में नज़र आएँगे और इन सभी का काम शानदार है.

क्लाइमेक्स निराशा करता है 

इसमें कोई शक नहीं है कि आपको हंसने के कई मौके इस फिल्म मे मिलेंगे और देखकर अच्छा लगता है कि ब्लैकमेल से निर्देशक अभिनय देव एक बार फिर से फॉर्म में वापस लौटे है लेकिन जिस बुनियाद पर उनकी ब्लैकमेल खड़ी है वो दिल्ली बेली वाली ही है यानी की अगर नयापन की बात करें तो वो आपको फिल्म में नहीं मिलेगा. अभिनय देव की शुरुआत दिल्ली बेली से धमाकेदार रही थी लेकिन उनकी पिछली दो फिल्में गेम और फ़ोर्स 2 बॉक्स ऑफिस पर उतना कमाल नहीं दिखा पाई थी.

ब्लैकमेल पर दिल्ली बेल्ली का काफी हैंगओवर दिखाई देता है. चाहे फिल्म का ओपनिंग क्रेडिट हो या फिर या फिर इरफ़ान और उनके बॉस के बीच का रिश्ता या फिर इसका टॉयलेट ह्यूमर - ये सब कुछ हमने दिल्ली बेली में देखा था. लेकिन ऐसा भी नहीं की फिल्म में सब कुछ अच्छा ही है. फिल्म शुरू के बीस मिनट तक बोर करती है. इस फिल्म का ह्यूमर थोड़ा डार्क है और मुमकिन है की कुछ लोगों को शायद यह पसंद नहीं आए. फिल्म के क्लाइमेक्स में देव की कारगुजारी कहीं से भी आपको यकीन नहीं दिला पाएंगी. कहने की जरुरत नहीं कि यह स्क्रिप्ट की ही खामी है. क्लाइमेक्स फिल्म का ढीला है और परवेज शेख की इस स्क्रिप्ट में यही बात गायब है की देव अपनी शादी शादीशुदा जिंदगी से उदास क्यों है. इस बात को बताने की जहमत नहीं उठाई गई है.

यहां पर मैं दो चीज़ो के बारे में मैं खास बातें करूंगा. हालिया दिनों में मैंने जो फिल्में देखी हैं उनमें से ब्लैकमेल का इंटरवल पॉइंट सबसे बकवास दिखा. सच मायनों में इंटरवल पॉइंट पर फिल्मों को दशा और दिशा बदल जाती है लेकिन अगर आप इरफ़ान के भ्रम के आड़े में जनता को एक शॉक दे रहें हैं तो वो कही से भी उचित नहीं है. दूसरा यह कि जब पुलिस इरफान से तफ्तीश करती है मर्डर के सिलसिले में और इरफान लगभग पुलिस के जाल में फंस जाते हैं तो इस मामले को यही पर खत्म कर दिया जाता है. आगे इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है.

मल्टीप्लेक्स में बेहतर भविष्य

ब्लैकमेल एक ठेठ मल्टीप्लेक्स की फिल्म है. कहने की जरुरत नहीं कि जिन लोगों को दिल्ली बेली पसंद आई थी वो इस फिल्म को पसंद करेंगे. डार्क कॉमेडी का चलन इस देश में उतना है नहीं और ब्लैकमेल उसी में एक कोशिश है. फिल्म के बारे में यही कहूंगा कि अगर आप इरफ़ान को पसंद करते हैं तो महज उनके लिए आप इस फिल्म को जरूर देख सकते हैं. और हां कुछ जगहों पर कंफ्यूज होने के लिए तैयार रहिए.

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