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Film Review : बधाई हो ! शानदार फिल्म हुई है

बधाई हो फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही है कि एक अटपटे विषय के बारे होने के बावजूद ये फिल्म काफी विश्वसनीय लगती है

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Updated On: Oct 17, 2018 07:26 PM IST

Abhishek Srivastava

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Film Review : बधाई हो ! शानदार फिल्म हुई है
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निर्देशक: अमित रवींद्रनाथ शर्मा
कलाकार: आयुष्मान खुराना, गजराज राव, नीना गुप्ता, सान्या मल्होत्रा, सुरेखा सीकरी

बधाई हो फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही है कि एक अटपटे विषय के बारे होने के बावजूद ये फिल्म काफी विश्वसनीय लगती है. आम जिंदगी एक पड़ाव पर आकर ऐसा मोड़ लेती है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं. बधाई हो जिंदगी के उसी मोड़ की कहानी है जो किसी के साथ भी घट सकती है. वृद्धावस्था में बाप बनना - यही वो मोड़ है जिसकी कहानी बधाई हो बड़े ही शानदार तरीके से बयां करती है और जिसमें जिंदगी के सभी इमोशंस का समावेश है. फिल्म के ही एक किरदार के अनुसार बधाई हो का कौशिक परिवार वाकई में एक सर्कस है जिसको देखने के लिए आप बॉक्स ऑफिस पर टिकट ख़रीद सकते हैं. निर्देशक अमित शर्मा के निर्देशन की कसावट और फिल्म के अभिनेताओं के अभिनय का सामंजस्य इस फिल्म में काफी शानदार बन पड़ा है.

कौशिक दम्पति की अधेड़ उम्र में एक बार फिर से मां-बाप बनने की कहानी है बधाई हो

बधाई हो की कहानी कौशिक परिवार के बारे में जिसमें शामिल है परिवार के मुखिया जीतेन्द्र कौशिक (गजराज राव), उनकी पत्नी प्रियंवदा (नीना गुप्ता है), बड़ा बेटा नकुल (आयुष्मान खुराना) और छोटा बेटा गुलर. इन सभी के साथ घर में बुजुर्ग दादी (सुरेखा सीकरी) भी रहती है. ये परिवार दिल्ली के लोधी कॉलोनी के रेलवे क्वार्टर में रहता क्योंकि जीतू कौशिक रेलवे में टिकट एग्जामिनर की नौकरी करते है लेकिन इनका दूसरा शौक है मैगजीन के लिए कविताये लिखना. मौसम की नजाकत और अपनी कविता के छपने की खुशी में ये अपनी सीमा एक दिन लांघ जाते हैं जिसकी वजह से इनकी पत्नी गर्भवती हो जाती है. अधेड़ उम्र में एक बार फिर से बाप बनने की बात सुनकर बडा बेटा नकुल अपनी नाराजगी सभी के सामने जाहिर कर देता है. इस विषम परिस्थिति के चलते पूरे परिवार को समाज और अपने करीबी रिश्तेदारों के बीच अजीबोगरीब समस्याओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन अंत में कौशिक परिवार जब इस परेशानी को गले लगा लेता है तब उनकी सारी परेशानियां एक तरह से दूर हो जाती हैं.

फिल्म के सभी कलाकारों का शानदार अभिनय

तारीफ करनी पड़ेगी इस फिल्म की कास्टिंग की जहां पर हर अभिनेता अपने किरदार में पूरी तरह से रमा हुआ नजर आया है. घर के मुखिया के रूप में गजराज राव के चेहरे के एक्सप्रेशंस देखने लायक हैं. अधेड़ उम्र में बाप बनने के बाद जब उनके चेहरे से हवाइया उड़ने लगती हैं तब यही लगता है कि उस तरह के भाव कोई सधा हुआ अभिनेता ही ला सकता है. पत्नी की भूमिका में नीना गुप्ता का चयन पूरी तरह से सटीक है. एक ऐसा किरदार जो अपनी सास और घर चलाने की जिम्मेदारी के बीच मे पिसी हुई है की भूमिका मे नीना गुप्ता ने अपने अभिनय से हर रंग बिखेरा है. आयुष्मान खुराना ने साबित कर दिया है की अमोल पालेकर के बाद जो जगह बॉलीवुड में खाली हो गई थी उसकी भरपाई के सही हकदार वही है. आयुष्मान ने ये भी साबित कर दिया है की अभिनय के मामले में वो आज के कई चोटी के अभिनेताओं से आगे है. आयुष्मान की प्रेमिका के रूप में फिल्म में सान्या मल्होत्रा है जिनका रोल फिल्म में भले ही छोटा है लेकिन बेहद ही सहज लगता है. इन सभी कमाल के कलाकारों के बीच में अगर किसी ने बाजी मार ली है तो वो है खूसठ दादी की भूमिका में सुरेखा सीकरी ने. सुरेखा सीकरी का एक भी कदम फिल्म में गलत नहीं है. अपने शानदार डायलॉग और अभिनय से वो सभी का मन मोह लेगी इस बात का मुझे पक्का यकीन है.

अमित शर्मा का शानदार निर्देशन, फिल्म की कास्टिंग पिच परफेक्ट

अमित शर्मा अपनी पहली फिल्म तेवर में भले ही अपने निर्देशन की धार ना दिखा पाए हो लेकिन बधाई हो में उन्होंने सारी कसर पूरी कर दी है. फिल्म की कहानी दिल्ली की है और अमूमन ऐसी फिल्म में दिल्ली शहर खुद ही एक किरदार बन जाता है. बधाई हो में आपको दिल्ली शहर के क्वर्कस भारी मात्रा में दिखाई देंगे. आपको लगेगा की आप इस फिल्म को दिल्ली शहर में बैठ कर ही देख रहे है. लेकिन स्लाइस ऑफ लाइफ से आगे बढ़ कर भी यह फिल्म है और वो है इसका एक शानदार कॉमेडी फिल्म होना. फिल्म के शुरू से लेकर आखिरी तक आपको ठहाके लगाने के पुरे मौके मिलेंगे. इस फिल्म को शाबाशी इस बात को लेकर है की इसकी कॉमेडी फिल्म के सिचुएशन से निकलती है.

ये फिल्म आपको हंसा-हंसा कर लोटपोट करेगी

कुछ खामिया भी इस फिल्म में नजर आई जिसके दीदार आपको इंटरवल के बाद होंगे. इस फिल्म का विषय वस्तु ऐसा है की इसे आप ज्यादा समय तक खींच नहीं सकते है. इंटरवल के बाद आयुष्मान के मन में जो अचानक बदलाव देखने को मिलता है उसको पचाने में परेशानी होती है. कुछ वही हाल है दादी का भी जो पुरे फिल्म में अपनी बहु को ताने मारते हुए नजर आती है लेकिन क्लाइमेक्स के पहले उनका भी ह्रदय परिवर्तन हो जाता है. देख कर लगता है की निर्देशक को अपनी कहानी खत्म करनी थी लिहाजा एक पॉजिटिव क्लाइमेक्स बनाने के लिए ये सभी चीजें जरुरी थी. लेकिन ये मामूली अड़चनें हैं और फिल्म देखते वक्त आपके जायके पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बधाई हो इसी बात की ओर इंगित करती है की फिल्म के कंटेंट से बढ़ कर और कुछ नहीं होता है. इस हफ्ते सिनेमा हाल जाकर फिल्म की पूरी टीम को बधाई हो कह आइये. एक शानदार फिल्म हुई है.

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