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क्या फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार हिट या फ्लॉप के गणित से बाहर हैं?

शाहरुख, सलमान, आमिर, अक्षय, अमिताभ जैसे सुपरस्टार्स को अब एक दो फिल्में फ्लॉप होने से कोई खास फर्क क्यों नहीं पड़ता बता रही हैं भारती दुबे

Bharti Dubey Updated On: Aug 09, 2017 03:16 PM IST

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क्या फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार हिट या फ्लॉप के गणित से बाहर हैं?

अपनी फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार के ट्रेलर लांच के मौके पर आमिर खान ने कहा कि एक-दो फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा ना कर पायें तो इससे स्टारडम पर कोई खास असर नहीं पड़ता.

आमिर ने कहा, "सलमान खान और शाहरुख खान बहुत बड़े स्टार हैं और मैं उनके काम का फैन हूं. दोनों में कोई तुलना नहीं हो सकती क्योंकि दोनों ही अनूठे हैं. " यह बात आमिर ने मीडिया से बातचीत के दौरान कही. उनसे मीडिया ने एक सवाल पूछा था और वे उसी सवाल का उत्तर दे रहे थे.

बहरहाल इस बात के चर्चे जोरों पर हैं कि ए-लिस्ट में शुमार किए जाने वाले कुछ अभिनेताओं की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बेहतर नहीं कर रही हैं. यह बात फिलहाल सलमान और शाहरुख खान की फिल्मों को लेकर उठी है. आमिर खान ने हाल में दंगल के रुप में अपने समय की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म दी है.

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इसे अगर अपवाद मान लें तो फिर नजर आयेगा कि सलमान खान की हालिया रिलीज ट्यूबलाइट बॉक्स ऑफिस पर अच्छा नहीं कर सकी. शाहरुख खान की पिछली दो फिल्में रईस और डियर जिंदगी भी सेमी-हिट यानी आधी-अधूरी ही कामयाब कहलायेंगी.

हालांकि उनकी नई रिलीज जब हैरी मेट सेजल को बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत बहुत अच्छी मिली लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते हैं, खबर मिल रही है कि फिल्म ज्यादा बेहतर नहीं कर पा रही. लेकिन क्या इससे उनके दो दशकों में कमाये गये स्टारडम पर असर पड़ेगा. या फिर, यह माना जाये कि ये सुपरस्टार अब हिट या फ्लॉप जैसी गिनती से ऊपर उठ चुके हैं.?

सिनेजगत के कुछ जानकार और फिल्म-निर्माताओं का मानना है कि एक-दो फिल्मों के फ्लॉप होने से इन अभिनेताओं के स्टारडम पर कोई असर नहीं पड़ने वाला. फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा का कहना है, "आज के माहौल में ज्यादातर अभिनेता हिट या फ्लॉप जैसी गिनती से ऊपर उठ गये हैं, यह बात खासतौर पर बड़े स्टार्स पर लागू होती है.

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दर्शक अपने हीरो के प्रति निष्ठावान हैं. हां, दर्शकों का प्यार कम हो सकता है लेकिन यह कमी बहुत धीमी रफ्तार से होती है जबतक कि दर्शकों को किसी और हीरो से प्यार नहीं हो जाता. ''

टिप्पणीकार शैलेश कपूर का कहना है कि, " सुपर स्टारडम कोई रातों-रात हासिल होने वाली चीज नहीं.—इसमें बरसों लग जाते हैं, कभी कभी तो दसियों साल गुजर जाते हैं.

ट्यूबलाइट जैसी एक या दो फ्लॉप फिल्मों से किसी स्थापित स्टार जैसे कि सलमान खान के सुपरस्टाडम को कोई नुकसान नहीं हो सकता. लेकिन फ्लॉप फिल्मों का तांता लग जाय तो फिर वक्त बीतने के साथ सुपरस्टारडम की चमक फीकी पड़ सकती है.

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जहां तक शाहरुख खान का सवाल है, उनकी हाल की कुछ फिल्मों ने औसत कारोबार किया है लेकिन उनका स्टारडम बरकरार है. आखिर उनका स्टारडम पिछले 25 सालों में बना है. ''

फिल्म रिलीज हो तो उसमें सुपरस्टार की मौजूदगी सिने-दर्शकों को हमेशा सिनेमाहॉल की तरफ खींचती है. सिने-इंडस्ट्री के एक सूत्र का कहना है, " सुपरस्टार हरदिल-अजीज होते हैं, उनके फैन्स बढ़ी तादाद में होते हैं.

बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत के लिहाज से वे एक गारंटी की तरह होते हैं लेकिन फिल्म आगे के दिनों में कामयाब साबित तभी होती है जब उसकी कथा-वस्तु उम्दा हो, वह सिर्फ सुपरस्टार के दम पर नहीं चलती.

इसका सबसे उम्दा उदाहरण हिन्दी मीडियम और बाहुबली सीरिज की फिल्में हैं. दूसरी तरफ सलमान खान और शाहरुख खान की बड़े फिल्म निर्माताओं के साथ मिलकर बनायी फिल्में हैं जो दर्शकों को प्रभावित करने में नाकाम रहीं.’’

अमिताभ बच्चन अपनी अगली फिल्म आमिर खान के साथ कर रहे हैं, उनकी एक और फिल्म ऋषि कपूर के साथ आने वाली है. संजय दत्त फिल्म भूमि के साथ वापसी कर रहे हैं.

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(फोटो: फेसबुक से साभार)

फिल्म-जगत के भीतरी लोगों का कहना है कि " ये सब बड़े मशहूर अभिनेता हैं और इनको लेकर लोगों में हमेशा दिलचस्पी कायम रहती है. अमिताभ बच्चन की फिल्म में दमदार अभिनेता होते हैं और फिल्म की कथावस्तु भी मजबूत होती है, सो यह लोगों को अपनी तरफ खींचती है. उनकी फिल्म पिंक को ही देखिए, इस फिल्म की कहानी ही फिल्म का नायक थी.’’

पान सिंह तोमर और आई ऐम कलाम सरीखी फिल्म की कथा लिखने वाले संजय चौहान का मानना है कि फिल्मों का हिट या फ्लॉप होना किसी सुपरस्टार की फिल्म-इंडस्ट्री में हैसियत पर असर डालता है.

चौहान का कहना है, " सुपस्टार इस गणित के भीतर ही होते हैं, बाहर नहीं. आज के सुपरस्टार पहले के सुपरस्टारों की तुलना में कहीं ज्यादा दबाव में हैं क्योंकि दांव पर बड़े ऊंचे मोल लगे होते हैं, जिसमें मार्केंटिंग भी शामिल है.

इन्हीं आमिर या सलमान खान ने पहले भी बहुत सारी फिल्में की हैं लेकिन तब उनके ऊपर इतना ज्यादा दबाव नहीं था. लेकिन आज उनकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलती तो उनका चिन्तित होना लाजिमी है.’’

पहले के समय में फिल्मों के रिलीज का तरीका अलग और कहीं ज्यादा सुरक्षित था. फिल्म समीक्षक दिलीप ठाकुर का कहना है, " ज्यादातर एक्शन फिल्में पहले उत्तर भारत में रिलीज होती थीं फिर मुंबई में जबकि हृषिकेश मुखर्जी वाले तर्ज की फिल्में पहले मुंबई में रिलीज होती थीं फिर बाकी जगहों पर.’’

दिलीप ठाकुर यह भी कहते हैं कि पहले के समय में सारा दारोमदार शुक्रवार पर रहता था. उनका कहना है, " दिलीप कुमार की फिल्म दास्तान फ्लॉप हो गई तो दर्शकों ने एक तरह से उन्हें नकार दिया. यही हुआ जब उन्होंने बैराग फिल्म की. इस फिल्म में उनकी तिहरी भूमिका थी. मेरा नाम जोकर के बॉक्स ऑफिस पर पिटने पर राज कपूर तक को चरित्र अभिनेता की भूमिका करनी पड़ी थी.’’

बहरहाल इन अभिनेताओं को अब लेजन्ड(सर्वकालिक महान) माना जाता है. " ये अभिनेता अपने काम के बदौलत लोगों की नजरों में बने हुए हैं. हां, एक बात यह भी है कि गीतों ने इन अभिनेताओं को नई पीढ़ी तक पहुंचने में मदद की है."

डिस्ट्रीब्यूटर रमेश सिप्पी का कहना है कि पहले स्टार अपने स्टार-वैल्यू के जरिए दर्शकों को सिनेमाघर में खींच लेते थे. वे बताते हैं कि, " अब एक प्रोजेक्ट के रुप में फिल्म और उसकी कथावस्तु लोगों को अपनी तरफ खींचती है." यह पूछने पर कि क्या स्टार हिट और फ्लॉप के गणित की चौहद्दी से बाहर होते हैं, रमेश सिप्पी का जवाब था कि, " ना, एकदम नहीं.''

इंदु मिरानी का भी कहना है, " किसी के बारे में नहीं कहा जा सकता कि उसपर फ्लॉप का असर नहीं होता. बेशक अपने पिछले ट्रैक रिकार्ड के बूते कोई कुछ सालों तक अपने को इंडस्ट्री में खींच सकता है लेकिन फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगीं तो दर्शक आपको पसंद करना बंद कर देते हैं. और, आपकी नाकामी का इससे ज्यादा ताकतवर संकेत कोई और नहीं हो सकता.’’

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भारत में चार बड़े सुपरस्टार हैं जिनके आकर्षण का जादू पूरे देश में चलता है. इनमें तीन खान यानी सलमान, शाहरुख और आमिर शामिल हैं, साथ ही अक्षय कुमार भी. हृतिक रोशन भी एक बड़े स्टार हैं और उनके प्रशंसकों की एक भरी-पूरी तादाद है लेकिन हाल के सालों में उनकी बहुत सी बड़ी फिल्में रिलीज हुई हैं.

ट्रेड एनालिस्ट अमोद मेहरा का मानना है कि कोई भी सुपरस्टार आजे के समय में हिट या फ्लॉप के गणित के दायरे से बाहर नहीं. उनका कहना है, " युग हमारे तरफ नहीं है और इससे बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है. और अभिनेताओं को भी दर्शक की ओर से कुछ ऐसा ही सुनने को मिलता है.’’

कपूर बताते हैं, “ नई पीढ़ी के स्टार्स के प्रशंसक धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन अब भी इसमे जोर नौजवानों का ही है और वह भी 15-20 शीर्ष के शहरों में. नई पीढ़ी के तीन स्टार रणवीर कपूर, वरुण धवन और रणवीर सिंह आने वाले 3-5 सालों में बड़े सुपरस्टार को चुनौती दे सकते हैं.

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