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बॉलीवुड: ये रहे साल 2016 में सबसे बेहतरीन

दुनिया भर में होने वाले अवॉर्ड फंक्शन में कौन सी फिल्में अवॉर्ड की दावेदार रहीं. किन को आखिरकार अवॉर्ड मिला.

Updated On: Jan 02, 2017 11:09 AM IST

Anna MM Vetticad

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बॉलीवुड: ये रहे साल 2016 में सबसे बेहतरीन

2016 की 10 बेहतरीन बॉलीवुड फिल्में कौन सी हैं. अब यहां एक लिस्ट पेश है कि दुनिया भर में होने वाले अवॉर्ड फंक्शन में कौन सी फिल्में अवॉर्ड की दावेदार रहीं. किन को आखिरकार अवॉर्ड मिला. मैं हर केटेगरी में कम से कम तीन और ज्यादा से ज्यादा सात नाम दे रही हूं.

कोई फिल्म कितनी दमदार है, कभी कभी यह बात उसमें काम करने वाले सभी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की टीम से तय होती है. इसीलिए मैं यहां एक बेस्ट कास्ट कैटेगरी भी दे रही हूं.

बहस, असहमतियों और चर्चाओं का स्वागत है.

बेहतरीन फिल्म

इस बारे में मैंने 2016 की बॉलीवुड की बेहतरीन फिल्मों को लेकर अपने लेख में काफी कुछ लिखा है. लेकिन आपकी याद को तरोताजा करने के लिए यह है 2016 की बेहतरीन फिल्म की दावेदार फिल्में..

दावेदार:

कपूर एंड संस (सिंस 1921)

नीरजा

निल बटे सन्नाटा

फोबिया

रमन राघव 2.0

और अवॉर्ड मिलता है

कपूर एंड संस (सिंस 1921) को

यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि संवेदनाएं, छोटी छोटी चीजें और साफ सुथरी कहानी सबसे मनोरंजक हो सकती हैं. फिल्म ने साहस दिखाया है, जो बताती है कि हीरो भी समलैंगिक हो सकता है.

FawadKhan

बढ़िया अदाकारी से सजी और खूबसूरती से फिल्माई गई फिल्म. इसकी कहानी पारिवारिक जिंदगी की कुछ अनदेखे पहलुओं को उभारती है. जाने माने और माहिर अदाकारों से युवा निर्देशक शकुन बत्रा ने बखूबी काम लिया है.

बेहतरीन निर्देशक

दावेदार:

अनुराग कश्यप (रमन राघव 2.0)

अश्विनी अय्यर तिवारी (निल बटे सन्नाटा)

पवन कृपलानी (फोबिया)

राम माधवानी (नीरजा)

शकुन बत्रा (कपूर एंड संस)

और अवॉर्ड जाता है

शकुन बत्रा (कपूर एंड संस) को

शकुन बत्रा ने बता दिया है कि उनकी पहली फिल्म एक मैं और एक तू अंधेरे में छोड़ा गया तीर नहीं था. हालांकि वह एक लो प्रोफाइल फिल्म थी लेकिन प्यारी थी. कपूर एंड संस एक सेट फॉर्मूला से हटकर फिल्म है लेकिन फिर भी मनोरंजन करने में कामयाब रही. फिल्म की कास्ट शानदार थी.

जिससे शकुन बढ़िया परफॉर्मेंस निकाल पाए. वह एक ही फिल्म में ऐसे भावुक और लोटपोट कर देने वाले सीन देने में सफल रहे जिन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार दृश्यों में शामिल किया जा सकता है.

बेहतरीन राइटिंग

दावेदार:

आयशा देवित्रे ढिल्लों और शुकन बत्रा (कपूर एंड संस)

पवन कृपलानी, अरुण सुकुमार और पूजा लाढा सुरती (फोबिया)

रुचिका ओबरॉय (आईलैंड सिटी)

सेविन क्वाद्रास और संयुक्ता चावला (नीरजा)

विशान बाला और अनुराग कश्यप (रमन राघव 2.0)

और अवॉर्ड जाता है

विशान बाला और अनुराग कश्यप (रमन राघव 2.0) को

RamanRaghav

इंसानी सनक और दिमागी खुराफात की परतों को उन्होंने बड़ी खूबी के साथ पकड़ा है. वह बताते हैं कि किस तरह सामाजिक भेदभाव किसी को हिंसा की तरफ ले जाता है और इससे किस तरह निपटा जाए.

बेहतरीन अभिनेत्री

दावेदार:

आलिया भट्ट (डियर जिंदगी)

हेतल गाडा (धनक)

कीर्ति कुल्हाडी (पिंक)

राधिका आप्टे (फोबिया)

सोनम कपूर (नीरजा)

स्वरा भास्कर (निल बटे सन्नाटा)

विद्या बालन (कहानी 2)

और अवॉर्ड जाता है

सोनम कपूर (नीरजा) को

SonamKapoor

सोनम कपूर ने असल जिंदगी की एक नायिका के किरदार को जीवंत कर दिया. नीरजा भनोट पैन एम फ्लाइट की एयर होस्टेस थीं. वो हाईजैक हुए अपने विमान के यात्रियों की जान बचाते हुए मारी गई थीं. सोनम कपूर बहुत सालों से ऐसी लड़की रही हैं, जिसने पहली फिल्म में ही अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था. लेकिन बाद के सालों में उन्हें चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं से ज्यादा ग्लैमरस रोल्स के लिए ही जाना जाता रहा है. नीरजा उनके करियर का टर्निंग पॉइंट है. शायद इससे एक संदेश साफ मिलता है कि वह एक स्टार से ज्यादा एक अभिनेत्री के तौर पर पहचान चाहती हैं.

बेहतरीन अभिनेता 

आमिर खान (दंगल)

मनोज बाजपेयी (अलीगढ़)

रणदीप हुड्डा (सरबजीत)

शाहरुख खान (फैन)

विकी कौशल (रमन राघव 2.0)

और अवॉर्ड जाता है

मनोज बाजपेयी (अलीगढ़) को

मनोज बाजपेयी श्रीनिवास रामंचद्र सीरस के किरदार में एकदम डूब गए हैं. यह एक ऐसे प्रोफेसर की सच्ची कहानी है जिसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सिर्फ समलैंगिक होने की वजह से प्रताड़ित किया गया. मनोज बाजपेई पहली बार 1998 में रामगोपाल वर्मा की सत्या में भीखू म्हात्रे का किरदार निभा कर सुर्खियों में आए थे.

ManojBajpayee

तब से इन 18 साल के दौरान उन्हें हमेशा अच्छे किरदार और अपना हुनर दिखाने के मौके की तलाश रही. हंसल मेहता की अलीगढ़ में उन्हें बखूबी यह मौका मिला है. अपनी एक्टिंग के दम पर वे हमें उस आदमी के लिए रोने को मजबूर कर देते हैं जिससे उसकी निजता और गरिमा सिर्फ इसीलिए छीन ली गई थी क्योंकि वह समलैंगिक है.

बेहतरीन सहायक अभिनेत्री

दावेदार:

आलिया भट्ट (उड़ता पंजाब)

अमृता सुभाष (रमन राघव 2.0)

लीजा हेडेन (ए दिल है मुश्किल)

रिया शुक्ला (निल बटे सन्नाटा)

शबाना आजमी (नीरजा)

और अवॉर्ड जाता है

शबाना आजमी (नीरजा) को

राम माधवानी की फिल्म में शबाना आजमी को अपने लायक बिल्कुल सही रोल मिला और जिस खूबसूरती से उन्होंने इसे निभाया. वह एक्टिंग के छात्रों के लिए एक सबक का काम करेगा.

ShabanAzmi

 

वह आसानी से रो-धो कर ऐसी मां का रोल निभा सकती थीं जिसकी जवान बेटी की मौत हो गई है. लेकिन उन्होंने इस रोल को अलग तरह से लिया और बिना शोर के दर्द और पीड़ा को बयान किया है और इससे देखने वालों के दिल पर सीधी चोट होती है.

बेहतरीन सहायक अभिनेता

दावेदार:

अंगद बेदी (पिंक)

पंकज त्रिपाठी (निल बटे सन्नाटा)

ऋषि कपूर (कपूर एंड संस)

शाहरुख खान (डियर जिंदगी)

ताहिर राज भसीन (फोर्स 2)

और अवॉर्ड जाता है

पंकज त्रिपाठी (निल बटे सन्नाटा)

निल बटे सन्नाटा रिलीज होने के बाद पंकज त्रिपाठी ने एक इंटरव्यू में मुझसे कहा, ‘एक चीज होती है मात्रा. किसी भी एक्टर को अपनी भाव भंगिमाओं और भावनाओं के अर्थशास्त्र का अच्छी तरह ज्ञान होना चाहिए. न कम और न ज्यादा. अगर मैं इससे परे जाता हूं तो काम खराब ही होगा. यह बात मैंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में अपने गुरु ब.व. कारंत से सीखी थी. उन्होंने कहा, पंकज तुम्हें अपनी भाव भंगिमाएं व्यर्थ नहीं गंवानी है. नाप तोल कर उनका इस्तेमाल करो.’

निल बटे सन्नाटा में गंभीर लेकिन मजेदार गणित अध्यापक का रोल निभाकर पंकज ने बखूबी साबित किया है कि उन्होंने भावनाओं का बिल्कुल सही मात्रा में इस्तेमाल किया है. कहना पड़ेगा कि उन पर कारंत साब को गर्व होगा.

बेहतरीन कास्ट

दावेदार:

आमिर खान, फातिमा सना शेख, जायरा वसीम, सान्या मलहोत्रा, सुहानी भटनागर, साक्षी तंवर, अपारशक्ति खुराना, गिरीश कुलकर्णी, विवान भटेना (दंगल)

कीर्ति कुल्हाड़ी, तापसी पन्नु, आंद्रिया तेरिएंज, अमिताभ बच्चन, अंगद बेदी, विजय वर्मा, राशुल टंडन, तुषार पांडे, धृतिमान चटर्जी, पीयूष मिश्रा, ममता शंकर, ममता मलिक (पिंक)

विनय पाठक, अमृता सुभाष, तनिशा चटर्जी, उत्तरा बोआकर, चंदन रॉय सान्याल, अश्विन मुश्राम, समीर कोचर (आइलैंड सिटी)

सिद्धार्थ मल्होत्रा, फवदा खान, ऋषि कपूर, रजत कपूर, रत्ना पाठक, आलिया भट्ट (कपूर एंड संस)

नवाजुद्दीन सिद्दिकी, विकी कौशल, सोभिता धुलिपाला, अमृता सुभाष, अशोक लोखंडे, सक्षम सुधिजा, मुकेश छाबरा, विपिन शर्मा, अनुष्का साहनी (रमन राघव 2.0)

और अवॉर्ड जाता है

नवाजुद्दीन सिद्दिकी, विकी कौशल, सोभिता धुलिपाला, अमृता सुभाष, अशोक लोखंडे, सक्षम सुधिजा, मुकेश छाबरा, विपिन शर्मा, अनुष्का साहनी (रमन राघव 2.0) को.

इस फिल्म में वीभत्स हिंसा से ज्यादा जो एक चीज सबका ध्यान खींचती है, वह है सभी कलाकारों की पर्दे पर अदाकारी. सभी ने बढ़िया काम किया है.

बेहतरीन संगीत

दावेदार:

अमित त्रिवेदी (डियर जिंदगी)

प्रीतम (ए दिल है मुश्किल)

शंकर एहसान लॉय (मिर्जया)

तापस रालिया (धनक)

विशाल शेखर (सुल्तान)

और अवॉर्ड जाता है

प्रीतम (ए दिल है मुश्किल) को

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सच कहें तो 2016 संगीत के लिहाज से हिंदी सिनेमा में कोई कमाल का साल नहीं रहा. लेकिन इस कैटेगरी के नॉमिनेशन एक उम्मीद जरूर जगाते हैं. प्रीतम की जिंदादिल और मधुर धुनें करण जौहर की ए दिल है मुश्किल की कहानी का अहम हिस्सा हैं. इस फिल्म के गीत प्रीतम के अब तक के सबसे बेहतरीन गीतों में शुमार किए जा सकते हैं.

 बेहतरीन गीतकार

दावेदार:

अमिताभ भट्टाचार्य (दंगल)

गुलजार (मिर्जया)

जयदीप साहनी (बेफिक्रे)

कौसर मुनीर (डियर जिंदगी)

वरुण ग्रोवर (जबरा फैन, फैन के लिए प्रमोशनल गीत)

और अवॉर्ड जाता है

अमिताभ भट्टाचार्य (दंगल) को

Dangal

अमिताभ भट्टाचार्य के गीतों के बोल फिल्म के मूड और उसके किरदारों पर बिल्कुल फिट बैठते हैं. उन्होंने मिट्टी में रहने वाले इंसानों की रोजमर्रा की जिंदगी से कविता निकाली है. यह हमें रुलाती भी है और हंसाती भी.

बेहतरीन एडिटिंग

दावेदार:

आरती बजाज (रमन राघव 2.0)

मोनिसा आर. बलदावा (नीरज)

नम्रता राव (कहानी 2)

पूजा लाढा सुरती (फोबिया)

शिवकुमर वी. पनीकर (कपूर एंड संस)

और अवॉर्ड जाता है

पूजा लाढा सुरती (फोबिया) को

फोबिया में आपको एक भी शॉट फाल्तू नजर नहीं आता. फिल्म में कोई भी सीन, कहा गया कोई शब्द या फिर खामोशी का कोई लम्हा गैर-जरूरी नहीं लगता. यह फिल्म 6,720 सेकंड की है और हर सेकंड की अहमियत है.

बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी

दावेदार:

बिनोद प्रधान (बागी)

जय ओझा (रमन राघव 2.0)

जयकृष्ण गुम्माड़ी (फोबिया)

जेफरी एफ बीएरमान (कपूर एंड संस)

लक्ष्मण उतेकर (डियर जिंदगी)

मितेश मीरचंदानी (नीरजा)

रशेल कारपेंटर (पार्च्ड)

और अवॉर्ड जाता है

रशेल कारपेंटर (पार्च्ड) को

राजस्थान फोटोग्राफरों और सिनेमेटोग्राफरों की पसंदीदा जगह रही है. उसकी खबसूरती को खूब दिखाया जाता है, लेकिन फिर भी रशेल कारपेंटर उसमें से कुछ नया चुराने में कामयाब रहे हैं.

Parched

उनके कैमरों के लैंसों से रोशनी और परछाई, रंग और अंधेरे की कमाल की छवियां उभरती हैं. जिस खूबी के साथ उन्होंने पार्च्ड की प्यारी महिलाओं के चेहरों और बॉडी लैंग्वेज को कैमरे में कैद कर पेश किया है, वह अद्भुत है.  

बेहतरीन साउंड डिजाइन

दावेदार:

विवेक सचिदानंद (फोबिया)

विनीत डीसूजा (रमन राघव 2.0)

शजित कोएरी (Te3n)

और अवॉर्ड जाता है

विवेक सचिदानंद (फोबिया) को

सचिदानंद फोबिया में देखने वालों के दिमाग से बखूबी खेले हैं. वह हिंदी थ्रिलर फिल्मों में लगभग एक दशक से इस्तेमाल हो रही चीखों और चरचराहट से आगे निकल गए हैं. लगता है कि बॉलीवुड भूल गया था कि खामोशी की आवाजें और सस्पेंस की सरसराहट चीखने चिल्लाने से कहीं ज्यादा दहशत पैदा करती हैं. सचिदानंद ने यही बात याद दिलाई है.

बेहतरीन प्रॉडक्शन डिजाइन

दावेदार:

एक्रोपोलिस (मिरजया)

कृष्णेंदु चौधरी (आइलैंड सिटी)

रजत पोद्दार (बागी)

सत्येन चौधरी (फोबिया)

तिया तेजपाल (रमन राघव 2.0)

और अवॉर्ड जाता है

कृष्णेंदु चौधरी (आइलैंड सिटी) को

रुचिका ओबरॉय की लिखी कहानी को उन्होंने बखूबी उभारा है और फिल्म में दिखाई गई तीन कहानियों को अलग अलग लुक में पेश किया गया है. एक तरफ मशीनी इंसानों वाली कॉरपोरेट ऑफिस की दुनिया है.

तो दूसरी तरफ अचानक मिली खुशी से फूला नहीं समाने वाला एक मध्यवर्गीय घर और उसके सुख-दुख हैं. तो वहीं तीसरी कहानी में मुंबई में मुफलिसी और हताशा में बसर हो रही जिंदगी की तस्वीर खींची गई है. चौधरी की तवज्जो अच्छी तस्वीर नहीं. बल्कि सच्ची तस्वीर पेश करनी पर रही है.

लीड या सपोर्टिंग रोल में सबसे दिलचस्प डेब्यू

दावेदार:

आंद्रिया तेरिएंग (पिंक)

हेतल गाडा (धनक)

रिया शुक्ला (निल बटे सन्नाटा)

सोभिता धुलिपाला (रमन राघव 2.0)

सुहानी भटनागर (दंगल)

यशविनी दायामा (फोबिया, डियर जिंदगी)

जायरा वसीम (दंगल)

और अवॉर्ड जाता है

हेतल गाडा (धनक) को

Dhanak

मुंबई, जोधपुर, जयपुर, बंगलौर और हैदराबाद में पांच सौ बच्चों के ऑडिशन हुए. तब कहीं जाकर निर्देशक नागेश कुकनूर को हेतल गाडा और फिल्म में उसके छोटे भाई का किरदार निभाने वाला कृष छाबड़िया मिले. कृष को दावेदारों को लिस्ट में नहीं रखा गया है क्योंकि 2016 में बहुत सारे न्यूकमर आए और सभी बहुत प्रतिभावान है इसलिए मुकाबला बहुत सख्त है.

जब कुकनूर ने फिल्म शूट की तो हेतल की उम्र उस वक्त 10 साल था. लेकिन उसने क्या काम किया है! उसके आत्मविश्वास ने उम्र और अनुभवहीनता को कहीं आड़े नहीं आने दिया है. अगर हेतल बड़ी होकर एक्टिंग को ही अपना करियर बनाने का फैसला करती है तो यह भारतीय सिनेमा की खुशकिस्मती होगी.

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