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Tuesday Trivia : अलीबाबा और 40 चोर से शुरू हो गई थी बॉलीवुड फिल्मों की इंटरनेशनल स्क्रीनिंग

सदाबहार हिन्दी फिल्में देखिए सिर्फ सोनी मैक्स 2 पर, क्योंकि कुछ फिल्मों का जादू कभी कम नहीं होता

Updated On: Aug 14, 2018 12:48 PM IST

Hemant R Sharma Hemant R Sharma
कंसल्टेंट एंटरटेनमेंट एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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Tuesday Trivia : अलीबाबा और 40 चोर से शुरू हो गई थी बॉलीवुड फिल्मों की इंटरनेशनल स्क्रीनिंग

भारतीय सिनेमा में ’अलीबाबा और चालीस चोर’ एक नई शुरुआत थी जहां निर्माता एफ़ सी मेहरा और निर्देशक उमेश मेहरा ने इस फिल्म का निर्माण रशिया के फिल्म मेकर्स और टैक्निशियन्स के साथ मिल कर इंडो-रशियन संयुक्त प्रोडक्शन के तौर पर किया था.

फिल्म में निर्देशन की बागडोर भारतीय निर्देशक उमेश मेहरा के साथ उज़्बेकिस्तान के मशहूर निर्देशक लतीफ़ फ़ैज़ियेव (Latif Faiziyev) ने संभाली. लतीफ़ उस दौर में रूस में रियलिस्टिक सिनेमा बनाने के लिए जाने जाते थे और अलीबाबा जैसी फैंटेसी उनके लिए भी नया अनुभव थी.

फिल्म भारत के साथ साथ, कई अन्य देशों में रिलीज़ की गई जिनमें रूस, फ्रांस, इटली, फ़िनलैंड, तुर्की , हंगरी और जर्मनी शामिल थे. फिल्म जहां भारत में गोल्डन जुबली हिट रही. वहीं रशिया में भी बहुत बड़ी कामयाब रही. फिल्म को 1980 के चैकोस्लोवाकिया फिल्म फ़ेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरुस्कार मिला और उसी वर्ष के ताशकंद फिल्म फ़ेस्टिवल में भी फिल्म बहुत सराही गई.

फिल्म की सफलता में इसके संगीतकार आर. डी. बर्मन के लोकप्रिय गीतों का भी योगदान था. बर्मन ने फिल्म के गीतों में मिडिल ईस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स और अरेबियन फोक म्यूजिक का बखूबी इस्तेमाल किया था. फिल्म के दो गीत ’खतूबा’ और ’सारे शहर में’ भारत के साथ-साथ विदेश में भी लोकप्रिय हुए.

फिल्म के बैक-ग्राउंड संगीत के लिए बर्मन ने खासी मेहनत की और फिल्म के एक मुख्य दृश्य ’खुल जा सिम सिम’ के लिए उन्होंने पहाड़ों से पत्थर गिराने के साउंड को रिकॉर्ड कर अनूठे अंदाज में पेश किया, जो फिल्म में बहुत असरदार तरीके से उभर कर आया.

फिल्म में गीतों के अलावा बैकग्राउंड संगीत के लिए रशियन संगीतकार व्लादिमिर मिलोव का सहयोग भी लिया गया. इस अनोखे भारतीय-रूसी तालमेल का नतीजा बना फिल्म का सुपरहिट म्यूजिक. जिसे दर्शकों के मदहोश कर दिया. इस फिल्म में ज़ीनत अमान ने एक खास भूमिका अदा की थी और भारत के बाहर फिल्म जहां-जहां भी प्रदर्शित हुई वहां फ़ातिमा के रूप में ज़ीनत के काम को बेहद पसंद किया गया.

जब निर्देशक उमेश मेहरा ने रशियन कॉलेबोरेशन में अपनी अगली फिल्म सोहनी महीवाल का निर्माण किया तब ज़ीनत की रूस में लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए, रिशियन प्रोड्यूसर्स की मांग पर, ज़ीनत के लिए फिल्म में एक महत्वपूर्ण किरदार लिखा गया था.

फिल्म की 70% शूटिंग उज्बेकिस्तान में की गई थी. फिल्म की एक और हाइलाइट इसके स्टंट्स थे. खासकर घोड़ों के साथ फिल्माये गए रोमांचक सीन्स जिसके लिए किर्गिस्तान के सर्कस ग्रुप यिगिट्स ऑफ किर्गिस्तान के कलाकारों को फिल्म में शामिल किया गया.

फिल्म में अरेबियन नाइट्स की मूल कहानी में परिवर्तन किया गया जिसमें गुफा में एक परी की आवाज को मुख्य किरदार के रूप में पेश किया गया. रशियन फिल्ममेकर और एक्टर रोला बायकोव जिन्होंने फिल्म में डकैतों के सरदार की भूमिका की थी, उन्होंने स्क्रिप्ट में ये बदलाव सुझाया था और फिल्म में ये किरदार उनकी पत्नी अभिनेक्षी एलेना ने निभाया था.

(Research: SONY MAX2)

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