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Womens day: अब फिल्मों में महिलाएं बराबरी का हक पा रही हैं

फिल्मों में आज पैसों का बोलबाला है

Bharti Dubey Updated On: Mar 08, 2018 11:34 PM IST

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Womens day: अब फिल्मों में महिलाएं बराबरी का हक पा रही हैं

वो दिन लद गए जब मुख्यधारा की अभिनेत्री अच्छे फिल्मकारों द्वारा नोटिस किए जाने का इंतजार करती थीं. आज, वो न सिर्फ अच्छी फिल्में करने लिए तत्पर हैं बल्कि इसके लिए सक्रियता से कोशिश भी कर रही हैं. वो फिल्म और उसकी कहानी से कोई समझौता नहीं करतीं, जिसका वो हिस्सा बनने जा रही हैं. लेकिन पुरुष कलाकारों के मुकाबले ऊंची कीमत पाना अब भी उनके लिए दूर की कौड़ी है. हालांकि इस नियम के अपवाद भी हैं. दीपिका पादुकोण का उदाहरण लीजिए. ‘पद्मवात’ के लिए दीपिका को उनके सह-कलाकार शाहिद कपूर और रणवीर सिंह के मुकाबले ज्यादा रकम मिली. फिल्म जगत के एक इनसाइडर के मुताबिक, " ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तीनों कलाकारों में दीपिका सबसे बड़ी स्टार हैं. जब दीपिका ने ‘पीकू’ की थी, तब भी यही मसला था. कोई सुपरस्टार्स के साथ उनकी फिल्मों के बारे में बात नहीं कर सकता क्योंकि इन दिनों वो फिल्मों में हिस्सेदार होते हैं.’’

फिल्म क्वीन ‘ ने कंगना रनौत को महिला केंद्रित फिल्म बनाने का अवसर देने के साथ महिला केंद्रित फिल्मों का अर्थशास्त्र सकारात्मक तरीके से बदल दिया. इससे न सिर्फ कंगना को ‘सिमरन’ और ‘तनु वेड्स मनु’ जैसी फिल्में मिलीं बल्कि उन्हें इन फिल्मों में अच्छी पगार भी मिली क्योंकि इनमें वो सबसे बड़ी स्टार थीं. हालांकि नामी अभिनेताओं के साथ काम करते वक्त उनके साथ ऐसा नहीं हुआ. तब कंगना को मुंह मांगी रकम नहीं मिली.

कंगना ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब कोई भी बॉक्स ऑफिस पर सफलता की गारंटी नहीं दे सकता, तब पुरुष कलाकारों को अभिनेत्रियों से ज्यादा पैसा क्यों मिलता है? अदिति राव हैदरी ने भी वेतन में असमानताओं पर सवाल उठाया जो शायद शुरुआत से ही है.

विद्या बालन ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि शायद उन्होंने पुरुष वर्चस्व वाली फिल्मों में काम करना बंद कर दिया है, लेकिन उन्होंने माना था कि ये खाई बहुत बड़ी है.

फिलहाल सलमान खान के साथ एक फिल्म का निर्माण कर रहे निर्माता रमेश तौरानी ने मेहनताने को लेकर असमानता की बात सिरे से खारिज की. उन्होंने कहा, "ये सब इस पर निर्भर करता है कि फिल्म को कौन चला सकता है, वेतन का फैसला इस पर होता है कि कौन फिल्म के लिए बिजनेस ला सकता है, न कि जेंडर पर."

भारती प्रधान इससे सहमत हैं कि पूरा मामला बिजनेस का है. उन्होंने कहा, "वेतन का सीधा संबंध इससे है कि कौन फिल्म चला सकता है. अगर सैफ (अली खान), शाहिद और कंगना बाजार में या फिल्म में समान स्तर पर हैं, तो उन्हें समान वेतन मिलता है."

अभिनेत्री केंद्रित फिल्मों का बोलबाला

‘पद्मावत’ की तरह अगर कोई फिल्म महिला के ईर्द-गिर्द घूमती है तो निश्चित रूप से दीपिका को साथी कलाकारों से ज्यादा पैसे मिलेंगे. जिस दिन अभिनेत्रियां खान बन जाएंगी और तीनों खान की तरह सिर्फ उनके नाम पर फिल्म चलेगी, उस दिन वेतन की असमानता भी कम हो जाएगी.

कभी-कभी, ऐश्वर्या राय या काजोल जैसी अभिनेत्रियां, जो चुनकर और खास फिल्में करती हैं, आसानी से उपलब्ध नायिकाओं के मुकाबले भारी रकम भी पाती हैं.

फिलहाल पूरा मामला बिजनेस का है और इसका अभिनेत्री से कोई लेना-देना नहीं है. इसलिए ऊपर दिए गए दुर्लभ उदाहरणों को छोड़ समान वेतन की चाह एक अव्यावहारिक मांग होगी.''

जब नायिकाएं निकल गईं आगे

अतीत में ऐसे उदाहरण भी आए, जब नायिका को नायक से अधिक भुगतान किया गया था. रिक्कू राकेशनाथ याद करते हैं, "कई फिल्में ऐसी थीं, जिसमें माधुरी को नायक के मुकाबले अधिक भुगतान किया गया था, आज भी उन्हें अच्छी-खासी कीमत मिल रही है लेकिन अंत में वो एक पैकेज होता है जो फिल्म के फायदे के लिए काम करता है."

माधुरी दीक्षित और श्रीदेवी ने कम लोकप्रिय अभिनेताओं के साथ काम किया और उन्हें ज्यादा मेहनताना मिला. निर्माता बोनी कपूर कहते हैं, "वितरक माधुरी और श्रीदेवी के नाम पर फिल्में खरीदते थे क्योंकि वो फिल्मों में वैल्यू-एडिशन की तरह थीं.’’

फिल्मों के पोस्टर और बैनर पर भी कटआउट के रूप में अभिनेत्रियों की बड़ी तस्वीरें होती थीं, ‘चांदनी’ और ‘चालबाज’ के पोस्टरों में हीरो (ऋषि कपूर, विनोद खन्ना, सन्नी देओल और रजनीकांत) के मुकाबले श्रीदेवी को ज्यादा तवज्जो दी गई. यही बात माधुरी दीक्षित की फिल्मों के साथ भी थी.

जे पी चौकसे याद करते हैं, 50 और 60 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर मधुबाला और मीना कुमारी का नाम बिकता था, फिर भी उन्हें नायक से ज्यादा भुगतान नहीं मिलता था. एक ट्रेड एनालिस्ट के मुताबिक, “साल 2000 तक बॉक्स ऑफिस पर काजोल को भीड़ खींचने वाला मान जाता था. फिर भी उनकी कमबैक फिल्म ‘फना’ ही हिट रही. ये फिल्म भी राजनीतिक विवाद और उनके सह-कलाकार आमिर खान के कारण चली. वैसे ये फिल्म औसत दर्जे की थी.’’

भारत भूषण, प्रदीप कुमार, जितेंद्र और विनोद मेहरा जैसे नायकों के होते हुए भी मीना कुमारी, वैजयंतीमाला, हेमा मालिनी और रेखा, अपने बल पर हिट फिल्में देने के लिए जानी गईं. लेकिन, एक फिल्म एनालिस्ट का कहना है, निर्माता आज शीर्ष नायिकाओं को भी बदलने में नहीं हिचकिचाता. ऐश्वर्या राय ने ‘मंगलपांडे ‘ फिल्म की 10 दिन के शूट के लिए एक करोड़ रुपए मांगे थे. निर्माता ने इतनी रकम देने से इनकार कर दिया और ये रोल अमीषा पटेल को मिल गया.

वरिष्ठ फिल्म लेखक उदय तारा नायर ने कहा, "50,60 और 70 के दशक की नायिकाएं अभिनेताओं के बराबर पगार पाने की हकदार थीं, लेकिन उन्हें कम मेहनताना मिला क्योंकि फिल्में हीरो के नाम पर बेची गईं. हीरो ये भी तय करता था कि वो किस अभिनेत्री के साथ काम करेगा. मैं तब हंसी थी जब आशा पारेख ने कहा था कि उन्होंने दिलीप साहेब के साथ काम नहीं करने का फैसला किया है.’’

पैसे का बोलबाला

बॉलीवुड की नायिकाएं बराबरी का ओहदा हासिल करेन वाली हैं. वो फिल्म और रोल के लिहाज से जिस तरह की भूमिकाएं और चुनौतियां स्वीकार कर रही हैं और जिस तरह इसे फिल्में बनाकर आगे ले जा रही हैं, उससे ये साफ संकेत मिलता है कि मायानगरी में उनकी पकड़ बराबर की है. ये सिर्फ वक्त की बात है जब उनकी पगार भी नायकों के बराबर होगी. अक्षय कुमार के साथ काम करने वाली और अब अनुष्का शर्मा, ऐश्वर्या राय बच्चन और दीपिका पादुकोण के साथ काम कर रहीं निर्माता प्रेरणा अरोड़ा पूरे मामले को अलग नजरिए से देखती हैं. उन्होंने कहा, "आज अभिनेता निर्माता को लूट नहीं रहा है, बल्कि फिल्म को मुनाफे का सौदा बनाने में मदद कर रहा है. ये इससे पता चलता है कि एक वर्ष में शीर्ष अभिनेता और अभिनेत्री कितनी फिल्में करते हैं, शायद चार से अधिक नहीं. मैं निर्माताओं से कहना चाहती हूं कि पैसे से कलाकारों को नहीं खरीदा जा सकता. उनके साथ काम करने के लिए हमारे पास बेहतर कहानी होनी चाहिए और उन्हें इसकी वाजिब कीमत मिलनी चाहिए. ऐसा इसलिए कि बॉक्स ऑफिस पर कमाई के लिए वो ही हमारी मदद करने वाले हैं. ’’

बॉक्स

चार्लीज थेरॉन ने समान वेतन के लिए संघर्ष किया और हंट्समैन: विंटर वॉर (2016) के निर्माण के दौरान उन्हें ये मिला भी. इस फिल्म में उन्होंने दुष्ट जादूगरनी रानी रवेना की भूमिका निभाई.

मॉन्स्टर के लिए साल 2004 में बेहतरीन अभिनेत्री का पुरस्कार जीतने वाली चार्लीज ने कहा,  "मैं ऐसी स्थिति में हूं जहां कह सकती हूं कि मुझे अपने पुरुष सह-कलाकार के बराबर वेतन चाहिए, जिसके साथ मैंने दूसरी फिल्मों में बराबर की मेहनत की है. हम सीक्वल कर रहे थे, हमने इसे एक साथ किया था, क्यों नहीं? इसके बारे में दिलचस्प ये था कि मेरे स्टूडियो ने कहा, ठीक है. और मैंने कहा, ओह? हमें ये कहने की जरूरत है? हमें इसके बारे में इतना विनम्र नहीं होना चाहिए और जो चाहते हैं वो कहना चाहिए? "

42 साल की चार्लीज ने कथित तौर पर सीड्रिक निकोलस-ट्रॉयन-निर्देशित फिल्म के लिए एक करोड़ डॉलर लिए थे. इतनी ही रकम उनके साथी कलाकार क्रिस हेम्सवर्थ को मिली थी.

 

बॉक्स

दीपिका पादुकोण – पद्मवात के लिए 11 करोड़  रुपए

कैटरीना कैफ – 5 करोड़ रुपए

करीना कपूर – 4 करोड़ रुपए

कंगना रनौत – सिमरन के लिए पांच करोड़ जबकि मांग 11 करोड़

प्रियंका चोपड़ा – बाजीराव मस्तानी के लिए चार करोड़. उन्होंने लंबे वक्त से कोई भारतीय फिल्म साइन नहीं की

आलिया भट्ट -  चार करोड़, उन्हें चार करोड़ मिले

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