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Shocking: तीन सदस्यीय समिति ने सौंपी ‘पद्मावती’ पर अपनी रिपोर्ट, अब CBFC लेगी अंतिम फैसला

हमने अपने कमेंट्स को जमा कर दिया है, जो संजय लीला भंसाली के साथ साझा किया जा सकता है. अब फिल्म के भाग्य पर फैसला करने के लिए सीबीएफसी है

Updated On: Dec 30, 2017 06:07 PM IST

Arbind Verma

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Shocking: तीन सदस्यीय समिति ने सौंपी ‘पद्मावती’ पर अपनी रिपोर्ट, अब CBFC लेगी अंतिम फैसला

एक तीन सदस्यीय समिति ने 28 दिसंबर को पद्मावती देखी और उस पर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कपिल कुमार ने कहा कि, ‘हमने फिल्म देखी और मैं ये कह सकता हूं कि इसमें ऐतिहासिक कथा के रुप में कुछ भी नहीं कहा जा सकता-ये इतिहास या कथा हो सकती है. ये और बात है कि फिल्म में ऐतिहासिक नाम और जगहों का इस्तेमाल किया गया है और जायसी से प्रेरणा लेने के दावों का भी इस्तेमाल किया गया है. सभी के लिए अभिव्यक्ति की आजादी अहम है मगर आजादी का ये कतई मतलब नहीं कि वो देश में टकराव की स्थिति पैदा करे. मैं अंतर को भरने में यकीन रखता हूं और ब्रिजिंग नहीं करता क्योंकि पुल टूट सकता है.’

कुमार ने प्रतिबंध की मांग करने की रिपोर्ट्स से इनकार कर दिया लेकिन उन्होंने कहा कि, "हमने अपने कमेंट्स को जमा कर दिया है, जो संजय लीला भंसाली के साथ साझा किया जा सकता है. अब फिल्म के भाग्य पर फैसला करने के लिए सीबीएफसी है.

फिल्म में कुछ वास्तविक त्रुटियां भी हैं. जाहिर तौर पर फिल्म के एक सीन में ऐसा दिखाया गया है कि राजा रतन सिंह एक कैदी को दिल्ली लेकर जाते हैं और ‘पद्मावती’ उससे मिलने के लिए 800 डॉलर लेकर जाती है.

एक सूत्र ने बताया कि, ‘फिल्ममेकर ने न केवल इतिहास के साथ खिलवाड़ किया है बल्कि उन्होंने जायसी के काम को भी नुकसान पहुंचाया है.’

इस फिल्म की स्क्रीनिंग के मौके पर अन्य सदस्यों में से कुछ मेवाड़ और चंद्रमणी के अरविंद सिंह थे.

इसी बीच, उदयपुर के विश्वराज सिंह को सीबीएफसी के चेयरमैन प्रसून जोशी ने आमंत्रित किया था जो शॉक्ड थे कि उन्हें इस स्क्रिनिंग के मौके पर बुलाया गया. विश्वराज ने कहा कि, ‘मैंने इस फिल्म की स्क्रिनिंग के बारे में सुना था. मुझे प्रसून जोशी ने आमंत्रित भी किया था लेकिन उन्होंने दोबारा इस संबंध में मुझसे कोई बात नहीं की. अगर स्क्रीनिंग हुई है, तो इसका मतलब है कि सीबीएफसी हमारे साथ कोई चाल चल रहा है.’

ये पता चला है कि सीबीएफसी ने ‘पद्मावती’ को देखने के लिए पैनल के नौ से दस लोगों को आमंत्रित किया था. फिल्म की एक और स्क्रीनिंग के चांसेज भी हैं.

साथ में, करणी सेना के लोकेंद्र सिंह काल्वी का मानना है कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाली फिल्मों के लिए एक विशेष प्री-स्क्रीनिंग कमेटी की रचना की जानी चाहिए.

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