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रीमा लागू की 'सलमान की मां' के रूप में पहचान उनकी कला का अपमान है

मराठी-हिन्दी फिल्मों की इस जानी-मानी शख्सियत को हमारी तरफ से भी श्रद्धांजलि...

Piyush Pandey Updated On: May 18, 2017 10:19 AM IST

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रीमा लागू की 'सलमान की मां' के रूप में पहचान उनकी कला का अपमान है

हिन्दी-मराठी फिल्मों की जानी मानी चरित्र अभिनेत्री रीमा लागू नहीं रहीं. दिल का दौरा पड़ने से गुरुवार को उनका निधन हो गया. कई समाचार चैनलों और वेबसाइट्स ने रीमा लागू के निधन की खबर लिखते हुए बताया-राजश्री प्रोडक्शन्स की फेवरेट रीमा लागू नहीं रहीं. उन्होंने 'मैंने प्यार किया' में सलमान की मां और 'हम आपके हैं कौन' में माधुरी दीक्षित की मां का किरदार निभाया था.

तो क्या रीमा लागू की पहचान सिर्फ राजश्री प्रोडक्शन्स की चंद फिल्में हैं ? क्या सलमान खान की मां या उनकी फिल्मों में काम करना ही रीमा लागू की पहचान है या विकीपीडिया के जरिए खबर लिखने वाले रीमा लागू को श्रद्धांजलि देते हुए भी उनका अपमान कर रहे हैं?

250 फिल्मों का करियर

Vaastav

वास्तव में रीमा लागू

रीमा लागू ने करीब 250 फिल्में की. चार-पांच मराठी फिल्मों में वह नायिका रहीं. 'वास्तव' में आधुनिक मदर इंडिया के रुप में उनका किरदार राजश्री प्रोडक्शन्स की तमाम फिल्मों के किरदार से बड़ा और अहम रहा. रीमा ने बतौर बाल कलाकार 13-14 फिल्में कीं, और यह सफर हिन्दी फिल्मों की लोकप्रिय मां तक पहुंचा, जिसमें वो निरुपा राय के बाद सबसे लोकप्रिय मां साबित हुईं.

लेकिन फिल्मों से इतर मराठी रंगमंच ने रीमा की शख्सियत को सही मायने में पहचाना. कॉलेज के बाद पहली बार जब वो 'पुरुष' नाटक में नाना पाटेकर के सामने एक बलात्कार पीड़िता के रुप में सीना तानकर खड़ी हुईं तो थिएटर में बैठे सैकड़ों दर्शकों को मालूम पड़ा कि नाना पाटेकर जैसे दिग्गज को भी चुनौती मिल सकती है.

'छापाकाटा' मां-बेटी के संबंधों को बुनता नाटक था. सविता दामोदर पराजंपे, ताराबाई मोढ़क जैसे नाटकों ने मराठी नाटकों की दुनिया में खासी लोकप्रियता बटोरी. कुछ साल पहले 'एकदां पहावं करुन' जैसा नाटक लिव-इन रिलेशनशिप पर उन्होंने किया. हालांकि, इस आधुनिक विषय केंद्रित नाटक को उतनी लोकप्रियता नहीं मिली, जितनी रीमा लागू को उम्मीद थी.

विज्ञापन से शुरुआत

ReemaLagoo

रीमा लागू का बचपन का नाम नयन भड़भड़े था. उनकी मां मंदाकिनी भड़भड़े मराठी रंगमंच पर सक्रिय थीं, और दुर्गा खोटे से उनका अच्छा परिचय था. दुर्गा खोटे के कहने पर ही नयन उर्फ रीमा का फिल्मों में प्रवेश हुआ.

पांचवी क्लास तक नयन ने करीब 12-13 फिल्मों में बतौर बाल कलाकार काम किया. पढ़ाई के मद्देनजर फिर यह सिलसिला रुक गया. आगे की पढ़ाई नयन यानी रीमा ने पुणे से की और जब 11वीं कक्षा के बाद वह दोबारा मुंबई लौटीं तो फिर एक बार फिल्मों की तरफ कदम बढ़े. नयन उर्फ रीमा को समझ आने लगा कि उन्हें एक्टिंग में मजा आता है तो उन्होंने अपनी मां से कहा कि वो आगे की पढ़ाई करस्पोंडे्स से करना चाहती हैं. मां खुद एक्टर थीं, तो उन्होंने इसकी इजाजत दे दी. इसी दौरान श्याम बेनेगल के साथ उन्होंने साबुन का एक विज्ञापन किया जो छह भाषाओं में बना और इस विज्ञापन को करते हुए भी रीमा को लगा कि अब थिएटर-फिल्मों की ही दुनिया में उन्हें अपना नाम बनाना है.

ग्रेजुएशन के साथ एक्टिंग चलती रही. पढ़ाई के बाद एक्टिंग के बूते ही रीमा को यूनियन बैंक में नौकरी मिल गई. उस दौरान कलाकारों का भी एक कोटा था, जो इंटरबैंक थिएटर कंपटीशन या प्रोग्राम्स में हिस्सा लेते थे. इसी दौरान नयन की एक और रंगमंच अभिनेता विवेक लागू से मुलाकात हुई. दोनों ने शादी कर ली और नयन बन गई रीमा लागू.

नाटक से था गहरा नाता

1984 में रीमा लागू ने अपनी बेटी पर ध्यान देने का इरादा कर बैंक की नौकरी छोड़ी और बेटी और एक्टिंग पर ही सारा ध्यान फोकस किया. नाना पाटेकर के साथ 'पुरुष' के तो उन्होंने 700-800 मंचन किए. और इस नाटक से उनका नाता तब टूटा, जब नाना की फिल्मी लोकप्रियता से प्रभावित दर्शक थिएटर आने लगे और सीटियां बजाने लगे. नाना पाटेकर भी मंचन के दौरान आग्रह करते कि ये नाटक है, फिल्म नहीं लेकिन अंकुश हिट हो चुकी थी और नाना की दूसरी फिल्मों की लोकप्रियता का असर थिएटर में शोर के रुप में पहुंच रहा था.

रीमा लागू ने तू-तू मैं मैं और श्रीमान श्रीमती जैसे कई सीरियल्स भी किए, और इन सीरिल्यस ने भी उन्हें हिन्दीभाषी दर्शकों तक पहुंचाया.

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दरअसल, रीमा लागू ने एक्टिंग में जितना काम किया, उन्हें उस काम के बूते ही सम्मान मिलना चाहिए. रीमा लागू के 40 साल लंबे करियर में उनकी पहचान का एक सिरा 'मैंने प्यार किया' या 'हम साथ साथ हैं' में सलमान की मां के किरदार से जरुर जुड़ता है लेकिन उनके काम को वास्तव, गुमराह, आशिकी जैसी फिल्मों और 'पुरुष' और 'सविता दामोदर परांजपे' जैसे नाटक से तोला जाना चाहिए.

वैसे, ये सभी सच है कि रीमा लागू को उनकी काबिलियत के मुकाबले भूमिकाएं नहीं मिलीं और इसका अफसोस उन्हें भी रहा.

मराठी-हिन्दी फिल्मों की इस जानी-मानी शख्सियत को हमारी तरफ से भी श्रद्धांजलि...

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