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'एक चतुर नार' किसने गाया? होशियार किशोर कुमार ने या भाई अशोक कुमार ने

अगर किसी को समझना हो कि आरडी बर्मन क्यों जीनियस हैं तो उसे ये गाना सुनना चाहिए

Updated On: May 16, 2017 10:03 AM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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'एक चतुर नार' किसने गाया? होशियार किशोर कुमार ने या भाई अशोक कुमार ने

कुछ गाने आंखों को नम करने वाले होते हैं, कुछ पैरों को थिरका देने वाले. लेकिन हिंदी सिनेमा का एक गाना ऐसा है जिसे सुनकर बस बार-बार हंसा जा सकता है. हम बात कर रहे हैं मन्ना डे और किशोर कुमार के गाए क्लासिक गाने ‘एक चतुर नार’ की.

अगर किसी को समझना हो कि आर डी बर्मन क्यों जीनियस हैं तो उसे ये गाना सुनना चाहिए. पंचम ताल से खेलते नहीं हैं बल्कि लय और ताल उनकी देह का हिस्सा है.

ऊपर से इस गाने में किशोर कुमार जिस तरह से बीच में होम्योपैथिक दवाओं के नाम और आखिर में मन्ना डे की तिहाई के जवाब में बांग्ला में नीबू निचोड़ना बोल जाते हैं वो अदभुत है. मगर पड़ोसन फिल्म का यह गाना दरअसल सबसे पहले 1941 की फिल्म झूला में अशोक कुमार ने गाया था.

इस गाने को कई जगह लोग चोरी का गाना बताते हैं जो कि सही नहीं है. अशोक कुमार जब फिल्मिस्तान और बॉम्बे टॉकीज में जाते थे. छोटे किशोर कुमार उनके साथ होते थे. झूला में यह गाना फिल्म के एल्बम का हिस्सा नहीं था. दादामुनि इसकी सिर्फ चार लाइनें दोहराते हैं.

मगर यह धुन और बोल किशोर कुमार को बड़े अच्छे लगे. स्थापित होने पर इस चार लाइन को पूरा गाना बनाने का आइडिया किशोर दा ने ही पंचम को दिया.

कवि प्रदीप की लिखी चार लाइनों को राजेंद्र कृष्ण ने बढ़ाया और अदभुत बढ़ाया. ऊपर से भोले, विद्यापति और मास्टर पिल्लई बने सुनील दत्त, किशोर कुमार और महमूद का लोटपोट कर देने वाला अंदाज. वैसे यह इकलौता गाना नहीं था जो किशोर कुमार ने अपने बड़े भाई से छीन लिया हो.

बचपन में लोग किशोर कुमार को बेसुरा मानते था. घर में म्यूजिक टीचर सिखाने आते थे. उन्होंने भी आभास कुमार गांगुली (किशोर कुमार) को संगीत सीखने लायक नहीं समझा था.

बाद में मास्टर साहब ने कितना अफसोस किया होगा वह तो वही जानें. मगर किशोर को यह बात बहुत बुरी लगी. इसी बीच उनके गले में एक जख्म भी हो गया जिससे उनका बोलना कई दिनों तक बंद रहा.

इधर अशोक कुमार ने जीवन नैया के लिए गाना गया. गाने के बोल थे, ‘कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा, हम किसी के न रहे, कोई हमारा न रहा.’ यह गाना शास्त्रीय संगीत की मुश्किल ताल ‘आड़ा चौताला’ में था.

अशोक कुमार खुद ही सुनाते थे कि किशोर ने उनसे कहा कि यह गाना एक दिन वो गाएंगे और ऐसा गाएंगे कि लोग अशोक कुमार वाले को भूल जाएंगे.

अशोक कुमार ने कहा मगर गाना आड़ा चौताला में है और बिना शास्त्रीय संगीत सीखे तो इसे गाना बहुत मुश्किल है.

किशोर का जबाब था वो यह सब कुछ नहीं जानते. इसके बाद किशोर दा ने यह गाना गाया और ऐसा गाया कि सच में उनके वर्जन को ही लोग आज याद रखे हुए हैं.

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