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रविशंकर के भाई से कहीं ज्यादा बड़ी है पंडित उदय शंकर की पहचान

फ्रेंच डांसर सिमोन बारबिए के साथ पंडित उदय शंकर की जोड़ी को पूरी दुनिया में कमाल की सराहना मिली

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh Updated On: Dec 08, 2017 08:28 AM IST

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रविशंकर के भाई से कहीं ज्यादा बड़ी है पंडित उदय शंकर की पहचान

सत्तर के दशक की बात है. शिकागो की एक बड़ी शिक्षाविद् डॉक्टर जोन एल. अर्डमैन भारतीय कलाओं पर शोध करना चाहती थीं. उनके शोध का विषय था राजस्थान की कलाएं और कलाकार. जैसा कि आम तौर पर होता है उन्होंने अपने शोध की शुरुआत से पहले कुछ लोगों से मिलना-जुलना तय किया.

एक रोज उनकी मुलाकात उदयपुर में भारतीय लोक कला मंडल की नींव रखने वाले देवीलाल समर से हुई. देवीलाल समर को राजस्थान की लोक-कलाओं की अच्छी जानकारी थी. दिलचस्प बात ये थी कि उनके परिवार में दूर-दूर तक किसी का कला से लेना देना नहीं था. सब के सब बिजनेसमैन, लेकिन देवीलाल समर ने कलाओं पर काफी काम किया था.

डॉक्टर जोन एल. अर्डमैन जब उनका इंटरव्यू कर रही थीं तो उन्होंने जिज्ञासावश ये सवाल पूछ ही दिया कि जब घर में सभी बिजनेसमैन हैं तो आप कला की दुनिया में कैसे आ गए? इस सवाल के जवाब में देवीलाल समर ने बताया कि उन्होंने 16-17 साल की उम्र से संगीत की शिक्षा शुरू की थी. इसी दौरान वो अल्मोड़ा गए. वहां उनकी मुलाकात ‘दादा’ से हुई. ‘दादा’ ने कुछ ही मुलाकातों के बाद देवीलाल समर को कहाकि वो कुछ ‘क्रिएटिव’ काम करें.

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जिसका नतीजा उन्होंने भारतीय लोक कला मंडल की शुरुआत कर दी. इस किस्से को यहां तक पढ़ने के बाद आपके दिमाग में तुरंत वही सवाल आया होगा जो डॉक्टर जोन एल. अर्डमैन के दिमाग में आया था, वो स्वाभाविक भी है कि आखिर ‘दादा’ कौन हैं? इस सवाल का जवाब दें इससे पहले ये वीडियो देखिए. आपको थोड़ा अंदाजा लगेगा.

इस सवाल का जवाब है- पंडित उदय शंकर. ये सिर्फ दुर्भाग्य ही है कि हिंदुस्तान में लोग उन्हें सितार सम्राट भारत रत्न पंडित रविशंकर के बड़े भाई के तौर पर जानते हैं. वरना पंडित उदय शंकर का भारतीय कलाओं खास तौर पर डांस को लेकर जो योगदान है वो आशाओं से परे है. उनके बारे में ज्यादा जानकारी का ना होना शायद वक्त की बेरूखी है.

सच्चाई ये है कि पंडित रविशंकर ने बतौर सितार वादक विश्व पटल पर जो नाम कमाया उसके पीछे भी पंडित उदय शंकर का बड़ा रोल है. विदेशों में पंडित रविशंकर को जो शुरुआती कार्यक्रम मिले उनके पीछे पंडित उदय शंकर का ही हाथ था. यहां तक कि पंडित रविशंकर ने अपने भाई के कार्यक्रमों में नृत्य भी किया है, ये अलग बात है कि उन्हें नृत्य करने से सख्त परेशानी थी.

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खैर, आप जरा सोच कर देखिए दुनिया भर के सर्च इंजन में पंडित उदय शंकर के बारे में खोजिए जो पहली बात उनके बारे में पता चलती है वो यह कि वो आधुनिक नृत्य के अगुवा रहे.

उन्होंने भारतीय नृत्य को देश के बाहर ले जाकर पहचान दिलाई. भारतीय नृत्य को उन नृत्यों के समकक्ष लाकर खड़ा किया जिनका बोलबाला था. ये सब कुछ तब जब उनके पास स्वयं नृत्य की कोई विधिवत शिक्षा नहीं थी. ये बात और हैरान करती है कि 1971 में ही उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से नवाजा गया था. उसके बाद भी कला की दुनिया के बाहर आम लोगों में उनका उस तरह से नाम नहीं हुआ जिसके वो हकदार थे. बहुत से लोगों को पता तक नहीं था कि वो यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भारतीय डांस को लेकर जाने वाले पहले भारतीय कलाकार थे.

लोगों को ये भी समझ नहीं थी कि विदेशी कलाकारों में पंडित उदय शंकर को लेकर कितना ‘क्रेज’ है. डॉक्टर जोन एल. अर्डमैन को जब पंडित उदय शंकर की उपलब्धियों के बारे में पता चला तो उन्होंने बाकायदा उन पर रिसर्च पेपर तैयार कर डाला. जिससे उनकी उपयोगिता और योगदान का पता चलता है. कलकत्ता दूरदर्शन पर शंभू मित्रा के साथ पंडित उदय शंकर की ये बातचीत उनकी जिंदगी के कई और पहलुओं पर रोशनी डालती है.

पंडित उदय शंकर का जन्म राजस्थान के उदयपुर के एक बंगाली परिवार में हुआ था. पिता जाने-माने बैरिस्टर थे और झालावाड़ के महाराज के यहां काम करते थे. कामकाज और शिक्षा के उद्देश्य से पिता का अक्सर घर से बाहर आना जाना था. ऐसे में उदय शंकर अपने चाचा के यहां रह कर पढ़े. झालावाड़ के अलावा उत्तर प्रदेश के शहरों में भी उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई. इसी दौरान उन्होंने संगीत की शिक्षा ली. करीब 18 साल की उम्र रही होगी और साल था- 1918 के आस पास. उदय शंकर को पढ़ाई के लिए जेजे स्कूल ऑफ आर्ट भेजा गया.

इसी दौरान पिता ने झालावाड़ के महाराज के यहां नौकरी छोड़ दी और लंदन चले गए. वहां जाकर उन्होंने भारतीय संगीत-नृत्य के कार्यक्रमों का आयोजन करना शुरू किया. दरअसल, इस बीच उदय शंकर के पिता ने एक इंग्लिश महिला से विवाह कर लिया था. खैर, उदय शंकर को इसके बाद रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट में एडमिशन दिला दिया गया. उदय शंकर के लिए टर्निंग प्वाइंट ये भी था कि उन्होंने इतनी कम उम्र में हिंदुस्तान छोड़ दिया. वहां पढाई के साथ साथ वो अपने पिता के आयोजित कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेने लगे.

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एक ऐसे ही कार्यक्रम में विश्वविख्यात बैले डांसर एना पैवलौवा मौजूद थीं और उन्होंने उदय शंकर का डांस देख लिया. इसके बाद पंडित उदय शंकर का एक महान नृतक के तौर पर उदय शुरू हुआ. इसके बाद तो पेरिस, न्यूयॉर्क और लंदन में पंडित उदय शंकर का डांस देखने वालों की भीड़ जमा होने लगी. ये अलग बात है कि उनकी ख्याति के साथ साथ ये चर्चा लगातार चलती रही कि उन्होंने कभी परंपरागत तरीके से डांस तो सीखा ही नहीं है.

प्रसंगवश ये भी बताते चलें कि जोहरा सहगल भी पंडित उदय शंकर के डांस ट्रूप की एक सदस्य थीं. इसके अलावा विश्वविख्यात नृत्यांगना बाला सरस्वती ने भी पंडित उदय शंकर के साथ ट्रूप में नृत्य किया था. फ्रेंच डांसर सिमोन बारबिए के साथ पंडित उदय शंकर की जोड़ी को पूरी दुनिया में कमाल की सराहना मिली.

इस दुर्लभ वीडियो को देखिए इसमें पंडित रविशंकर सिमोन का जिक्र कर रहे हैं. इस वीडियो में पंडित रविशंकर का परिवार पंडित उदय शंकर का डांस देख रहा है और बीच-बीच में पंडित रविशंकर पुरानी यादों को ताजा कर रहे हैं. इस वीडियो में आपको अनुष्का शंकर भी दिखाई देंगी.

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