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बापू की पुण्यतिथि पर नुक्कड़ नाटक से सिखाया गया बच्चों को स्वच्छता का पाठ

नुक्कड़ नाटक के जरिए स्कूली बच्चों को ये संदेश दिया गया कि वो किस तरह अपने आप पास सफाई रख सकते हैं

FP Staff Updated On: Jan 30, 2018 08:29 PM IST

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बापू की पुण्यतिथि पर नुक्कड़ नाटक से सिखाया गया बच्चों को स्वच्छता का पाठ

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर केंद्रीय विद्यालय के बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया गया. रागगीरी और संस्कृति मंत्रालय की संस्था इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के इस साझा आयोजन में स्कूली बच्चों ने समाज को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया.

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए मौन भी रखा गया. इसके बाद नुक्कड़ नाटक के जरिए स्कूली बच्चों को ये संदेश दिया गया कि वो किस तरह अपने आप पास सफाई रख सकते हैं. उन्हें कूड़े के सही निस्तारण की जानकारी भी दी गई. जिससे वो गीले कूड़े, हानिकारक कूड़े को सही तरीके से फेंके. रागगीरी की नुक्कड़ मंडली ने स्कूली बच्चों को ये संदेश दिया कि अगर हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझ ले तो गंदगी से दूर रहा जा सकता है. स्कूली बच्चों ने नुक्कड़ नाटक का पूरा मजा उठाया और साथ साथ जरूरी सीख भी ली.

‘सुनेंगे तभी तो सीखेंगे’ श्रृंखला में केंद्रीय विद्यालय के बच्चों को शास्त्रीय संगीत और भारतीय रंगमंच की बारीकियों से भी रूबरू कराया गया. स्कूली बच्चों को शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखाने के लिए किराना घराने के युवा कलाकार अमजद अली खान खास तौर पर आए थे. उन्होंने बच्चों को शास्त्रीय गायकी के प्रकार, प्रारंभिक शास्त्रीय राग, ताल आदि की जानकारी दी. उन्होंने बच्चों को समझाया कि अगर वो भी धैर्य के साथ शास्त्रीय संगीत सीखें तो इसकी बारीकियों को सीख सकते हैं.

इसके बाद अगले सेशन में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से आए कलाकार सुंदर छाबड़ा ने बच्चों को रंगमंच के बारे में बताया. उन्होंने भरत मुनि के नाट्यशास्त्र से लेकर रंगमंच की मौजूदा स्थिति से बच्चों को अवगत कराया. उन्होंने बच्चों को रंगमंच की बुनियादी एक्सरसाइज के जरिए टीम बनाने, एकाग्रित रहने, सामंजस्य बनाने का तरीका भी बताया.

कार्यक्रम की शुरूआत में रागगीरी के संस्थापक शिवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इन कार्यशालाओं का मकसद स्कूली बच्चों में अपनी कला और संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा करना है. उन्होंने कहा कि जिस तरह एक पेड़ के सही विकास के लिए उसकी जड़ों को मजबूत रहना जरूरी है वैसे ही बच्चों को अपनी संस्कृति की सही जानकारी होनी चाहिए. कार्यशाला के अंत में केंद्रीय विद्यालय के प्रिंसिपल विजय कुमार ने सभी कलाकारों का धन्यवाद ज्ञापित किया.

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