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मोनू की सीक्रेट डायरी: अगर नाव पर ॐ लिख दूं तो वो नहीं डूबेगी क्या?

प्यारी डायरी, मैं बड़ा नहीं होना चाहता और ये सब बातें समझना भी नहीं चाहता.

Nikhil Sachan Updated On: May 07, 2017 07:47 AM IST

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मोनू की सीक्रेट डायरी: अगर नाव पर ॐ लिख दूं तो वो नहीं डूबेगी क्या?

इससे पहले हमने मोनू की सीक्रेट डायरी का पहला और दूसरा हिस्सा प्रकाशित किया था. यहां इस डायरी का तीसरा हिस्सा दिया जा रहा है.

प्यारी डायरी,

भगवान ने मेरी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया. या शायद चिट्ठी पहुंची ही न हो. लेकिन इसकी क्या वजह हो सकती है? सोनू के कहने पर मैंने चिट्ठी पर पोस्ट-स्टैम्प थूक लगाकर नहीं चिपकाया था. मैंने 2 रूपए के 5 स्टैम्प गोंद लगाकर चिपकाए थे क्योंकि भगवान का घर दूर होता है और थूक लगाने से पाप चढ़ता है.

मेरा दोस्त सोनू कहता है कि डाकिया मुसलमान है. इसलिए उसने एड्रेस पर भगवान का नाम पढ़कर चिट्ठी फाड़ दी होगी. पर वो ऐसा क्यों करेगा? मुझे तो राशिद मामा बड़े भले आदमी लगते हैं. जब पापा उन्हें बख्शीश में 10 रुपए देते हैं तो वो हमेशा हंसकर मना कर देते हैं और 'अच्छा जनाब खुदा हाफिज' कहकर चले जाते हैं.

अगर राशिद मामा चिट्ठी नहीं भेजेंगे तो मुझे दादी से चिठ्ठी भिजवानी पड़ेगी. दादी कहती है कि वो जल्दी ही भगवान के पास चली जाएगी.

सोनू कहता है कि अगर मैं चिट्ठी पर ॐ लिख दूँगा तो मुसलमान डाकिया डर जाएगा और चिट्ठी सही सलामत चली जाएगी. लेकिन इस बात का ध्यान रखना होगा कि वो चिट्ठी पर 786 न लिख दे. ऐसा करने से ॐ और 786 में लड़ाई हो जाएगी फिर क्या पता कौन जीते? 786 बहुत अधिक पावरफुल होता है.

एक आइडिया ये भी है कि मैं 786 का उल्टा 687 लिख दूं. उससे 786 की पावर कैंसिल हो जाएगी और मेरी चिट्ठी बच जाएगी.

मेरी चिट्ठी भगवान तक पहुंचना जरूरी है क्योंकि मैंने उसमें भगवान को लिखा है कि वो जल्दी से तीन चार दिन के लिए बारिश भेज दें क्योंकि मुझे स्कूल जाना एकदम अच्छा नहीं लगता. स्कूल में बस होमवर्क मिलता है. बारिश होने से स्कूल बंद हो जाएगा.

मुझे बारिश इसीलिए बहुत अच्छी लगती है. बारिश होने पर मैं नाव तैराता हूं और उसमें लकड़ी से पकड़कर चींटा बिठा देता हूँ. हाथ से पकड़ने पर चींटा काट खाता है. लेकिन जब नाव डूब जाती है तो मुझे बड़ा दुख होता है. सोनू ने आइडिया दिया है कि अगर मैं नाव पर ॐ लिख दूँगा तो उससे नाव नहीं डूबेगी.

लेकिन मैं सोच रहा हूँ कि अगर चींटा मुसलमान हुआ तो? फिर ॐ काम नहीं करेगा और नाव डूब जाएगी. सोनू कहता है कि वो इतनी ज़ोर से काटता है तो मुसलमान ही होगा. लेकिन मुझे उसकी बात समझ नहीं आती.

प्यारी डायरी, हम लोग हिन्दू मुसलमान क्यों होते हैं? अगर हम लोग सिर्फ आदमी होते तो? अगर ऐसा होता तो मेरी चिट्ठी भी पहुँच जाती, बारिश भी हो जाती और नाव भी नहीं डूबती.

सब कितना आसान हो जाता और मम्मी भी मुझे असलम के साथ खेलने से मना नहीं करती. वो मेरा सबसे बेस्ट फ्रेंड था. मम्मी नहीं समझती कि वो कितना अच्छा लड़का था. लेकिन वो मुसलमान था इसलिए मम्मी मुझे कभी उसके साथ खाना नहीं खाने देती थी. मैंने कितनी बार उसके साथ बिरयानी खाई और मैं मरा भी नहीं.

असलम जब से स्कूल छोड़ कर गया है मुझे स्कूल जाना एकदम अच्छा नहीं लगता. पापा कहते हैं कि मोनू अभी तुम बच्चे हो और जब तुम बड़े हो जाओगे तब तुम्हें ये सब बातें समझ आएगी. प्यारी डायरी, मैं बड़ा नहीं होना चाहता और ये सब बातें समझना भी नहीं चाहता.

अगर बड़े होकर बच्चे अपनी मम्मी और पापा जैसे बन जाते हैं तब तो मैं बिलकुल भी बड़ा नहीं होना चाहता. बड़ों को लगता है कि वो हमसे बहुत समझदार है लेकिन छोटे बच्चे उनसे अधिक समझदार होते हैं. बड़े लोग दिन भर टीवी पर समाचार देखते रहते हैं और समाचार देखने से उनका दिमाग खराब हो जाता है.

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