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लोहड़ी 2017: फसल कटाई और उल्लास का त्योहार

लोहड़ी पौष माह के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद माघ संक्रांति से पहली रात यह पर्व मनाया जाता है.

Updated On: Jan 12, 2017 10:11 PM IST

FP Staff

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लोहड़ी 2017: फसल कटाई और उल्लास का त्योहार

खेतीबाड़ी करने वालों के लिए खुशी का मौका हररोज नहीं होता. इसकी वजह है कि उनके पास खाली समय और खर्च करने के लिए धन फसल कटाई या बुवाई के बाद ही होता है. खासकर फसल के कटाई के बाद ही किसान ठीक से खुशी मना सकता है.

भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने वाले त्योहारों पर नजर डालें तो यह बात साफ दिखती है कि ऐसे त्योहारों का समय फसल कटाई के बाद ही होता है. ऐसे त्योहारों में प्रायः किसी तरह का व्रत करने की आवश्यकता नहीं होती. ये खाने-पीने और नाचने-गाने का मौका होता है.

लोहड़ी भी एक ऐसा ही त्योहार है. यह उत्तर भारत का प्रमुख पर्व है जो पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है.

लोहड़ी पौष माह के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद माघ संक्रांति से पहली रात यह पर्व मनाया जाता है. यह प्राय: 12 या 13 जनवरी को पड़ता है. इस बार लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जा रही है.

लोहड़ी के इर्द-गिर्द ही 14 या 15 जनवरी को भारत के कई राज्यों में मकर संक्रांति या खिचड़ी और तमिलनाडु में पोंगल मनाया जाता है.

लोहड़ी के साथ कई तरह की कथाएं और मान्यताएं भी जुड़ी हैं. इसमें दक्ष, शिव, सती से लेकर कृष्ण से जुड़ी कथाएं शामिल हैं.

भांगड़ा और गिद्दा करने का मौका

लोहड़ी से 20-25 दिन पहले ही बालक एवं बालिकाएं लोहड़ी के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं. संचित सामग्री से चौराहे या मुहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है.

मुहल्ले या गांव भर के लोग अग्नि के चारों ओर आसन जमा लेते हैं. घर और व्यवसाय के कामकाज से निपटकर प्रत्येक परिवार अग्नि की परिक्रमा करता है. रेवड़ी (और कहीं-कहीं मक्की के भुने दाने) अग्नि की भेंट किए जाते हैं.

यही चीजें प्रसाद के रूप में सभी उपस्थित लोगों को बांटी जाती हैं. घर लौटते समय लोहड़ी में से दो चार दहकते कोयले, प्रसाद के रूप में, घर पर लाने की प्रथा भी है.

इस त्योहार के पंजाब में किया जाने वाला नाच भागंडा और गिद्दा काफी मशहूर है. भांगड़ा पुरुष द्वारा किया जाता है तो गिद्दा महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य है.

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