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असहयोग आंदोलन में बिगुल फूंकने वाले आदिवासी आज हैं भूख से बेहाल

झारखंड का आदिवासी समुदाय टाना भगत विश्व का इकलौता और अनोखा समुदाय हैं जिसकी रग-रग में राष्ट्र प्रेम का लहू आज भी दौड़ता है.

Brajesh Roy Updated On: Aug 08, 2017 01:59 PM IST

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असहयोग आंदोलन में बिगुल फूंकने वाले आदिवासी आज हैं भूख से बेहाल

खादी की धोती, खादी का कुर्ता और सिर पर खादी की गांधी टोपी. घर की महिलाएं भी पुरुषों के साथ खादी की सूती साड़ी पहने. इस वेशभूषा के साथ हर दिन अपने घर के आंगन में तिरंगे की पूजा और भारत माता की वंदना. वो भी किसी खास दिन नहीं बल्कि ये खास पूजा वंदना हर दिन. परिवार के सभी सदस्य स्नान करके हर दिन अपने घर के आंगन में लगे तिरंगा झंडे के सामने मौजूद होकर हर दिन अपने राष्ट्र प्रेम की अविरल धारा का प्रवाह जारी रखते हैं.

गांव में यह सब कुछ सिर्फ एक घर में नहीं होता बल्कि राष्ट्र भक्ति का यह अद्धभूत नजारा सुबह सबेरे हर घर के आंगन में दिखाई देता है. भारत माता और अपने देश के लिए ऐसी श्रद्धा और भक्ति रखने वाले ये हैं झारखंड के आदिवासी टाना भगत समुदाय.

भूखे पेट देशभक्ति की मशाल जला रहे हैं टाना भगत

तिरंगे की पूजा और भारत माता की वंदना से अपने दिनचर्या की शुरुआत करने वाले महात्मा गांधी के अनुयायी झाररखंड के आदिवासी टाना भगत पूरी दुनिया में बेमिसाल हैं. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंकने वाला झारखंड का आदिवासी समुदाय टाना भगत विश्व का इकलौता और अनोखा समुदाय हैं जिसकी रग-रग में राष्ट्र प्रेम का लहू आज भी दौड़ता है. .

आज भी हर घर में हर दिन तिरंगे की पूजा और भारत माता की वंदना होती है. बगैर तिरंगे की पूजा और भारत माता की वंदना किए ये समुदाय अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं करता है. देश भक्ति का ऐसा जज्बा शायद ही किसी ने कहीं देखा हो. बावजूद इसके आज भी इन्हें भर पेट भोजन नसीब नहीं होता. इसके पीछे की कहानी बड़ी मार्मिक है.

adivasi pooja

महात्मा गांधी के अनुयायी के तौर पर देश में पहचान रखने वाले आदिवासी टाना भगतों ने 1914 में अपने गुरु जतरा टाना भगत और तुरिया टाना भगत के नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत के साथ जमींदारी प्रथा का विरोध करना शुरू किया था. वर्तमान झारखंड के रांची, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और पलामू हिस्से में रहने वाले आदिवासी टाना भगतों के अहिंसावादी आंदोलन की जानकारी महात्मा गांधी को भी मिली थी. फिर गांधी जी से 1921 में टाना भगतों की मुलाकात हुई इसके बाद यह समुदाय पूरी तरह गांधी के रंग में रंग गया.

गांधी जी के आह्वान पर 1921-1922 में असहयोग आंदोलन में शामिल होकर इन्होंने अंग्रेजों को मालगुजारी देना बंद कर दिया. बदले में अंग्रेजी सरकार ने 786 टाना भगत परिवार की 4500 एकड़ जमीन तत्कालीन रातू महाराजा को निर्देश देकर नीलाम करवा दी थी. तब महात्मा गांधी ने इन आजादी के दीवानों को देश के आजाद होने पर जमीन वापसी का भरोसा दिलाया था.

आजादी के बाद गांधी जी की बातों को मानते हुए भारत सरकार ने तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह के हाथों 125 परिवार को 1000 एकड़ जमीन वापस भी हुई थी. लेकिन उसके बाद से शेष टाना भगत परिवार के लोग केंद्र सरकार से लेकर बिहार सरकार और वर्तमान झारखण्ड सरकार से गुहार लगा कर थक चुके हैं. नीलाम हुई इनकी जमीन आज तक इन्हें वापस नहीं मिल पाई है. आज आदिवासी टाना भगत परिवार की संख्या झारखण्ड में पांच हजार से भी ज्यादा है.

जिस जमीन के मालिक थे आज उसी जमीन पर मजदूरी करते हैं

आदिवासी टाना भगत परिवार से एक विधायक भी अविभाजित बिहार के समय रहा, गंगा टाना भगत. पूर्व कांग्रेसी विधायक गंगा टाना भगत आज भी अपने समुदाय के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं. इसी क्रम में रांची में 25 सितंबर 2012 को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी टाना भगतों ने रांची में मुलाकात की थी. उस समय केंद्र में कांग्रेस यूपीए की सरकार थी. लेकिन मामला फिर भी सिफर ही रहा.

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2014 में झामुमो नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इन्हें सिर्फ भरोसा ही देने का काम किया था. अब ये टाना भगत समुदाय 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पावन मौके पर झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलकर अपनी लंबित जमीन वापसी की मांग करने वाला है.

टाना भगतों की विवशता का आलम आज यह है कि जिस जमीन के ये कभी मालिक थे, आज उसी जमीन पर मजदूरी करते हैं. फिर भी दो जून की रोटी इन्हें नसीब नहीं है. गरीबी और लाचारी आज टाना भगतों की पहचान बन गई है. पलायन और अशिक्षा इनकी किस्मत है. बूढ़ों की जिंदगी खेत में बीत रही है तो जवान टाना भगत पेट की खातिर पलायन को मजबूर हैं. मासूम बच्चे गांव की गलियों में नजर आते हैं. बावजूद इसके राष्ट्र प्रेम और भक्ति से ही आज भी इनकी दिनचर्या की शुरुआत होती है. हर दिन घर के आंगन में सजे तिरंगे की पूजा और भारत माता की वंदना करना नहीं भूलते.

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