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अमेरिका में जब सब सांपों से हारे तो ये तमिल सपेरे बने सहारे

फ्लोरिडा के वन्यजीवों को बचाने की इस लड़ाई में अजगर के खिलाफ मैदान में उतरे हैं उनके पुराने दुश्मन यानी इरुला लोग.

Janaki Lenin Updated On: Jan 27, 2017 02:32 PM IST

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अमेरिका में जब सब सांपों से हारे तो ये तमिल सपेरे बने सहारे

तमिलनाडू के दो सांप पकड़ने वालों ने अमेरिका के फ्लोरिडा में वो कर दिखाया जो कोई तकनीक और आदमी नहीं कर पा रहा था.

दरअसल इंडो चाइना मूल के बर्मीज़ पायथन या अजगर, जो दुनिया के मौजूद सांपों की सबसे बड़ी प्रजातियों में से एक हैं उन्होंने फ्लोरिडा के जंगलों में कहर बरपा रखा है. पढ़िए इन दो सपेरों की कहानी जो इन दिनों फ्लोरिडा में छाई हुई है.

दो इरुला लोग कूद कर नीचे घास भरी ढलान में धंस जाते है. उनके हाथों में एक आठ फुट लंबा बर्मीज अजगर है. गुस्साए-बौखलाए अजगर ने जोर लगाकर पूंछ पकड़े मसी को अपने गंदे बदबूदार और लिसलिसे मल में नहला दिया.

ये इरुला लोग ने जब सांप को एक बोरे में बंदकर के पलटे तो पास खड़े अमेरिकी लोग अपनी नाक दबाए हुए थे लेकिन हर कोई इन दोनों इरुला लोगों से बेहद प्रभावित था.

मसी तमिल में बोला, 'इस मल में सने बिना सांप कहां पकड़ में आता है'. उसने नाटकीय अंदाज में अपनी चुटकी से सांप का मल उठा कर अपने माथे पर लगा लिया.

पायथन का अड्डा

फ्लोरिडा के एवरग्लेड्स में यह मसी और वडीवेल का दूसरा दिन था. इन दो दिनों में उन्होंने पांच अजगर पकड़े हैं.

बर्मीज पायथन दुनिया के सबसे लंबे सांपों में से एक हैं और उनकी लंबाई 20 फुट तक हो सकती है. मूल रूप से दक्षिण पूर्वी एशिया के इंडोचीन इलाके के रहने वाले ये सांप दक्षिणी फ्लोरिडा के नमी वाले विशाल इलाके में फैल गए हैं.

दक्षिणी फ्लोरिडा की गर्म आबोहवा इन्हें जमती है. 1990 के दशक के बीच तक ये पूरे एवरग्लेड्स नेशनल पार्क में फैल गए. जल और वन्यजीव प्रबंधन कर्मचारियों को 2006 में पहली बार पार्क के भीतर इनके घोंसले के बारे में पता चला और 2007 आते-आते उन्होंने लगभग 600 अजगर पकड़ लिए.

किसी को नहीं पता कि फ्लोरिडा में कितने अजगर रहते हैं. ये सांप जमीन पर चलने या आसमान में उड़ने वाले किसी भी जीव को खा सकते हैं, लेकिन वे खबरों में तब आते है जब वे मगरमच्छों से लड़ते लड़ते मर जाते हैं.  या तीन हिरनों को निगल जाते हैं.

ये अजगर विशालकाय मगरमच्छों से भिड़नें से नहीं डरते.

ये अजगर विशालकाय मगरमच्छों से भिड़ने से नहीं डरते.

1999 तक रकून, वर्जीनिया ओपोसम्स और मार्श खरगोशों का रात में सड़क किनारे मरे पड़े दिखना आम बात थी. लेकिन 2003 के बाद सड़क किनारे मारे जाने वाले जीवों में खरगोश शामिल नहीं थे. 2012 में वैज्ञानिकों ने पाया कि पानी के आसपास चारे की तलाश में आने वाले रकून और ओपोसम्स की तादाद 99 प्रतिशत घट गई.

जबकि सफेद पूंछ वाले हिरनों की संख्या में 94 फीसदी और बॉबकैट्स की संख्या में 87 फीसदी की कमी आई. हालात बताते हैं कि इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ ये अजगर हैं. 2015 में वैज्ञानिकों ने मार्श खरगोशों के साथ प्रयोग किया.

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इससे भी यही पता चला कि अजगरों की वजह से ही स्तनपायी जीवों की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है. वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी कई एजेंसियां इन सांपों पर लगाम लगाने के लिए जूझ रही हैं.

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बेहतरीन शिकारी

2009 की बात है कि अपने पुश्तैनी इलाके में सांपों से जुड़ी खबरें पढ़ने के बाद मेरे पति रॉम व्हिटेकर को एक ख्याल आया: क्यों न तमिलनाडु से इरुला आदिवासी लोगों को फ्लोरिडा लाया जाए. ये सांपों के शिकार में माहिर हैं.

इरुला लोग 1975 तक अजगर समेत सभी सांपों को पकड़ते थे और उनकी खाल उतारकर बेचते थे. लेकिन फिर सरकार ने सांपों की खाल के कारोबार पर रोक लगा दी.

रॉम ने घोषणा की कि इरुला लोग ‘दुनिया में सांपों के सबसे अच्छे शिकारी’ हैं क्योंकि वे सांपों को उनके बिलों से खोदकर निकाल लाते हैं. लेकिन क्या एवरग्लेड्स जैसी अनजानी जगह पर भी वे उतने ही कारगर होंगे? वैसे भी इरुला लोगों की एक पीढ़ी ने अपने जिंदगी में कभी सांप का शिकार नहीं किया है.

इसीलिए अमेरिका में इरुला लोगों को लाने का विचार वन्यजीव प्रबंधन एजेंसियों में कम ही लोगों के गले उतर रहा था.

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वैज्ञानिकों ने कई तरीके आजमाए. शिकारी कुत्ते लाए. गर्मी का पता लगाने वाले सेंसरों से लैस ड्रोन उड़ाए. जाल बिछाए और स्थानीय सांप शिकारियों की मदद भी ली.और तो और उन्होंने मादा अजगरों में रेडियो ट्रांसमिटर फिट करके उन्हें खुला छोड़ दिया. प्रजनन के मौसम में, नर अजगरों को मादा की तलाश रहती है और अकसर बहुत सारे नरों को एक ही मादा मिलती है. इन सभी तरीकों से सीमित परिणाम ही मिले.

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इस बीच रॉम फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रांक माज्जोत्ती और एक सरीसृप विशेषज्ञ और लंबे समय से दोस्त जोसेफ़ वासीलेव्स्की के संपर्क में बने रहे. उन्होंने ब्रिटेन की एक फिल्म निर्माण कंपनी आइकन फिल्म्स की मदद से मसी और वडीवेल के पासपोर्ट और अमेरिकी वीजा की व्यवस्था की. लेकिन अमेरिकियों की तरफ से इस बारे में कोई सकारात्मक खबर नहीं आई.

कितने खतरनाक हैं ये अजगर

अगर अजगर पर लगाम नहीं लगाई जाती तो वे किस हद तक फैल जाते?

साल 2008 में वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि ये अजगर उत्तर में वॉशिंगटन डीसी से लेकर पश्चिम में सैन फ्रांसिस्को तक एक तिहाई अमेरिका पर धावा बोल सकते हैं.

दूसरे लोगों ने इस अनुमान को खारिज करते हुए कहा कि अत्यधिक सर्दी अजगर के लिए बड़ी बाधा है.यह बात सही भी है, जनवरी 2010 में बहुत ज्यादा ठंड की वजह से छिछले दलदलों में कई अजगर मरे मिले. अब तक लगभग तीन हजार अजगर हटाए जा चुके हैं.

जैकपॉट

अगस्त 2006 में फ्लोरिडा फिश एंड वाल्डलाइफ कंजरवेशन कमिशन ने प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखी दी. अजगर के मल से मसी के सराबोर होने के एक हफ्ते बाद मसी और वडीवेल के हाथ जैकपॉट लगा.

हम लारगो द्वीप पर क्रोकोडाइल लेक नेशनल वाल्डलाइफ रेफ्यूज में बेकार पड़े नाइक मिसाइल बेस के आसपास घूम रहे थे. एवरग्लेड्स के अन्य इलाकों में शिकार की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे थे.

उस दिन कोई सांप न पकड़ पाने पर जो ने मसी और वडीवेल को दिलासा देते हुए कहा, 'यह अजगर पकड़ने के लिए कोई बहुत अच्छी जगह नहीं है.' लेकिन इन इरुला लोगों ने कंक्रीट के बने बंकर में तारों को ढकने के लिए इस्तेमाल होने वाली एक इलेक्ट्रिक चैनल में एक सांप खोज ही लिया.

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उन्होंने तीन टहनियों को बांध कर एक डंडा बनाया और चैनल में उसे डालकर सांप को ठेलने लगे ताकि वह बाहर आए. यह एक आठ फुट लंबी व्यस्क मादा थी. जब मासी और वाडीवेल लगातार सांप को उकसा रहे थे, तो जाहिर है कि हमारे अमेरिकी दोस्तों का उत्साह भी बढ़ गया था.

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प्रोजेक्ट से जुड़े जीवविज्ञानी एड मैट्सगर थर्ड ने कहा, 'की लार्गो में कभी किसी ने पायथन नहीं ढूंढे और न ही किसी को मिले.' फ्लोरिडा की मुख्य भूमि पर एड ने 2015 में 18 फुट के एक अजगर को लगभग अकेले दम पर पकड़ा था. उनके पास इतना बड़ा बैग नहीं था कि इस सांप को रख सके, इसलिए उन्होंने इसे बड़े प्लास्टिक स्टोरेज कंटेनर में रखा.

जब से मसी और वडीवेल ने यह कारनामा सुना, उन्होंने भी इतना ही बड़ा सांप पकड़ने की ठान ली.

सांपों से भरी सुरंग

मसी ने चाकू ने अंजीर के पेड़ की एक मुड़ी-तुड़ी जड़ को काटा जो एक अन्य बंकर में जाने का रास्ता रोक रही थी. लंबे समय से कभी कोई इस बंकर में नहीं गया था. वडीवेल और मसी ने चरमराए हुए पुराने दरवाजे को खोला और उसमें दाखिल हो गए. बाकी हम सब लोग बाहर ही चटर-पटर कर रहे थे. अन्य लोगों ने कहा कि अब और पायथन मिलने की कोई गुंजाइश नहीं है.

2007 में की लार्गो के लुप्तप्राय वुडरैट का अध्ययन करने वाली एक रिसर्चर ने पाया कि रेडियो कॉलर वाला उसका वुडरैट एक अजगर के अंदर मिला. 2007 में वह पहला अजगर था जो इस द्वीप पर पकड़ा गया. तब से हाइवे पर मरे हुए सांप मिलने लगे. या फिर पिछले साल अगस्त में तटबंध पर किसी अफसर की तरह एक सांप घूमता दिखाई दिया. यही पहला मौका था जब इस द्वीप पर इन सांपों के अंडे सेने का पता चला था.

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ये सांप इस द्वीप पर प्रजनन कर रहे थे लेकिन पार्क के इर्द-गिर्द लगाए गए जाल में कोई अजगर नहीं पकड़ा जाता था और न ही इंटर्न्स को कोई मिलता था. अंधेरे बंकर के भीतर से मसी ने खिलखिलाते हुए कहा, 'मलाप्पामबु'. अजगर.

हम झटपट बंकर के भीतर पहुंचे और एक घनी रोशनी वाली टॉर्च से एक शाफ्ट के अंदर देखा. 18x9 इंच की सुंरग में सांप लपेटे मारे बैठा था. एक इंटर्न दूसरे बंकर से जाकर एक बड़ा सा डंडा लेकर लेकर आया और मसी ने उससे सांप को छेड़ना शुरू किया. वडीवेल सुरंग के दूसरी तरफ गया और उसने वहां खोदना शुरू कर दिया.

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योजना यह थी कि सांप को इतना तंग किया जाए कि वह बाहर आने को मजबूर हो जाए. लेकिन वह टस से मस होने को तैयार नहीं था. रॉम और जो ने सांप को ठेलने की जिम्मेदारी ले ली जबकि मसी खुदाई में वडीवेल की मदद करने लग गया.

मेरा काम दोनों टीमों के बीच तालमेल बनाना था. मैं तमिल का अंग्रेजी में और अंग्रेजी का तमिल में अनुवाद कर रही थी. इरुला के इन लोगों ने कंक्रीट से बनी इस शाफ्ट को तोड़ दिया था और उसमें छिपे सांप को बाहर निकाल लिया. जब हम लोग इसकी फोटो ले रहे थे तो किसी ने बताया कि यह नर सांप उतना बड़ा नहीं है जितना यह उस सुरंग में दिख रहा था. तो क्या वहां कोई और सांप भी था?

मिशन अभी अधूरा था

हम लोग फिर से बंकर की तरफ दौड़े और हमने उसके अंदर झांका. हां, बड़ा वाला अजगर अभी अंदर ही था. सब लोग फिर काम में जुट गए. कुछ ही मिनटों में जो पीछे की तरफ गए और उन्होंने सांप को बाहर खींचा. यह भी नर ही था, लेकिन यह बड़ा सांप नहीं था.

आखिरकार, अंधेरा घिर गया, उन्होंने सांप की पूंछ पकड़ी और छह लोगों ने मिलकर वहां छुपी मादा को बाहर निकाला. वह प्रजनन की प्रक्रिया में दाखिल होने वाली थी और वहां दो नर सांप उसके साथ छिपे हुए थे.

साल 2005 में पार्क प्रशासन ने एक अजगर की तस्वीर जारी की जो की मगरमच्छ को निगलने के कारण मर गया था.

साल 2005 में पार्क प्रशासन ने एक अजगर की तस्वीर जारी की जो की मगरमच्छ को निगलने के कारण मर गया था.

चूंकि एड का वास्ता बड़े बड़े सांपों से पड़ता ही रहता है तो उन्होंने इस तरह की बड़ी मादाओं के लिए एक बड़ा बैग बनवा रखा है. इस अकेली मादा का वजन 75 किलो था और लंबाई 15.65 फुट. इस तरह का सांप एक ही बार में कम से कम दस वुडरैट्स को निगल जाए. की लार्गो के लुप्तप्राय वुडरैट के लिए यह सीधे-सीधे अस्तित्व का सवाल है.

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भारत से गए सांपों के ये शिकारी अब तक 14 दिन में 14 अजगर पकड़ चुके हैं. फ्लोरिडा के वन्यजीवों को बचाने की इस लड़ाई में अजगर के खिलाफ मैदान में उतरे हैं उनके पुराने दुश्मन यानी इरुला लोग.

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