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Happy Janmashtami: ये तस्वीरें भेज अपने रिश्तेदारों को दें जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

हर साल भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी पूरे भारत वर्ष और कुछ अन्य देशों में धूमधाम से मनाई जाती है

Updated On: Aug 14, 2017 11:39 AM IST

FP Staff

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Happy Janmashtami: ये तस्वीरें भेज अपने रिश्तेदारों को दें जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन देश भर में हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है. इस साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 14 अगस्त की शाम में 5 बजकर 40 मिनट से शुरू हो रही है, जो कि 15 अगस्त को दिन में 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी.

इस खास मौके पर अपने रिश्तेदारों और ऑफिस सहयोगियों को ये मैसेज भेज कर दें जन्माष्टमी की शुभकामनाएं.

इस बार जन्माष्टमी 14 आगस्त और 15 अगस्त दोनों दिन मनाई जाएगी

इस बार जन्माष्टमी 14 आगस्त और 15 अगस्त दोनों दिन मनाई जाएगी

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14 अगस्‍त्‍ा की शाम 7: 48 बजे अष्टमी तिथि लग जाएगी, जो मंगलवार शाम 5:42 बजे तक रहेगी

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था

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श्रीकृष्ण के जन्म और उनके संपूर्ण व्यक्तित्व को यदि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिपेक्ष्य में देखा जाए तो उनका हरेक पक्ष लोकमानस के लिए परम कल्याणकारी साबित होता है

कृष्ण की बाल-लीला और रासलीला जग प्रसिद्ध हैं. कृष्ण ने समुद्र के बीच द्वारिकापुरी बसाई और द्वारिकाधीश के रूप में समस्त प्रेमी भक्तों के हृदय पर राज किया.

कृष्ण की बाल-लीला और रासलीला जग प्रसिद्ध हैं. कृष्ण ने समुद्र के बीच द्वारिकापुरी बसाई और द्वारिकाधीश के रूप में समस्त प्रेमी भक्तों के हृदय पर राज किया.

श्रीकृष्ण का समाज सुधारक रूप भी अभिभूत करता है. उन्होंने ऊंच-नीच की भावना को खत्म किया. शोषित स्त्रियों का कल्याण किया. माना जाता है कि श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं

श्रीकृष्ण का समाज सुधारक रूप भी अभिभूत करता है. उन्होंने ऊंच-नीच की भावना को खत्म किया. शोषित स्त्रियों का कल्याण किया. माना जाता है कि श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं

कृष्ण ने अपनी अत्यंत प्यारी गोपियों को शारीरिक रूप से सदा के लिए छोड़कर यह सिद्घ कर दिया कि उनका प्रेम शारीरिक या मानसिक स्तर पर न होकर आत्मिक रूप से था

कृष्ण ने अपनी अत्यंत प्यारी गोपियों को शारीरिक रूप से सदा के लिए छोड़कर यह सिद्घ कर दिया कि उनका प्रेम शारीरिक या मानसिक स्तर पर न होकर आत्मिक रूप से था

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