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योगी जी... एक चुटकी मुहब्बत की कीमत तुम क्या जानो

‘इत्ता तो आजम खां की भैं ढूंने में भी पुलिस नई लग्गे थी जित्ता मनुओं (मजनुओं) को पकड़ रई है योई पुलिस.’

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Mar 23, 2017 02:27 PM IST

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योगी जी... एक चुटकी मुहब्बत की कीमत तुम क्या जानो

जिसने 22 साल की उम्र में संन्यास ले लिया हो और मोह-माया से मुक्त हो चुका हो वो इश्क की दास्तान क्या समझेगा प्यारे. सबकी अपनी अपनी जुबान है लेकिन उसकी एक ही जुबान है प्यारे. सीएम बनते ही जो कमिटमेंट योगी ने खुद से कर दिया उसके बाद अब वो खुद की भी नहीं सुन सकते. तभी उनके एंटी रोमियो स्क्वॉड का हल्ला बोल जारी है.

गली से लेकर कूचों तक, स्कूल-कॉलेज से लेकर मोहल्लों तक, एंटी रोमियो स्कवॉड जी जान से जुटा है मनचलों की मरम्मत करने में. लेकिन शामत उनकी भी आ गई है जो ‘मुहब्बतियन’ हैं. ये एकतरफा प्यार के मारे भी हो सकते हैं या टू वे लवबर्ड्स भी. इनके मिलने की जगह अमूमन पार्क या फिर सूखे दरख्तों के नीचे कतरों में छांव तलाशती हुआ करती थी लेकिन कमबख्त एंटी रोमियो स्क्वॉड का परिंदा हर शाख पे मौजूद है. जाएं तो जाएं कहां.

अब याद आ रहा है वो पुराना शेर जिसे कभी समझने की जरूरत नहीं समझी. इश्क नहीं आसां...आग का दरिया है....बस डूब के जाना है....इतना समझ लीजिए.... लेकिन सवाल ये है कि डूब के भी जाएं तो जाएं कहां....हर तरफ एंटी रोमियो स्क्वॉड है.

‘इत्ता तो आजम खां की भैं ढूंने में भी पुलिस नई लग्गे थी जित्ता मनुओं (मजनुओं) को पकड़ रई है योई पुलिस.’

पहले तो सिर्फ साल में एक दिन वैलेंटाइन डे पर बजरंगदल और शिवसेना का टेंशन होता था और बाकी दिन घरवालों की फिक्र होती थी लेकिन अब तो सातों दिन, चारों पहर, चौबीसों घंटों पुलिस का पहरा ऐसा पड़ा कि जवानी के सपनों में आग लग सी गई है.

Love Girl heart

गर्ल्स स्कूल-कॉलेज के सामने अगर कोई युवक पकड़ा जाए तो एंटी रोमियो स्क्वॉड का पहला सवाल यही होता है ‘यहां क्या कर रहा है? यहां से क्यों गुज़र रहा है?’ हद तो तब हो जाती है कि जवाब सुनने से पहले ही दारोगा जी कान के नीचे दो लगा कर पुलिसिया वैन में ठुंसवा देते हैं. कई जगहों पर टीवी के कैमरों के सामने उठक-बैठक कराई जा रही है.

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कई ऐसे लोग आलू-प्याज के भाव पिटने को मजबूर हैं जिन्हें कभी किसी को छेड़ा भी नहीं लेकिन मनचलों की चक्की में वो भी गेहूं के घुन की तरह पिस गए. क्योंकि वो भीड़ में तमाशा देख रहे थे या फिर गलती से स्कूल-कॉलेज के सामने से गुजर रहे थे.

इधर योगी जी खुश हैं. बड़ा नाम हो रहा है क्योंकि बड़ा काम हो रहा है. लेकिन इस चक्कर में काम उनका तमाम हो रहा है जिन्होंने साथ जीने-मरने की कसम खाई थी और अब हवालात की हवा खा रहे हैं. क्योंकि उन पर रोमियो का लेबल चस्पा कर दिया गया है. मां-बाप को बुला कर डांट की कड़वी गोली खिला दी गई है.

यूपी पुलिस को भी पांच साल के आराम के बाद योगी सरकार से बड़ा काम मिल गया है. आज़म खान की भैंसे ढूंढने में माहिर यूपी पुलिस अब रोमियों ढूंढने में जुटी हुई है.

कहीं हड़कंप है तो कहीं हाहाकार. योगी के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि योगी सरकार मॉरल पॉलिसिंग कर रही है. जबकि सरकार इससे इनकार कर रही है.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि योगी जी कि एंटी रोमियो स्क्वॉड और बूचड़खानों के शोर पर सरकार विकास की राह और वादे से न भटक जाए.

फिलहाल तो सरकार के इस फैसले ने माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. ऐसा लग रहा है कि योगी जी सारे यूपी को एक साथ ही बदल डालेंगे. ये फैसले भी ऐसे थे जिसमें सरकार का कुछ पैसा लगना भी नहीं था. इसलिए लागू करने में देर नहीं की. कहने को भी रहा कि सत्ता में आते ही वादे पूरा करना शुरु कर दिया.

लेकिन घोषणापत्र में बहुत सारे वादे हैं. किसानों की कर्जमाफी पर ज्यादा देर डरावना सपना भी बन सकता है. वैसे भी चौराहे-चौराहे पिट रहे मजूनं योगी सरकार को दुआ तो नहीं दे रहे होंगे. ये दौर रोमियो ने भी देखा...फरहाद ने भी देखा....मजनूं ने भी देखा और अब आज की ‘मुहब्बतियन’ पीढ़ी भी देख रही है.

लैला कहीं खामोश है अतीत के पन्नों में जो शायद ये सदा दे रही है- 'योगी जी...एक चुटकी मुहब्बत की कीमत तुम क्या जानो जी...'

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