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फ्रॉड और करप्शन में डूबी कई भारतीय कंपनियों को World Bank ने किया बैन

वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट पर काम कर रही भारतीय कंपनियां ऑलिव हेल्थ केयर और जे मोदी को फ्रॉड और करप्शन की वजह से बैन किया गया है

Updated On: Oct 04, 2018 09:33 AM IST

FP Staff

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फ्रॉड और करप्शन में डूबी कई भारतीय कंपनियों को World Bank ने किया बैन

वर्ल्ड बैंक ने दुनिया भर में चल रहे अपने कई प्रोजेक्ट में शामिल कई भारतीय कंपनियों को बैन कर दिया है. वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये कंपनियां धोखाधड़ी और भष्टाचार जैसी गतिविधियों में लिप्त हैं.

बुधवार को वर्ल्ड बैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की. इस रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश में वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट पर काम कर रही भारतीय कंपनियां ऑलिव हेल्थ केयर और जे मोदी को फ्रॉड और करप्शन की वजह से बैन किया गया है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, ऑलिव हेल्थ केयर को 10 साल छह महीने और जे मोदी को सात साल और छह महीनों के लिए बैन किया गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक ने कुल 78 कंपनियों और व्यक्तियों को बैन किया गया है.

वर्ल्ड बैंक ने बताया कि ये बैन इंटिग्रेटी वाइस प्रेसिडेंट (आईएनटी), ऑफिस ऑफ सस्पेंशन एंड डिबारमेंट और सैंक्शन बोर्ड ने पिछले साल की बैंक ग्रुप सैंक्शन सिस्टम की गतिविधियों पर एक रिपोर्ट तैयार की, जिसके मुताबिक ये फैसला लिया गया है.

आईएनटी वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट्स में भ्रष्टाचार रोकने के लिए काम करता है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि आईएनटी के स्टाफ ने 390 प्रोजेक्ट्स का आकलन किया, ताकि इसमें ऐसे खतरों को कम किया जा सके.

ऑलिव हेल्थ केयर और जे मोदी के अलावा कई अन्य भारतीय कंपनियों को भी बैन किया गया है. फैमिली केयर को इन्हीं आरोपों के चलते चार साल के लिए बैन किया गया है. ये कंपनी बैंक के अर्जेंटीना और बांग्लादेश के प्रोजेक्ट में शामिल थी. वहीं इंडिया बेस्ड कंपनी एंजेलीक इंटरनेशनल लिमिटेड को चार साल छह महीनों के लिए बैन किया गया है. ये कंपनी इथोपिया और नेपाल के प्रोजेक्ट में शामिल थी.

विश्व बैंक के भारत के प्रोजेक्ट में शामिल मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड को दो सालों और आर केडी कन्सट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को एक साल छह महीनों के लिए बैन किया गया है.

इस लिस्ट में तत्व ग्लोबल इन्वॉयर्नमेंट प्राइवेट लिमिटेड, SMEC (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और मैक्लोड्स फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड जैसी कंपनियां भी शामिल हैं.

इन 78 कंपनियों के अलावा पांच फर्मों को सशर्त नॉन डिबारमेंट की शर्त के साथ सैंक्शन किया गया गया है. इसका मतलब ये कंपनियां वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट्स में शामिल तो होंगी लेकिन अगर उन्होंने शर्तों को पूरा नहीं किया तो उन्हें बैन कर दिया जाएगा.

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