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RBI एक्ट की धारा 7 क्या है और किन परिस्थितियों में गवर्नर उर्जित पटेल सौंप सकते हैं इस्तीफा?

सूत्रों ने बताया कि सरकार ने कम से कम 3 बार अलग-अलग मुद्दों पर धारा 7 (1) के तहत रिजर्व बैंक को पत्र भेजा है. हालांकि, सरकार ने इस विशेष धारा के तहत रिजर्व बैंक को कोई निर्देश नहीं दिया है बल्कि मुद्दों को सुलझाने के लिए सिर्फ विचार-विमर्श शुरू किया है

Updated On: Oct 31, 2018 09:15 PM IST

FP Staff

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RBI एक्ट की धारा 7 क्या है और किन परिस्थितियों में गवर्नर उर्जित पटेल सौंप सकते हैं इस्तीफा?
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिनियम के तहत धारा 7 इन दिनों सुर्खियों में हैं. इस धारा के तहत सरकार 'जनहित' में आरबीआई को सरकार निर्देश दे सकती है. हालांकि अब तक भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 7 (1), सरकार ने कभी इस्तेमाल नहीं किया है. यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल इस धारा के तहत एक विशिष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाने पर इस्तीफा दे सकते हैं.

सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने आरबीआई के गवर्नर को केंद्रीय बैंक के साथ मतभेदों के समाधान करने की दिशा में पहले कभी इस्तेमाल नहीं की गई शक्ति का हवाला दिया है. इसके अलावा, धारा 7 (2) सरकार को यह शक्ति देता है कि वो भारतीय रिजर्व बैंक को अपने केंद्रीय निदेशक मंडल के तहत चलाए.

इस तरह के किसी भी दिशा के अधीन, बैंक के मामलों और व्यापार की सामान्य अधीक्षण और दिशा को केंद्रीय निदेशक मंडल को सौंपा जाएगा जो सभी शक्तियों का उपयोग कर सकता है और बैंक द्वारा किए जाने वाले सभी कार्यों को कर सकता है.

अरुण जेटली

अरुण जेटली

इस विशेष धारा के तहत सरकार ने RBI को कोई निर्देश नहीं दिया है 

समूचे घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सरकार ने कम से कम 3 बार अलग-अलग मुद्दों पर धारा 7 (1) के तहत रिजर्व बैंक को पत्र भेजा है. हालांकि, सूत्रों ने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस विशेष धारा के तहत रिजर्व बैंक को कोई निर्देश नहीं दिया है बल्कि मुद्दों को सुलझाने के लिए सिर्फ विचार-विमर्श शुरू किया है.

सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने पिछले कुछ सप्ताह में सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों में त्वरित सुधारात्मक कदम (पीसीए) की रूपरेखा से लेकर प्रणाली में नकदी प्रबंधन तक के मुद्दों पर रिजर्व बैंक को 3 अलग पत्र जारी कर धारा 7 के तहत विचार-विमर्श का जिक्र किया है.

सूत्रों ने बताया कि पहले पत्र में बैंकों को पीसीए की रूपरेखा के तहत बिजली कंपनियों के कर्ज मामले में छूट देने, दूसरे पत्र में बाजार में नकदी मुहैया कराने के लिए रिजर्व बैंक के पूंजी भंडार का इस्तेमाल करने और तीसरे पत्र में छोटे और मध्यम उपक्रमों को ऋण देने की शर्तों बैंकों पर दबाव से छूट देने की बातें की गयी है.

(भाषा से इनपुट)

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