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ICICI बैंक-वीडियोकॉन लोन ट्रांजैक्शन, कौन है CBI के निशाने पर?

सीबीआई अपनी जांच में पता लगा रही है कि चंदा कोचर पर वीडियोकॉन को कर्ज देने के लिए किसी ने दबाव डाला था या नहीं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 03, 2018 06:29 PM IST

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ICICI बैंक-वीडियोकॉन लोन ट्रांजैक्शन, कौन है CBI के निशाने पर?

वीडियोकॉन कंपनी के मालिक वेणुगोपाल धूत और आईसीआईसीआई बैंक के बीच लोन ट्रांजैक्शन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इसबीच एक नई खबर ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर चंदा कोचर की मुश्किलें बढ़ा दी है.

खबरों के मुताबिक, चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के भाई से जुड़ी एक और कंपनी ने भी पिछले कुछ सालों में 1.7 करोड़ अरब डॉलर के लोन को रीस्ट्रक्चर करवाया है. ये सभी कंपनियां आईसीआईसीआई बैंक की कर्जदार हैं.

क्या है रीस्ट्रक्चरिंग?

जब कोई कंपनी लोन चुकाना में असमर्थता जताती है तो बैंक पेमेंट के नियमों को आसान बनाते हैं ताकि उनकी पूंजी ना डूबे. इसे रीस्ट्रक्चरिंग कहते हैं. इसके तहत बैंक कई बार कर्जदारों को रियायत देते हैं. इसमें ब्याज दर में कमी, ब्याज लोन से छूट और लोन चुकाने की अवधि में बदलाव जैसे अहम निर्णय शामिल होते हैं.

दीपक कोचर के भाई राजीव कोचर सिंगापुर की एक फाइनेंशियल कंपनी अविस्टा एडवाइजरी के मालिक हैं. अविस्टा बैंक लोन की रीस्ट्रक्चरिंग का ही काम करती है. इस कंपनी को कुछ कंपनियों का लोन रीस्ट्रक्चर करने का जिम्मा मिला था. ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि इस कंपनी को लोन रिस्ट्रक्चर का काम दिलाने में भी चंदा कोचर ने अपने पद का इस्तेमाल किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, एविस्टा एडवाइजरी ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक कंपनी ने जयप्रकाश पावर वेंचर्स, जेएसएल, वीडियोकॉन ग्रुप, जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुजलॉन के डेट रीस्ट्रक्चरिंग में सलाहकार की भूमिका निभाई है.

चंदा कोचर ने लिया बेजा फायदा

गौरतलब है कि आईसीआईसीआई बैंक और वीडियोकॉन ग्रुप के एक निवेशक अरविंद गुप्ता ने पिछले दिनों ही आरोप लगाया था कि आईसीआईसीआई बैंक के सीईओ चंदा कोचर ने वीडियोकॉन को 4 हजार करोड़ रुपए लोन मंजूर करने के बदले गलत तरीके से निजी लाभ लिया है. इस आरोप के सामने आने के बाद ही यह मामला तूल पकड़ रहा है.

बैंकों के जिस कंसोर्शियम या समूह ने वीडियोकॉन को कर्ज देने की अनुशंसा की थी, उसकी अगुवाई एसबीआई कर रहा था. इस समूह में आईसीआईसीआई भी शामिल था.

साल 2012 में इस समूह के सदस्यों ने विडियोकॉन को लगभग 4 हजार करोड़ रुपए देने का कर्ज मंजूर किया. बाद में कुछ लोन बैंकों के लिए नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स की कैटेगरी में चले गए.

क्या चंदा कोचर पर कोई दबाव था?

सीबीआई अपनी जांच में पता लगा रही है कि चंदा कोचर पर वीडियोकॉन को कर्ज देने के लिए किसी ने दबाव डाला था या नहीं. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत और आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को भी सीबीआई पूछताछ के लिए जल्दी बुला सकती है.

सीबीआई ने पिछले सप्ताह ही चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन के मालिक वेणुगोपाल धूत के बीच कथित सांठगांठ की जांच के लिए मामला दर्ज किया था. शुरुआती जांच में चंदा कोचर का नाम नहीं है.

दूसरी तरफ इस मामले में आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड ने लोन देने की प्रक्रिया में किसी को तरजीह देने या मिलीभगत से साफ इनकार किया है. सीबीआई का कहना है कि आईसीआईसीआई बैंक के दूसरे अधिकारियों से पूछताछ कर यह पता लगाया जाएगा कि वीडियोकॉन को किस आधार पर लोन दिया गया.

कौन है चंदा कोचर के बचाव में?

वीडियोकॉन ग्रुप को दिए लोन के मामले में आईसीआईसीआई बैंक के फाउंडिंग चेयरमैन एन वधुल ने चंदा कोचर का बचाव किया है. वधुल ने कहा है कि लेनदेन में चंदा कोचर की भूमिका पर कोई संदेह नहीं है. वीडियोकॉन को दी गई 3 हजार 250 करोड़ रुपए का कर्ज कंसॉलिडेटेड एक्सपोजर है और 2017 तक यह एनपीए नहीं था.

सीबीआई के सख्त रूख के बाद यह तय माना जा रहा है कि चंदा कोचर पर शिकंजा कस सकता है. आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर उस समय बैंक क्रेडिट कमिटी में शामिल थीं, जब विडियोकॉन ग्रुप को 2012 में 3 हजार 250 करोड़ रुपए के लोन की मंजूरी दी गई थी.

वीडियोकॉन समूह को दिए गए लोन में अनियमितता के मामले में सीबीआई ने पिछले सप्ताह ही आईसीआईसीआई बैंक के कुछ अधिकारियों से पूछताछ की थी. सीबीआई इस मामले में अब चंदा कोचर से पूछताछ करने जा रही है. जब्त दस्तावेजों के अध्ययन के बाद सीबीआई को लग रहा है कि लोन की रजामंदी ऊपर से मिली थी. साथ ही यह भी माना जा रहा है कि इसमें नियमों को ताक पर रखा गया था.

आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स के शुरुआती निवेशकों में वीडियोकॉन के मालिक वेणुगोपाल धूत शामिल रहे हैं. बाद में वेणुगोपाल धूत ने इस कंपनी से अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी. लेकिन, वेणुगोपाल धूत की नियत्रंण वाली सहयोगी कंपनियों के रिश्ते 2013 तक दीपक कोचर की प्रभुत्व वाली कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स के साथ बनी रही.

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