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नोटबंदी के लिए याद किए जाएंगे उर्जित पटेल

RBI गवर्नर के तौर पर उर्जित पटेल ही 200 रुपए से लेकर 2000 रुपए तक के नोट पर साइन किया है

Updated On: Dec 10, 2018 07:32 PM IST

FP Staff

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नोटबंदी के लिए याद किए जाएंगे उर्जित पटेल

रिजर्व बैंक के गवर्नर के तौर पर उर्जित पटेल का कार्यकाल काफी खास रहा. पटेल का 3 साल का कार्यकाल अगले साल सितंबर में पूरा होने वाला था लेकिन उन्होंने वक्त से पहले ही अपना पद छोड़ दिया. पटेल ने 4 सितंबर 2016 को कार्यकाल संभाला था. अपने कार्यकाल में उन्होंने कुछ अहम फैसले लिए.

पटेल का कार्यकाल नोटबंदी के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाएगा. 8 नवंबर 2016 को RBI ने 500 और 1000 रुपए का नोट बैन कर दिया था. माना जाता है कि पटेल नोटबंदी पर राजी नहीं थे लेकिन सरकार के आगे उन्हें झुकना पड़ा. इसके बाद ही पटेल और सरकार के बीच मनमुटाव बढ़ने लगा. मनमुटाव की एक और वजह पॉलिसी रेट भी है. सरकार चाहती थी कि आरबीआई पॉलिसी रेट घटाए लेकिन पटेल ऐसा करने से बच रहे थे.

उर्जित पटेल इकलौते ऐसे RBI गवर्नर हैं जिन्होंने 200 रुपए से लेकर 2000 रुपए के नोट पर साइन किया है. ऐसा पहली बार हुआ है 200  और 2000 रुपए का नोट बैंकिंग सिस्टम में आया था.

पटेल ने NPA के खिलाफ सख्त रूख अपनाया है. NPA को लेकर बैंकों का रवैया काफी ढीला ढाला रहा है. बैंक NPA कम करने की कोई खास पहल ना होता देख आरबीआई ने बैंकों को लताड़ लगाई है.

क्या था मतभेद?

RBI की स्वायत्ता को लेकर केंद्र सरकार के साथ आरबीआई गवर्नर का मतभेद बढ़ गया था. असल में RBI के अधिनियम के तहत धारा 7 इन दिनों सुर्खियों में हैं. इस धारा के तहत सरकार 'जनहित' में आरबीआई को सरकार निर्देश दे सकती है. हालांकि अब तक भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 7 (1), सरकार ने कभी इस्तेमाल नहीं किया है.

यह अनुमान पहले से लगाया जा रहा था कि आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल इस धारा के तहत एक विशिष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाने पर इस्तीफा दे सकते हैं. वहीं धारा 7 (2) सरकार को यह शक्ति देता है कि वो भारतीय रिजर्व बैंक को अपने केंद्रीय निदेशक मंडल के तहत चलाए.

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