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बजट 2018: शेयर बाजार के साथ बजट का रिश्ता क्या कहलाता है!

बजट में हुए फैसलों से अगर निवेश घटता है तो शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है

Alok Puranik Alok Puranik Updated On: Jan 28, 2018 04:22 PM IST

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बजट 2018: शेयर बाजार के साथ बजट का रिश्ता क्या कहलाता है!

बजट से पहले तो शेयर बाजार बहुत तेजी से झूमता दिखायी दे रहा है. मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक सेंसेक्स जनवरी खत्म होने से पहले ही करीब 38 फीसदी चढ़ चुका है. उम्मीद थी कि साल के अंत तक सेंसेक्स में 38 फीसदी की तेजी आएगी लेकिन सेंसेक्स ने यह तेजी पहले महीने में ही हासिल कर ली. यह देखने वाली बात है कि अब पूरे साल शेयर बाजार क्या करामात दिखाएगा. इस पर बाजार के एक्सपर्ट की नजर बनी रहेगी.

बजट और शेयर बाजार

बजट के बाद बाजार कैसा रहेगा, यह तो देखने की बात है, पर निवेशकों को यह समझ लेना चाहिए कि हर बजट कॉरपोरेट सेक्टर को सिर्फ देता ही देता नहीं है, कुछ लेने काइंतजाम भी करता है. यानी कॉरपोरेट फ्रेंडली बजट आए, ऐसी उम्मीद करना भी ठीक नहीं है.

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बजट के बाद भी ऐसे ही रिटर्न मिलते रहेंगे ऐसी उम्मीद भी बेकार है. मुचुअल फंडों में रिकॉर्डतोड़ निवेश हो रहा है. आम निवेशक बढ़चढ़कर मुचुअल फंड में निवेश कर रहा है. अभी शेयर में किए गए निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है.

आसान  शब्दों में कहें तो शेयरों को खरीदने के एक साल बाद बेचने पर मुनाफा चाहे जितना हो, उस पर कोई कर नहीं लगता. एक प्रस्ताव यह चल रहा है कि एक साल बाद बेचने से हुए मुनाफे पर भी कर लगे. अगर यह कर लगा तो बाजार में गिरावट के गहरे आसार होंगे. इसलिए शेयर बाजार के निवेशकों को बजट के बाद गिरावट के लिए भी तैयार रहना चाहिए.

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अगर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में बदलाव आते हैं और तो बाजार के गिरने की आशंका सच हो सकती है. बाजार गिरेगा ही, ऐसा नहीं कहा जा रहा है. पर बाजार अब गिरेंगे ही नहीं, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता.

एकतरफा चाल

बाजार की चाल हाल के वक्त में एकतरफा ही रही है. बाजार पर नकारात्मक खबरों का असर काफी हद तक गायब हो चुका है. बाजार ऐसा मान रहा है कि अर्थव्यवस्था की सारी मुश्किलें खत्म हो गई हैं और अब बाजार में सिर्फ तेजी ही आएगी.

बाजार में तेजी आने की तमाम वजहें भी हैं, लेकिन शेयर बाजार के निवेशकों को यह कभी भी नहीं भुलना चाहिए कि बाजार की चाल हमेश उम्मीद से उल्ट होती है. लिहाजा, बजट जैसे महत्वपूर्ण इवेंट के आसपास निवेशकों को तैयारी रखनी चाहिए कि शेयर बाजार कुछ ऐसी चालें दिखा सकता है, जिनकी उम्मीद उससे अभी कोई नहीं कर रहा है.

लगातार तेजी की वजहें

शेयर बाजार सिर्फ इसलिए ऊपर नहीं जा रहा है कि शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों की हालत बहुत सुधर गई है. दरअसल कंपनियों के नेट प्रॉफिट में बहुत ज्यादा उछाल नहीं आया है. वैसे यह जरूर हुआ है कि कुछ कंपनियों के पीछ बहुत पैसा भाग रहा है. यानी बाजार में निवेशकों के बीच इन कंपनियों के शेयरों की मांग बहुत बढ़ गई है.

मोटे तौर पर इसे ऐसा समझा जाए कि एक बस्ती में तीस मकान हैं. पहले इन तीस मकानों के सौ खरीदार बाजार में होते थे, अब दो सौ खरीदार हो गए. मकानों की गुणवत्ता में कोई फर्क ना भी आया हो, तो बढ़ी हुई मांग के चलते दाम बढ़ जाते हैं. सेंसेक्स एक महीने में करीब 38 फीसदी तक बढ़ चुका है. उसकी एक वजह यह भी है. आंकड़े बताते हैं कि म्यूचुअल फंडों में आम निवेशकों ने ज्यादा निवेश करना शुरू कर दिया है.

अप्रैल-दिसंबर, 2016 में म्यूचुअल फंडों की तमाम स्कीमों में 1,26,32,691 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था. अप्रैल-दिसंबर 2017 की अवधि में यह बढ़कर 1,54,12,514 करोड़ हो गया. यानी करीब 22 फीसदी का इजाफा. म्यूचुअल फंडों में आया निवेशकों के पैसे का एक हिस्सा अंतत शेयर बाजारों में ही आएगा. इस पैसे से शेयरों की मांग में इजाफा होना तय है. मांग में इजाफे का एक परिणाम कीमतों में इजाफा है जो देखने में आ रहा है.

बजट से बाहर

उद्योग जगत से जुड़े टैक्स के फैसले बजट से बाहर ही होने वाले हैं. जीएसटी काउंसिल वो सारे फैसले करती है. इस तरह उद्योग जगत की निर्भरता बजट पर काफी हद तक कम हो गई है. हां! बजट यब जरूर तय कर सकता है कि आम आदमी की बचत कितनी होगी.

जाहिर है आयकर की दरों में अगर ऐसे बदलाव होते हैं कि व्यक्तियों के पास सेविंग और निवेश के लिए रकम कम बचती है, तो फिर शेयर बाजार पर उसका असर पड़ेगा. शेयर बाजार में आनेवाली रकम, म्यूचुअल फंडों में आनेवाली रकम में कमी दर्ज हो सकती है. ऐसी सूरत में शेयर बाजार उतना उछलता नहीं रह सकता.

कुल मिलाकर लॉन्ग टर्म के लिए अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो ज्यादा चिंतित ना हों. लेकिन बजट से जुड़ी निवेश योजनाएं बनानेवाले इस बार कुछ सतर्क रहें. बाजार की चाल हमेशा एकतरफा नहीं रहती.

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