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बजट 2018: शेयर खरीदने-बेचने पर देना होगा ज्यादा टैक्स

एक साल के बाद भी शेयर बेचने पर देना पड़ सकता है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा

Updated On: Jan 28, 2018 09:52 PM IST

FP Staff

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बजट 2018: शेयर खरीदने-बेचने पर देना होगा ज्यादा टैक्स
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बजट में एक महीने से भी कम वक्त है. ऐसे में सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कहां टैक्स लगा सकती है और कहां से टैक्स घटा सकती है. शेयर बाजार इन दिनों सकते में है.

ऐसी खबरें आ रही हैं कि फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली एक नया टैक्स लागू करने वाले हैं. यह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स होगा. माना जा रहा है कि शेयर खरीदने वाले को यह टैक्स चुकाना होगा.

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क्या है एलटीसीजी टैक्स?

अगर यह टैक्स लागू होता है तो शेयर से कमाई करने पर पहले से ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा. एक साल के बाद अगर आप शेयर बेचते हैं तो उससे होने वाली कमाई पर यह टैक्स लगेगा. अभी शेयरों पर शॉर्ट टर्म टैक्स लगता है. यानी एक साल से पहले अगर आप शेयर बेचते हैं तो उस पर 15 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है.

एलटीसीजी टैक्स 2009 से ही पास है. लेकिन पहले यूपीए सरकार और मौजूदा एनडीए सरकार इसे लागू करने से बचती रही. इन्हें आशंका थी कि ऐसा करने से निवेश को झटका लग सकता है.

सरकार के लिए मुश्किल होगा सफर

सरकार की माली हालत अभी ठीक नहीं है. नवंबर तक वित्तीय घाटा अपने सालाना टारगेट से आगे बढ़ गया. जीएसटी से होने वाला कलेक्शन भी नवंबर में गिरकर सबसे निचले स्तर पर आ गया.

ऐसे में सरकार अगर एलटीसीजी टैक्स लागू करती है तो सरकारी खजाने को फायदा ही होगा. बीएसई के मुताबिक, एलटीसीजी टैक्स लागू नहीं होने की वजह से सरकार को 49,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

फिलहाल इक्विटी ट्रांजैक्शन को ट्रैक करने के लिए सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) लगाया जाता है. लेकिन एसटीटी कमोडिटी या करेंसी ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होता है. सेबी ने अब कमोडिटी को भी इक्विटी ट्रेडिंग के बराबर लाने का फैसला किया है. इस साल अक्टूबर से ऐसा हो सकता है. अगर कमोडिटी पर भी एलटीसीजी टैक्स लगता है तो सरकारी खजाने को काफी फायदा होगा.

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