live
S M L

बजट 2018-19: पॉपुलिस्ट बजट होने का कोई चांस नहीं

सरकार अगर लॉन्ग टर्म टैक्स लगाती है तो म्यूचुअल बाजार के निवेशकों को झटका लग सकता है

Updated On: Jan 28, 2018 09:40 PM IST

Dhirendra Kumar Dhirendra Kumar

0
बजट 2018-19: पॉपुलिस्ट बजट होने का कोई चांस नहीं

बजट में सरकार पॉपुलिस्ट फैसले लेगी, ऐसे कोई आसार नहीं है. यह सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जो पॉपुलिस्ट नहीं हैं. मुझे नहीं लगता कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे सख्त फैसले लेने वाली सरकार फिलहाल ऐसा कोई फैसला करेगी, जिसका इकनॉमी पर नकारात्मक असर पड़े. सरकार ने अभी तक कोई भी फैसला शॉर्ट टर्म के लिहाज से नहीं लिया है. सरकार  के अभी तक के फैसलों से हमारी अर्थव्यवस्था बेहतर हुई है. सरकार ने जीएसटी का फैसला लिया, जिससे अर्थव्यवस्था में एक गतिरोध आया. लेकिन यह फैसला लॉन्ग टर्म के लिहाज से बेहतर है.

बजट की तमाम खबरों के लिए यहां क्लिक करें 

कोई भी सरकार सिर्फ 3 महीने, छह महीने या 9 महीने के शॉर्ट टर्म के लिए बजट नहीं बनाती है. सरकार का कोई भी फैसला लॉन्ग टर्म में अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा.

निवेशकों को क्या चाहिए?

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री सुचारू रुप से चल रहा है. निवेशकों को फिलहाल इसमें कोई बदलाव की जरूरत नहीं है. फाइनेंस मिनिस्ट्री अगर लॉन्ग टर्म टैक्स लगाती है तो यह म्यूचुअल फंड मार्केट के लिए बहुत बड़ा बदलाव होगा. पिछले साल प्रधानमंत्री ने ऐसा कुछ इशारा किया था जिससे इस बात की आशंका बढ़ गई कि सरकार टैक्स लगाने वाली है. लेकिन अगर यह लॉन्ग टर्म टैक्स लगता भी है तो भी यह निवेशकों के पक्ष में है.

लॉन्ग टर्म के मायने सिर्फ 12 महीने नहीं होते हैं. लॉन्ग टर्म 3 साल, 4 साल या 5 साल होता है. अगर सरकार लॉन्ग टर्म टैक्स लगा देती है तो निवेशकों को बार-बार खरीद बिक्री करने पर नुकसान होगा. ऐसे में निवेशकों के लिए यही सही होगा कि वह लंबे समय के लिए निवेश करके भूल जाए. इससे निवेशकों को सही मायने में लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न हासिल होगा.

निवेशकों को क्या छूट चाहिए?

टैक्स छूट की बात करें तो मेरे हिसाब से यह छूट सिर्फ उन लोगों को मिलनी चाहिए जिनको इसकी जरूरत है. मसलन अगर कोई लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करता है या अपने बच्चों के भविष्य के लिए निवेश करता है तो उसे टैक्स छूट का फायदा मिलना चाहिए. इसके लिए किसी बहुत बड़े ऑपरेशनल बदलाव की जरूरत नहीं है. निवेश के दौरान सिर्फ यह डिक्लेयरेशन लिया जाना चाहिए कि वह निवेश कितने साल के लिए है. अगर कोई यह डिक्लेयर करता है कि 60 साल की उम्र के पहले अपना निवेश नहीं निकालेगा तो उसे टैक्स छूट का फायदा मिलना चाहिए.

इसमें पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी दे सकते हैं. यानी अगर किसी फंड का परफॉर्मेंस अच्छा नहीं है तो उसमें से पैसे निकालकर दूसरे फंड में भी लगा सकते हैं. इसके लिए निवेश से निकलने की भी जरूरत नहीं होगी.

(प्रतिमा शर्मा से बातचीत पर आधारित)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi