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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, एंबे वैली की नीलामी में मदद करे हाईकोर्ट

सहारा समूह ने इससे पहले 24,000 करोड रुपए के मूलधन में से शेष करीब नौ हजार करोड रुपए के भुगतान के लिए 18 महीने का समय देने का अनुरोध किया था

Bhasha Updated On: Nov 23, 2017 07:27 PM IST

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, एंबे वैली की नीलामी में मदद करे हाईकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बंबई हाईकोर्ट के आधिकारिक रिसीवर को गुरुवार को निर्देश दिया कि वह सहारा की एंबे वैली संपत्ति की नीलामी में परिसमापक की मदद करे.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस ए.के सीकरी की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने बंबई हाईकोर्ट के आधिकारिक परिसमापक से भी कहा कि वह इस मामले में रिसीवर की मदद लें और यह सुनिश्चित करें कि एंबे वैली की संपत्तियों की नीलामी हो जाए.

पीठ ने कहा, 'हम चाहते हैं कि संपत्ति की नीलामी हो. उस समय तक, हम बंबई हाईकोर्ट के रिसीवर को नीलामी का काम पूरा होने तक के लिए इसमें मदद के लिए नियुक्त करते हैं.' पीठ ने आधिकारिक परिसमापक को निर्देश दिया कि वह हाईकोर्ट या फिर कंपनी जस्टिस से निर्देश प्राप्त करें. इस आधिकारिक परिसमापक को नीलामी कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

सहारा समूह ने इससे पहले 24,000 करोड रुपए के मूलधन में से शेष करीब नौ हजार करोड रुपए के भुगतान के लिए 18 महीने का समय देने का अनुरोध किया था.

शीर्ष अदालत ने एंबे वैली की नीलामी प्रक्रिया में सहारा समूह द्वारा कथित रूप से अड़ंगा डालने पर 12 अक्तूबर को कडी आपत्ति की थी और उसे चेतावनी दी थी कि जो कोई भी इसमें बाधा डालेगा वह अवमानना की कार्यवाही का हकदार होगा और उसे जेल भेज दिया जाएगा.

शीर्ष अदालत उस समय इस बात से नाराज हो गई जब सेबी ने दावा किया था कि सहारा समूह ने इस संपत्ति के मामले में कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुये पुणे पुलिस को एक पत्र लिखकर नीलामी प्रक्रिया में कथित रूप से बाधा डालने का प्रयास किया है.

समूह के मुखिया सुब्रत रॉय करीब दो साल तक तिहाड जेल में बंद थे और उन्हें पिछले साल छह मई को अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल पर रिहा किया गया था. इसके बाद से उनकी पैरोल की अवधि बढायी जाती रही है.

सुब्रत रॉय के अलावा दो निदेशक रवि शंकर दुबे और अशोक रॉय चौधरी भी समूह की सहारा इंडिया रियल एस्टेट कार्पोरेशन और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कार्प लि के शीर्ष अदालत के 31 अगस्त, 2012 के आदेश पर अमल करने में विफल रहने के कारण जेल भेज दिये गये थे. इन्हें निवेशकों का 24000 करोड रुपए लौटाने के न्यायिक आदेश पर अमल करने में विफल रहने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया था.

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