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चालू खाता घाटा कम करने लिए उठाए जा सकते हैं कुछ और कदम: जेटली

चालू खाते के घाटे यानी कैड से तात्पर्य देश में आने वाली कुल विदेशी मुद्रा के मुकाबले देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा की मात्रा अधिक होना है. इस अंतर को ही चालू खाते का घाटा कहते हैं

Updated On: Mar 30, 2019 06:16 PM IST

Bhasha

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चालू खाता घाटा कम करने लिए उठाए जा सकते हैं कुछ और कदम: जेटली

डॉलर के मुकाबले रुपए में आती तेज गिरावट के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि चालू खाते का घाटा (कैड) कम करने और देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए जल्द ही कुछ और कदम उठाए जा सकते हैं.

जेटली ने यहां ‘हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट’ में कहा कि सरकार ने कैड को सीमित करने के लिए कुछ कदम पहले उठाए हैं, कुछ और कदम उठाए जाने की संभावना है. उन्होंने इस संबंध में सरकार द्वारा हाल में उठाए गए कुछ कदमों की जानकारी भी दी.

जेटली ने कहा कि सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए बाजार उधारी के लक्ष्य में 70 हजार करोड़ रुपए की कमी की है. वहीं पेट्रोलियम पदार्थों का विपणन करने वाले तेल कंपनियों को विदेशों से एक साल में 10 अरब डॉलर तक जुटाने की अनुमति दे दी है.

चालू खाते के घाटे यानी कैड से तात्पर्य देश में आने वाली कुल विदेशी मुद्रा के मुकाबले देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा की मात्रा अधिक होना है. इस अंतर को ही चालू खाते का घाटा कहते हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से देश के चालू खाते घाटे पर असर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हुई 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गई हैं वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से गिरता हुआ 74 रुपए प्रति डॉलर के स्तर को छू गया है. इससे देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह पर दबाव बढ़ गया है.

चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में चालू खाते का घाटा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.4% रहा जो 2017-18 की इसी तिमाही में 2.5% था. मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2018-19 की अप्रैल-जून तिमाही में यह 15.8 अरब डॉलर रहा जबकि एक साल पहले 2017-18 की इसी तिमाही में यह 15 अरब डॉलर रहा था.

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