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जेपी इंफ्रा दिवालिया: 40 हजार बायर्स को EMI रोक देनी चाहिए?

कुछ कानूनी और टैक्‍स एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि होम बायर्स को ईएमआई रोक देनी चाहिए

Updated On: Aug 17, 2017 10:07 AM IST

FP Staff

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जेपी इंफ्रा दिवालिया: 40 हजार बायर्स को EMI रोक देनी चाहिए?

जेपी इंफ्रा के दिवालिया होने के बाद होम बायर्स की परेशानियां पूरी तरह से सतह पर आ गई हैं. दिवालिया हुई कंपनी के एसेट्स की नीलामी प्रक्रिया में बायर्स की स्थिति सबसे कमजोर बताई जा रही है. जेपी इन्‍फ्रा के प्रोजेक्‍ट्स में 40 हजार से अधिक बायर्स फंसे हुए हैं. कुछ बायर्स ने जहां पूरे पैसे दे दिए हैं, वहीं बड़ी संख्‍या में बायर्स 60 से 90 फीसदी तक पैसे चुकाकर बैंक को ईएमआई दे रहे हैं. ऐसे में उनके जेहन में लगातार यह सवाल कौंध रहा है कि क्‍या उन्‍हें ईएमआई बंद कर देनी चाहिए?

ईएमआई बंद करने के पक्ष में ये है दलील

कुछ कानूनी और टैक्‍स एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि होम बायर्स को ईएमआई रोक देनी चाहिए, क्‍योंकि डेवलपर ने अपार्टमेंट देने का वादा पूरा नहीं किया है. जीयस लॉ के सीनियर पार्टनर और को-फाउंडर विवेक कोहली ने बताया कि बैंक, डेवलपर और कस्‍टमर के बीच तीन-पक्षीय समझौता होता है. डेवलपर को फ्लैट देना था, जिसके लिए बैंक ने पैसे दिए थे और बायर्स उसी एवज में ईएमआई चुका रहे थे. अब चूंकि यह सिस्‍टम फेल कर गया है, ऐसे में ईएमआई देने का सवाल कहां उठता है.

कस्‍टमर की स्थिति सबसे खराब

कोहली के अनुसार, बैंक ने जो पैसे डेवलपर को दिए हैं, वह अभी भी सुरक्षित है, क्‍योंकि बैंकों के पास एक एसेट है, जिसे डेवलप किया जाना है. लेकिन कस्‍टमर के पास कुछ नहीं है. उनके पास कोई प्रॉपर्टी टाइटल ट्रांसफर नहीं है, बल्कि महज एक अलॉटमेंट लेटर है. तीनों पक्षों में कस्‍टमर की स्थिति सबसे खराब है, जबकि उसी से लगाातर ईएमआई देने की उम्‍मीद की जा रही है, जो उचित नहीं है.

ईएमआई जारी रखने के पक्ष में ये है दलील

कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि ईएमआई रोकना उचित नहीं है. इससे बायर्स की क्रेडिट रेटिंग खराब होगी और भविष्‍य में उनके लोन लेने की संभावना कमजोर होगी. डेवलपर्स टाउनशिप प्रॉपर्टी ऑनर्स वेल्‍फेयर सोसायटी के प्रेसिडेंट अरविंद जैन ने बताया कि अभी हम पूरी तरह से यह नहीं कह सकते कि बायर्स को फ्लैट मिलेगा ही नहीं.

बैंकों के साथ फिर डील कर सकते होम बायर्स

कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि बायर्स को बैंकों के साथ फिर से डील करनी चाहिए, ताकि उनकी ईएमआई कम हो जाए और लोन की अवधि बढ़ जाए. इससे उन्‍हें फौरी राहत मिलेगी और उन्‍हें कुछ समय भी मिल जाएगा. संभव है कि कुछ महीनों में कोई तीसरी पार्टी इसे डेवलप करके बायर्स को दे दे.

(न्यूज 18 से साभार)

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