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अपनी मातृभाषा में बैंकों में कामकाज की मांग कर रहे हैं दक्षिण भारतीय

भाषा संबंधी इस विवाद ने तब तूल पकड़ा था जब एसबीआई ने कुछ महीने पहले अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यह ट्वीट किया था कि सिर्फ अंग्रेजी या हिंदी में किए अनुरोधों पर कार्रवाई होगी

FP Staff Updated On: May 14, 2018 08:49 PM IST

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अपनी मातृभाषा में बैंकों में कामकाज की मांग कर रहे हैं दक्षिण भारतीय

#Serveinmylanguage यानी हमारी भाषा में सेवा दें नामक कैंपेन सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड कर रहा है. दरअसल यह मांग दक्षिण भारतीय कस्टमर्स की बैंकों से है. भारत में आधिकारिक रूप से 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है लेकिन अधिकतर सरकारी और प्राइवेट बैंक अपने कामकाज अंग्रेजी और हिंदी में करते हैं. चाहे वो एटीएम स्लिप हो, चालान की निकासी हो या कॉल सेंटर्स हों. इससे अंग्रेजी और हिंदी में नहीं जानने वाले लोगों को काफी दिक्कत होती है.

इस वजह से कई संगठन बैंकों से यह मांग कर रहे हैं कि वे अपने बैंकिंग सिस्टम में बदलाव करें. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक लैंग्वेज इक्वलिटी एंड राइट्स, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, बांग्ला-ओ-बंगाली जैसे संगठन और डीएमके जैसी राजनीतिक पार्टियां पिछले कई महीने से बैंकिंग सिस्टम के भाषा-नीति में बदलाव की मांग कर रही हैं. फेसबुक और ट्विटर के माध्यम के लोग दक्षिण भारतीय कस्टमर्स को बैंकों में भाषा की वजह से आने वाली दिक्कतों से संबंधित तस्वीरों और मीम्स को साझा कर रहे हैं. इस कैंपेन में यह भी कहा जा रहा है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं है.

इन हालातों में होती है मुश्किल

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कंफेडरेशन के महासचिव हरविंदर सिंह ने बताया कि यह एक बड़े कामकाजी तबके के लिए तकलीफदेह प्रक्रिया है और इसे बदलने के लिए बैंक तैयार नहीं हैं. भाषा संबंधी मुश्किल उस वक्त सबसे अधिक आती है जब डेबिट कार्ड के चोरी या खो जाने पर उसे ब्लॉक करवाना हो. इसके अलावा फिक्सड डिपॉजिट में नॉमिनी के नाबालिग होने की स्थिति में भी अभिभावक के पते और अन्य जानकारी को भरने में भी भाषा की वजह से हिंदी और अंग्रेजी न जानने वालों को मुश्किल होती है. इसके अलावा ठीक से हिंदी और अंग्रेजी न आने की वजह से दक्षिण भारतीय बैंक कस्टमर्स को ईएमआई के स्ट्रक्चर, लोन की अवधि और इंटरेस्ट रेट आदि को समझने में भी मुश्किल होती है.

पीएनबी और एसबीआई के कस्टमर्स को भाषा संबंधी सबसे अधिक मुश्किल आती है. हालांकि ICICI बैंक, AXIS बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्राइवेट अपने डिजिटल बैंकिंग नीति में बहुभाषा नीति को शामिल कर रहे हैं. एसबीआई में किसी भी शिकायत को दर्ज हिंदी या अंग्रेजी में ही किया जा सकता है लेकिन उसके कॉल सेंटर्स में कस्टमर्स 11 क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी ले सकते हैं.

भाषा संबंधी इस विवाद ने तब तूल पकड़ा था जब एसबीआई ने कुछ महीने पहले अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यह ट्वीट किया था कि सिर्फ अंग्रेजी या हिंदी में किए अनुरोधों पर कार्रवाई होगी.

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