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किस तरह से दमदार वापसी के लिए तैयार हैं सुब्रत रॉय सहारा!

सेबी और सहारा के बीच जारी कोर्ट केसों के चलते कंपनी का विकास मंद पड़ा है और वो कई मोर्चों पर घाटे में चल रही है

Shantanu Guha Ray Updated On: Oct 23, 2017 07:45 PM IST

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किस तरह से दमदार वापसी के लिए तैयार हैं सुब्रत रॉय सहारा!

सहारा समूह के चीफ मैनेजिंग वर्कर सुब्रत रॉय इन दिनों वापसी की तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने अपनी वापसी के लिए खास योजना बनाई है. सूत्रों के मुताबिक, सुब्रत रॉय अब शिक्षा के क्षेत्र में उतरेंगे. हालांकि सहारा के पिछले विवादित उपक्रमों की तरह, इस बार भी उनका फोकस गरीब वर्ग ही होगा.

दरअसल सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी सेबी और सहारा के बीच जारी कोर्ट केसों के चलते कंपनी का विकास मंद पड़ा है, और वो कई मोर्चों पर घाटे में चल रही है. ऐसे हालात में सहारा अब नए क्षेत्र में किस्मत आजमाना चाहती है. इसीलिए उसने अब शिक्षा के क्षेत्र में पैठ बनाने की योजना तैयार की है.

इस दिशा में अपनी योजना पर काम करते हुए, रॉय ने एक खास टीम बनाई है. जिसमें देश के कुछ शीर्ष विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विशेषज्ञों समेत कुछ विदेशी लोगों को भी शामिल किया गया है. इस टीम ने ऑनलाइन शिक्षा के व्यवसाय का मॉडल तैयार किया है. जिसके तहत स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए 14,000 घंटों का संपादित सॉफ्टवेयर बनाया गया है.

सूत्रों के मुताबिक, ऑनलाइन एजुकेशन का ये सॉफ्टवेयर छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले लाखों छात्रों को ध्यान में रख कर बनाया गया है. जिसे सब्सक्राइब करने के लिए बहुत ही कम कीमत अदा करनी होगी.

पूरे दमखम के साथ उतरे हैं सहाराश्री

अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि, सुब्रत रॉय को अपनी योजना पर पूरा भरोसा है. उन्हें लगता है कि, ऑनलाइन शिक्षा का उनका कार्यक्रम न सिर्फ ऑपरेट (संचालित) करने में आसान होगा, बल्कि उससे देश के दूरदराज इलाकों में शिक्षा का स्तर सुधारने और उसे बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी.

केपीएमजी और गूगल के संयुक्त अनुमान के मुताबिक साल 2021 तक भारत की ऑनलाइन एजुकेशन इंडस्ट्री करीब 1.96 अरब डॉलर मूल्य की हो जाएगी. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, साल 2016 में करीब 19 लाख छात्र (पेड यूजर) ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़े थे, साल 2021 तक ये सख्या 1 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है.

फिलहाल भारत का शिक्षा बाजार 25 अरब डॉलर से ज्यादा का है, जिसमें हर साल करीब 22 फीसदी का इजाफा हो रहा है. जबकि ऑनलाइन शिक्षा की बात करें तो, देश में ऑनलाइन शिक्षा का बाजार करीब 2 अरब डॉलर का है.

यह भी पढ़ें: सुब्रत रॉय सहारा मामला: कब-कब क्या हुआ?

सोमवार 15 अक्तूबर, 2017 की सुहावनी सुबह, सुब्रत रॉय अपने निजी जेट से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे. जहां सहारा के हजारों कर्मचारियों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया. इस दौरान कर्मचारियों ने अपना दायां हाथ दिल पर रखकर सुब्रत रॉय को प्राचीन यूनानी तरीके से सेल्यूट भी किया. सहारा इंडिया में ऐसे ही एक-दूसरे का अभिवादन करने की परंपरा है. रायपुर में स्वागत के दौरान सुब्रत रॉय की शान में फूल भी बरसाए गए और नकली तोपों की सलामी भी दी गई.

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तस्वीर: पीटीआई

सुब्रत रॉय की अगवानी के लिए जो लोग एयरपोर्ट नहीं पहुंच सके, उन्होंने सूरज की तपती गर्मी में हाईवे के दोनों ओर खड़े रहकर उनका अभिवादन किया. इस दौरान ज्यादातर लोगों ने अपने हाथों में पोस्टर थाम रखे थे, जिनमें सुब्रत रॉय और सहारा इंडिया की शान में नारे लिखे हुए थे. रास्ते में दो जगहों पर सुब्रत रॉय को मजबूरन अपनी कार से उतरना पड़ा, जहां उन्होंने स्थानीय विधायक और सहारा इंडिया के कर्मचारियों के स्वागत कार्यक्रम में हिस्सा लिया.

सड़क किनारे हुए स्वागत कार्यक्रम में सहारा के एक कर्मचारी अमित कुमार ने माइक पर जोश के साथ कहा, 'हमारे मुखिया का सिर हमेशा ऊंचा रहेगा, उन्होंने दो साल जेल में बिताए, नकदी के रूप में सरकार को बड़ी रकम अदा की, वो दूसरों की तरह नहीं हैं, जो बैंकों का पैसा लेकर लंदन भाग गए.' इतना सुनना था कि वहां मौजूद बाकी लोगों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी, और जोर से चिल्लाकर बोले, 'हम आपके साथ हैं सहाराश्री.'

सहाराश्री को है वापसी की उम्मीद

सुब्रत रॉय ने भीड़ को शांत कराते हुए कहा, 'सहारा आपका सहारा और आशा है, मैं आपको आश्वस्त करने के लिए यहां आया हूं कि, हम जल्द ही वापसी करके अपना पुराना मकाम हासिल करेंगे. हम अभी बुरे दौर से गुजर रहे हैं. वक्त हमारा इम्तेहान ले रहा है. लेकिन हम उम्मीद नहीं छोड़ेंगे. हम दुनिया का वो सबसे बड़ा परिवार हैं, जो एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से बंधा हुआ है.'

सहारा के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि, सुब्रत रॉय अपना आत्मविश्वास फिर से हासिल करने में जुटे हैं. इसके लिए वो 18 शहरों में बैठकें आयोजित कर रहे हैं. रॉय की ये बैठकें देश में लगभग एक महीने तक जारी रहेंगी. रायपुर से पहले वो गुवाहाटी, कोलकाता हैदराबाद और पवित्र शहर तिरुपति में बैठक कर चुके थे.

इसके बाद, वो सहारा के मुख्यालय लखनऊ, नागपुर, अहमदाबाद, जोधपुर, जयपुर, रांची, मुजफ्फरपुर और पटना में बैठक करेंगे. हर शहर में सुब्रत रॉय की बैठक या तो इनडोर स्टेडियम में आयोजित हो रही है, या विशाल पंडालों में. हर बैठक में सहारा के करीब करीब 10,000 कार्यकर्ता और शुभचिंतक शामिल होते हैं.

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रायपुर की बैठक में अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सुब्रत रॉय ने कहा, 'सहारा इंडिया परिवार के 12 लाख से ज्यादा सदस्यों के प्रमुख संरक्षक के रूप में, ये मेरा कर्तव्य है कि, मैं आपकी रुचि और भविष्य की रक्षा एक पिता की तरह करूं. मैं हमेशा आपके साथ हूं. यहां तक कि जेल में रहते हुए मैंने आपके बारे में ही सोचा. मैं हमेशा आपकी भलाई के बारे में सोचता रहा हूं. मैं जेल इसलिए गया क्योंकि मैं एक अभिभावक के तौर पर खुशियों की कीमत चुका रहा था.' सुब्रत रॉय की बात सुनकर वहां मौजूद भीड़ गदगद हो उठी और सारा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से भर गया.

सेबी बनाम सहारा

सहारा इंडिया फिलहाल पूंजी बाजार नियामक सेबी के साथ मुकदमेबाजी में उलझी हुई है. सेबी का आरोप है कि सहारा की दो कंपनियों ने उसकी सहमति के बिना अपना डिपॉजिट वापस ले लिया है. हालांकि सहारा इंडिया ने इस आरोप का खंडन किया है. अपनी सफाई में सहारा इंडिया ने दलील दी है कि, उसने इस मामले में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से मंजूरी ली है, जो कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आता है, और सेबी उसकी नियामक नहीं है. सहारा पर सेबी को 14,000 करोड़ रुपए से ज्यादा अदा करने का दबाव है. ब्याज मिलाकर अब ये रकम 19000 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है.

लेकिन सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि, सहारा को अब ज्यादा भुगतान करना होगा. सेबी के मुताबिक भुगतान की रकम 24,000 करोड़ रुपए से ज्यादा होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2012 में सहारा इंडिया को निवेशकों की रकम सेबी के जरिये वापस लौटाने का आदेश दिया था. लेकिन कोर्ट केस लंबा खींचने और ब्याज बढ़ने की वजह से अब ये राशि बढ़कर बहुत ज्यादा हो चुकी है.

वहीं सहारा इंडिया समूह का दावा है कि भुगतान करने के लिए उसके पास पैसे ही नहीं हैं. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की एंबे वैली सिटी को नीलाम करने के आदेश दिए, ताकि निवेशकों की रकम लौटाई जा सके. मुंबई के बाहरी इलाके में 10,600 एकड़ से ज्यादा में फैली एंबे वैली टाउनशिप की कीमत करीब 39,000 करोड़ रुपए आंकी गई है.

सहारा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, सुब्रत रॉय अपनी संपत्ति को बेचने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें एंबे वैली का कोई खरीदार ही नहीं मिल रहा है, क्योंकि देश में इनदिनों रियल स्टेट मार्केट अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त आधिकारिक लिक्वीडेटर (परिसमापक) ने एंबे वैली की नीलामी को लेकर देश के लगभग सभी राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन भी दिए, इसके बावजूद केवल दो ही लोगों ने नीलामी में रुचि दिखाई, और केवाईसी फार्म को डाउनलोड किया.

सेबी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि, एंबे वैली की नीलामी में रुचि दिखाने वाली दोनों पार्टियां केवाईसी फार्म डाउनलोड करने के बाद से शांत होकर बैठी हैं, नीलामी की आगे की प्रक्रिया के लिए उन्होंने कोई और पेशकदमी नहीं की है.

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(फोटो: रॉयटर्स)

एविएशन इंडस्ट्री में फिर अजमा सकते हैं दांव

सहारा समूह के अच्छे जानकारी एक शख्स का कहना है कि, 'सुब्रत रॉय शिक्षा के अलावा कुछ और नई योजनाओं को अंतिम रुप देने में लगे हुए हैं. इसमें अस्पतालों का निर्माण और गरीबों के लिए कम लागत वाले आवास बनाने की योजनाएं भी शामिल हैं. सस्ते आवास की योजना पर जोरशोर से काम चल रहा है क्योंकि पूरे भारत में इसकी बहुत ज्यादा मांग है.'

सेबी से मुकदमेबाजी के चलते सहारा को भले ही अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा बेचना पड़े, लेकिन उससे उसपर खास असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सहारा के पास देश की महत्वपूर्ण जगहों पर अनगिनत बेशकीमती जमीनें हैं.

सुब्रत रॉय ने एविएशन (विमानन) में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई है. एविएशन इंडस्ट्री के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि, रॉय अपने सभी निजी विमान और उनके लाइसेंस सहारा एयरलाइंस को सौंप सकते हैं, क्योंकि अब वो अपने निजी इस्तेमाल में आने वाले विमानों की संख्या और नहीं बढ़ाना चाहते.

जेट एयरवेज के साथ सहारा का (नॉन कंपीट एग्रीमेंट) गैर-प्रतिस्पर्धा समझौता अक्टूबर 2018 में समाप्त हो रहा है. ऐसे में पर्याप्त संकेत हैं कि रॉय ने कुछ गंभीर योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया होगा, और वो नामी एयरलाइंस के पूर्व विशेषज्ञों से सलाह ले रहे होंगे.

मीडिया पर भी करेंगे फोकस

सहारा इंडिया ने एक बार फिर से मीडिया पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया है. इसके लिए उसने अपने समाचार चैनल के पूर्व प्रमुख पर भरोसा जताया है, और उनकी चैनल में वापसी हुई है. उन्हें चैनल के कंटेंट में सुधार और हिंदी बैल्ट में चैनल के प्रचार-प्रसार पर फोकस करने को कहा गया है.

सहारा के इस कदम को सत्तारूढ़ एनडीए सरकार के साल 2018 तक आगे बढ़ने के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. लिहाजा रॉय अपनी मीडिया कंपनी को चमकाने में लगे हैं, इसके लिए कुछ अनुभवी संपादकों और एंकरों की नियुक्ति की गई.

सहारा के अंदरूनी सूत्र ने मुस्कुराते हुए बताया कि, 'वो (सुब्रत रॉय) जबरदस्त वापसी को तैयार हैं.'

रायपुर में अपने प्रबंधकों के साथ बैठक में रॉय ने उम्मीद जताई कि, कंपनी पर छाया संकट जल्द खत्म होगा और सभी समस्याओं का हल निकाल लिया जाएगा. उन्होंने कहा, 'मैं अपने देश से प्यार करता हूं, और संकट को हल करने के लिए यहां आया हूं. एक भारतीय के तौर पर मैं गर्व करता हूं.' कहना गलत नहीं होगा कि अब रॉय का गेम प्लान भी राष्ट्रवाद को भुनाने का है, जैसा कि देश के लगभग सभी मीडिया समूहों कर रहे हैं. यानी राष्ट्रवाद का सहारा लेकर अब रॉय अपनी योजनाओं को अमली जामा पहनाना चाहते हैं, सहारा इंडिया की खोई प्रतिष्ठा को दोबारा हासिल कर सकें.

सुलझाने होंगे सारे विवाद

हालांकि, सबसे पहले रॉय को सेबी के साथ अपने सभी विवाद सुलझाने होंगे. बुजुर्ग उद्योगपति सुब्रत रॉय इन दिनों हर किसी को सफाई देते नजर आ रहे हैं, ताकि लोग उनका पक्ष भी जान सकें. तिहाड़ जेल में रहते हुए उन्होंने कड़ी मेहनत से किताबें लिखीं. जिनमें से एक किताब मानव मूल्यों पर आधारित है, वहीं दूसरी किताब उन समस्याओं पर है जिससे आजकल देश जूझ रहा है. इस किताब में रॉय ने उन समस्याओं के विस्तृत समाधान भी सुझाए हैं.

वहीं इन दिनों सहारा इंडिया ने एक विज्ञापन अभियान भी जोरशोर से चला रखा है. जिसे परिणीता फेम फिल्मकार प्रदीप सरकार ने निर्देशित किया है. इस विज्ञापन को बहुत बड़े स्तर पर फिल्माया गया है, जिसमें डोल-मंजीरे बज रहे हैं, महिलाएं और पुरुष वकीलों के जैसे काले-सफेद कपड़े पहने फ्लाईओवर्स पर दौड़ते-भागते नजर आ रहे हैं. इस विज्ञापन के अंत में सुब्रत रॉय को भी दिखाया गया है.

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एंबी वैली का एक नजारा

दिलचस्प बात यह है कि, एक सवाल का जवाब अबतक लोगों को नहीं मिल पाया है कि, सहारा इंडिया अपने निवेशकों का पैसा कब लौटाएगा. अगर इस सवाल का जवाब वक्त पर नहीं मिला तो सेबी और सहारा के बीच कानूनी जंग और भी ज्यादा जटिल हो जाएगी. सहारा को जो रकम लौटानी है वो थोड़ी बहुत नहीं बल्कि 19000 करोड़ रुपए से ज्यादा है, वहीं ब्याज जोड़ने पर रकम का ये आंकड़ा और भी ज्यादा हो जाता है.

कहानी का दूसरा पहलू भी समान रूप से दिलचस्प है, सेबी कई बार ये दावा कर चुका है कि सहारा अपने निवेशकों का भुगतान नहीं कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद सेबी पिछले पांच सालों में 64 करोड़ रुपए उन लोगों को बांट चुका है, जिन्होंने खुद को सहारा का निवेशक होने का दावा किया था. बाजार नियामक सेबी के लिए ये अच्छी खबर नहीं है.

सेबी का मूल उद्देश्य निवेशकों के हितों की रक्षा करना है. उसके पास सहारा और निवेशकों के विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी है. लेकिन अपनी गतिविधियों से अब वो खुद विवादों में उलझ रही है. दिलचस्प बात ये है कि सेबी ने सहारा की जिन दो कंपनियों पर रोक लगा रखी है, उन दोनों कंपनियों के 3 करोड़ से ज्यादा निवेशकों से अबतक सेबी से कोई शिकायत नहीं की है.

लंबी चलेगी कानूनी लड़ाई

लेकिन सेबी अपनी बात पर अड़ी हुई है, उसका कहना है कि सहारा पहले बकाया रकम का भुगतान करे, उसके बाद किसी मुद्दे पर बहस करे. सेबी के एक प्रवक्ता ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि, सेबी ने अपनी सभी चिंताएं सहारा और सुप्रीम कोर्ट के सामने रख दी हैं. वहीं सेबी के प्रवक्ता ने सहारा के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की सच्चाई से संबंधित मामले पर वो कुछ नहीं बोल सकते क्योंकि फिलहाल ये मामला कोर्ट में है.

सहारा वकीलों ने बार-बार अदालत में दलील दी है कि, सेबी को इस बात का जवाब देना चाहिए कि उसने अबतक सहारा के लाखों निवेशकों को पैसे क्यों नहीं बांटे, जबकि सहारा काफी रकम सेबी के पास जमा करा चुका है. सहारा का दावा है कि, वो 1 9,000 करोड़ रुपए का भुगतान पहले ही कर चुका है. यहां तक कि उसे अपने 95 फीसदी ओएफडीआई निवेशकों का पैसा दोबारा चुकाना पड़ा. यानी सहारा ने एक बकाया रकम के लिए दो-दो बार भुगतान किया.

सहारा ने पुनर्भुगतान को साबित करने के लिए ट्रक भरकर जो दस्तावेज भेजे हैं, उन्हें रखने के लिए सेबी को एक गोदाम किराए पर लेना पड़ा है. सेबी के वकील अरविंद दत्तार ने कहा है कि सभी फॉर्म का मूल्यांकन नहीं किया गया है. दत्तार के मुताबिक, बड़े और छोटे दोनों तरह के अखबारों में जो विज्ञापन दिए गए, उनसे बाजार में कोई खास प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के चार साल बाद भी सेबी ने अभी तक सहारा के उन निवेशकों का निजी सत्यापन शुरू नहीं किया है, जिन्हें रिफंड मिल चुका है.

दूसरी तरफ, सहारा ने 725.97 करोड़ रुपए का भुगतान टीडीएस के रूप में आयकर विभागों को किया है. ये वो रकम है जो ब्याज के तौर पर उन 95 फीसदी निवेशकों के निवेश पर चुकाई गई, जिन्हें साल 2009-10 और 2012-13 के बीच भुगतान किया जा चुका है. आयकर अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि, लाभ पाने वाले निवेशकों में कई ऐसे निवेशक भी मौजूद थे जिन्होंने खुद को पुनर्भुगतान की बात मानी थी.

सुप्रीम कोर्ट में सहारा की तरफ से हर बार यही तर्क दिए जाते हैं कि, जब एक सरकारी विभाग उसके निवेशकों को खोज सकता है, तो दूसरा इसमें कामयाब क्यों नहीं हो पा रहा है.

अपनी इसी आशा के साथ सहारा अब अपने मौजूदा सपनों को साकार करने में जुटा है. सहारा को उम्मीद है कि सेबी उसे उसका पैसा वापस लौटाएगी. लेकिन इसके लिए सुब्रत रॉय को सेबी के साथ बड़ी लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी और जीतनी होगी.

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