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एंबी वैली के अपनी पसंद का हिस्सा बेचकर पैसे जमा करे सहारा: SC

कोर्ट ने कहा है कि संपत्ति की बिक्री 15 मई तक पूरी होनी चाहिए. बिक्री से प्राप्त राशि सेबी-सहारा रिफंड खाते में जमा कराई जाएगी.

FP Staff Updated On: Apr 19, 2018 07:41 PM IST

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एंबी वैली के अपनी पसंद का हिस्सा बेचकर पैसे जमा करे सहारा: SC

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को महाराष्ट्र स्थित एंबी वैली परियोजना में अपनी पसंद से संपत्ति का कोई भी हिस्सा बेचने की अनुमति दी. कोर्ट ने कहा है कि संपत्ति की बिक्री 15 मई तक पूरी होनी चाहिए. बिक्री से प्राप्त राशि सेबी-सहारा रिफंड खाते में जमा कराई जाएगी. सहारा समूह यदि एंबी वैली संपत्ति को बेचने में असफल रहता है तो फिर बॉम्बे हाई कोर्ट के ऑफिशियल लिक्विडेटर प्रस्तावित नीलामी के लिए कदम बढ़ाएंगे.

इससे पहले सहारा के पुणे के एंबी वैली का कोई खरीदार नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी को अपने आदेश में एंबी वैली की संपत्ति को बॉम्बे हाई कोर्ट के लिक्विडेटर और रिसीवर को टुकड़ों में बेचने की इजाजत दी थी. अदालत ने कहा था कि अगर जरूरत पड़े तो 19 अप्रैल तक एंबी वैली की टुकड़ों में नीलामी की जा सकती है.

क्या है मामला?

सहारा ग्रुप और सेबी के बीच निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपए लौटाने को लेकर मुकदमा चल रहा है. इसी राशि के हिस्‍से के रूप में समूह को 9 हजार करोड़ रुपए कोर्ट में जमा कराने हैं. सहारा ने इसके लिए कोर्ट से 18 हफ्तों का समय मांगा था, जिसे खारिज करते हुए कोर्ट ने एंबी वैली को नीलाम करने का आदेश दिया था.

अक्टूबर, 2017 में सेबी ने कोर्ट से कहा था कि एंबी वैली की नीलामी में कोई खरीदार इस वजह से सामने नहीं आ रहा है क्योंकि सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय और कंपनी के अन्य निदेशक इसमें अड़चन डाल रहे हैं. 23 नवंबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने एंबी वैली की नीलामी के लिए फिर से बोली लगवाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि 1 दिसंबर से नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाए और 8 हफ्तों के भीतर इसकी नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए. कोर्ट ने सुब्रत रॉय सहारा को यह भी कहा था कि नीलामी में किसी तरह का अवरोध पैदा करने पर उन्हें फिर से जेल में डाला जा सकता है.

पहले शुरू की गई नीलामी की प्रक्रिया में ऑफीशियल लिक्विडेटर ने इस प्रोजेक्ट के लिए 37 हजार करोड़ रुपए कीमत तय की थी, जबकि कंपनी इसका मार्केट प्राइस दोगुना होने की बात कर रही थी. अब इस नए निर्देश के बाद उम्मीद है कि लंबे समय से अलग-अलग कारणों से एंबी वैली की टल रही नीलामी अब हो जाएगी. इससे पहले 7 फरवरी की सुनवाई में बॉम्बे हाई कोर्ट के ऑफिशियल लिक्विडेटर को कोर्ट को बताया था कि महिंद्रा एंड महिंद्रा और पीरामल ग्रुप ने इस प्रॉपर्टी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है.

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