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डेटा पर बाहरी कब्जा, देश पर कब्जे जैसा ही खतरनाक: मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी ने रिपब्लिक समिट में कहा कि डेटा की आजादी 1947 की आजादी की तरह बहुमूल्य है

Updated On: Dec 19, 2018 09:22 PM IST

Bhasha

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डेटा पर बाहरी कब्जा, देश पर कब्जे जैसा ही खतरनाक: मुकेश अंबानी

देश के लोगों से सबंधित डिजिटल सूचनाओं को भारत में ही सुरक्षित किए जाने के मुद्दे पर छिड़ी बहस के बीच देश के सबसे अमीर व्यक्ति रिलायंस जियो के मुखिया मुकेश अंबानी ने बुधवार को कहा कि ‘डेटा का उपनिवेशीकरण’ किसी देश पर पुराने जमाने के विदेशी आधिपत्य जैसी ही खतरनाक बात है.

उन्होंने कहा कि भारत के डेटा का नियंत्रण और स्वामित्व भारतीयों के पास ही होना चाहिए.

रिपब्लिक के सम्मेलन को संबोधित करते हुए अंबानी ने कहा कि किसी व्यक्ति या कारोबार का डेटा उनका होता है. यह उन कंपनियों का नहीं होता जो उसका इस्तेमाल कर पैसा कमा सकें.

उन्होंने कहा कि नई दुनिया में डेटा एक नए तेल की तरह है. डेटा नई संपदा है. भारतीय डेटा का नियंत्रण और स्वामित्व भारतीय लोगों के पास होना चाहिए कंपनियों विशेष रूप से विदेशी कंपनियों के पास नहीं.

कंपनियों द्वारा डेटा को स्थानीय स्तर पर रखने की भारतीय अधिकारियों की बात का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि डेटा की गोपनीयता पवित्र है.

अंबानी ने कहा कि भारत को डेटा आधारित क्रांति में सफल होने के लिए डेटा का नियंत्रण और स्वामित्व भारत को स्थानांतरित करने को आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए. दूसरे शब्दों में यह भारत की संपत्ति को भारत लाना होगा.

उन्होंने कहा कि डेटा की आजादी 1947 की आजादी की तरह बहुमूल्य है.

सरकार चाहती है कि भारत में कारोबार करने वाली कंपनियों को सभी ग्राहकों के डेटा को स्थानीय स्तर पर रखना होगा. रिजर्व बैंक ने अप्रैल में कंपनियों को आदेश दिया था कि उनकी ट्रांजैक्शन संबंधित सुविधाओं पर यूजरों का पूरा डेटा भारत में ही रखा जाना चाहिए.

गूगल जैसी कंपनियों ने हालांकि इसके लिए छह महीने की समयसीमा की शिकायत की है. सरकार की डेटा सुरक्षा कानून का मसौदा लाने पर विचार कर रही है जिसके तहत सभी कंपनियों के डेटा केंद्र भारत में ही स्थित होने चाहिए.

अंबानी ने कहा, ‘बुनियादी रूप से मैं सभी को अधिकार दिए जाने पर विश्वास करता हूं, सिर्फ कुछ को नहीं. मुझे लगता है कि लंबी अवधि में यही चीन और भारत के बीच अंतर करेगा. मेरा मानना है कि विकेंद्रीकृत सशक्त दुनिया, जहां सभी को बराबर का अधिकार हो, उस दुनिया से बेहतर होगी जहां सत्ता कुछ ही लोगों के हाथ में केंद्रित रहती है.’

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