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CIC के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए RBI ने मांगा 26 नवंबर तक का वक्त

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने गवर्नर उर्जित पटेल को केंद्रीय सूचना आयोग के जरिए जारी एक कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 26 नवंबर तक का समय मांगा है.

Updated On: Nov 11, 2018 10:25 PM IST

Bhasha

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CIC के कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए RBI ने मांगा 26 नवंबर तक का वक्त

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने गवर्नर उर्जित पटेल को केंद्रीय सूचना आयोग के जरिए जारी एक कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 26 नवंबर तक का समय मांगा है. सूत्रों ने कहा कि मामले में प्रगति की संभावना नहीं है क्योंकि पैनल में सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू का कार्यकाल 20 नवंबर को खत्म हो जाएगा जो उनके कामकाज का अंतिम दिन है.

उन्होंने बताया कि आचार्युलू ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से 16 नवंबर तक जवाब देने को कहा था, लेकिन इसने अब 26 नवंबर तक का समय मांग लिया है. केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने उर्जित पटेल को नोटिस जारी किया था क्योंकि आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों (2015 के जयंती लाल मिस्त्री मामले में) के बावजूद बड़े कर्ज डिफॉल्टरों की सूची का खुलासा करने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने आरबीआई से सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत कर्ज डिफॉल्टरों की सूची के खुलासे के तत्कालीन सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के आदेशों में से एक का पालन करने को कहा था.

आचार्युलू ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की इस तरह की अवहेलना केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी के स्तर पर नहीं हो सकती. उन्होंने कहा था कि आरटीआई कानून के प्रावधानों के तहत आरबीआई के गवर्नर को केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) माना जाना चाहिए. आचार्युलू ने तत्कालीन सूचना आयुक्तों मंजुला पाराशर और सुधीर भार्गव की आयोग की दो सदस्यीय पीठ के पूर्व के रुख को पलट दिया था.

कर्ज न चुकाने वालों की सूची मांगी

वे कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल के मामले में सुनवाई कर रहे थे. अग्रवाल ने एक करोड़ रुपए और इससे ऊपर का कर्ज न चुकाने वालों की सूची मांगी थी. उन्होंने 2017 में कहा कि मामले में तब तक सुनवाई नहीं की जा सकती जब तक कि सुप्रीम कोर्ट प्रशांत भूषण के जरिए 2003 में दायर किए गए उस मामले में फैसला नहीं दे देता, जिसमें 500 करोड़ रुपए और इससे ऊपर का कर्ज न चुकाने वालों ब्योरा मांगा गया था.

दिलचस्प है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहा भूषण का मामला सूचना के खुलासे में आरटीआई की प्रासंगिकता के बारे में नहीं है क्योंकि यह आरटीआई कानून लागू होने से दो साल पहले दायर किया गया था. जयंती लाल मिस्त्री मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश खास तौर पर आरटीआई कानून के तहत सूचना के खुलासे से संबंधित है. इसी के आधार पर आचार्युलू ने आरबीआई गवर्नर को नोटिस जारी किया है.

शीर्ष अदालत ने 2015 में शैलेश गांधी के जरिए दिए गए एक सीआईसी आदेश को बरकरार रखा था जिसमें आरबीआई को कर्ज न चुकाने वालों के बारे में सूचना का खुलासा करने का निर्देश दिया गया था और खुलासे के खिलाफ आरबीआई के सभी तर्कों को खारिज कर दिया गया था.

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