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जानिए, क्यों मानते हैं रघु राम राजन नोटबंदी को असफल

राजन ने ये भी बताया कि उनके समय में नोटबंदी की योजना नहीं बनी थी. वो इस तरह की चर्चा का हिस्सा जरूर रहे थे, लेकिन उसकी कोई तारीख नहीं तय थी

Updated On: Sep 03, 2017 06:35 PM IST

FP Staff

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जानिए, क्यों मानते हैं रघु राम राजन नोटबंदी को असफल

रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने डिमॉनेटाईज़ेशन पर अपनी राय दी है. राजन के अनुसार नोटबंदी अर्थशास्त्र के नजरिये से नाकाम साबित हुई है.

अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को दिए एक इंटरव्यू में राजन ने कहा, ‘तो अब जबकि सारी बातें हो चुकी है तो ये कहा जा सकता है कि उद्देश्य अच्छा था मगर कोई नहीं कह सकता है कि नोटबंदी से कोई आर्थिक सफलता मिली. लेकिन जैसा मैंने कहा कि आखिर में समय ही सच बताएगा.’

राजन ने बताया कि नोटबंदी की अच्छी खासी कीमत चुकानी पड़ी है. जीडीपी में एक से दो पॉइंट कमी आई है, जिसका मतलब है कि ढाई लाख करोड़ रुपए का नुकसान. इसके साथ ही करोड़ों लोगों का लाइनों में खड़े रहना, नए नोटों को छापने का खर्च और बैंकों की निकाली गई राशि दूसरे नुकसान हैं.

जिन लोगों ने नोटबंदी की योजना बनाई थी, उनका मानना था कि नगद में काला धन छिपाकर रखने वाले कई लोग पुराने नोट बदलने नहीं आएंगे. इससे नोटबंदी लागू करने में होने वाले खर्चों से कुछ राहत मिल जाएगी. अब 99 फीसदी से ज्यादा नोट वापस आ चुके हैं तो जाहिर है कि डिमॉनेटाइजेशन के लक्ष्य पूरे नहीं हुए हैं.

राजन ने ये भी बताया कि उनके समय में नोटबंदी की योजना नहीं बनी थी. वो इस तरह की चर्चा का हिस्सा जरूर रहे थे, लेकिन उसकी कोई तारीख नहीं तय थी. उस समय 2000 के नोट छापने जैसी बातों की शुरूआत हुई थी मगर एक निश्चित तारीख पर नोटबंदी का ऐलान करने जैसा कुछ नहीं था.

इसके साथ ही उन्होंने इसमें जोड़ा कि नोटबंदी का एक संभावित फायदा उठाया जा सकता है. अगर अचानक से बढ़े डिजिटल ट्रांजैक्शन और खातों में जमा हुई राशि की जांच की जाए तो काले धन के कई स्त्रोत पता चल सकते हैं.

राघन फिलहाल शिकागो विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं. उन्होंने अर्थव्यस्था के बारे में ये भी कहा कि इस समय सबसे ज़्यादा चिंताजनक बात ये है कि रियल स्टेट ऐक्ट और जीएसटी जैसे बदलावों के बाद भी अर्थव्यवस्था में निजी निवेश नहीं बढ़ा है. जिसके चलते नई नौकरियां नहीं बढ़ रही हैं.

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