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PNB स्कैम : चालाकी से कुछ यूं पर्दा डालते नजर आए MD सुनील मेहता

शायद मेहता को लगता है कि लोग भोले-भाले हैं और उन्हें जो कुछ बताया जाएगा उसे सीधे-सीधे मान लेंगे

Sanjay Singh Updated On: Feb 17, 2018 04:52 PM IST

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PNB स्कैम : चालाकी से कुछ यूं पर्दा डालते नजर आए MD सुनील मेहता

पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील मेहता की प्रोफाइल कुछ वेबसाइट पर पोस्ट की गई है और प्रोफाइल अपने मौजूदा रुप में प्रभावशाली जान पड़ती है. उन्होंने कई बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में जिम्मेदारी के ओहदों पर काम किया है. पीएनबी में मैनेजिंग डायरेक्टर का पद संभालने वाले उनके पहले के अधिकारियों के प्रोफाइल भी समान रुप से प्रभावशाली रहे होंगे और यही बात प्रबंधन के शीर्ष स्तर पर अभी या पिछले वक्त में पद संभालने वाले अधिकारियों के बारे में मानी जा सकती है.

ऐसे में इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती कि कैसे तमाम मैनेजिंग डायरेक्टर, बोर्ड मेम्बर, जेनरल मैनजर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के आंखों के सामने फर्जीवाड़ा चलता रहा और उन्हें साल दर साल इसकी भनक तक न लगी. कैसे मुमकिन है कि बैंक के प्रबंधन तंत्र के भीतर से किसी ने आगाह नहीं किया, कोई सवाल न पूछा और गलती करने वाले कर्मचारियों और ग्राहकों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाए गए?

पीएनबी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुनील मेहता की गुरुवार के दिन की प्रेस कांफ्रेंस दो वजहों से दिलचस्प कही जाएगी. एक तो उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता को हल्का करके बताया. दूसरी खास बात रही उनका वाकए को बयान करने का अंदाज. उन्होंने बड़े इत्मीनान से कह दिया कि जिस तथाकथित घोटाले की बात की जा रही है उसे निचले स्तर के दो कर्मचारियों- डिप्टी मैनेजर (जो अभी रिटायर नहीं हुए) गोकुलनाथ शेट्टी और एक क्लर्क मनोज हनुमंत खरात ने अंजाम दिया है.

घोटाले पर पर्दा डालने के लिए कह दिया बैंक कर लेगा भरपाई 

शायद मेहता को लगता है कि लोग भोले-भाले हैं और उन्हें जो कुछ बताया जाएगा उसे सीधे-सीधे मान लेंगे.

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ऐसा नहीं लगा कि उन्हें फर्जीवाड़े को लेकर कोई मलाल हो, वे इस बात को लेकर बेचैन हों कि उनके बैंक से लाखों आम ग्राहकों का पैसे एक झटके में निकल गया. पीएनबी में यह फर्जीवाड़ा 2011 से चल रहा था और अजब कहिए कि मेहता का अंदाज इस बात पर अपनी पीठ थपथपाने का सा था.

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खबरों के मुताबिक उन्होंने कहा कि मामले की भनक पहले बैंक को लगी और बैंक ने ही सबसे पहले सेबी को इसके बारे में जानकारी दी. उन्होंने दावा किया कि बैंक अपनी क्षमता के हिसाब से कार्रवाई कर रहा है और क्लर्क तथा अन्य कर्मचारियों को निलंबित करने का भी श्रेय लिया.

पीएनबी में फर्जीवाड़ा तो 11,500 करोड़ रुपए का हुआ है लेकिन मेहता ने बड़े गुमान भरे अंदाज में कहा कि बैंक में इस हालात से उबरने की काबिलियत और ताकत है. जिस संस्था की वे रहनुमाई कर रहे हैं उसके विशाल आकार का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ‘123 साल पुरानी इस संस्था (पीएनबी) ने बहुत से उतार-चढ़ाव देखे हैं और संस्था मुश्किल हालात पर कामयाबी पाकर उभरी है और ठीक इसी कारण यह संस्था देश में दूसरी बड़ी कर्जदाता है.'

उन्होंने इस बात की भी शेखी बघाड़ी कि हमारे देखरेख में बैंक में ‘साफ-सुथरे, जिम्मेदार और जरुरतों का ध्यान रखते हुए प्रक्रियाओं’ का पालन किया जा रहा है.

पीएनबी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ का ओहदा संभाल रहे सुनील मेहता ने यह कहते हुए अपना दामन बचाने की कोशिश की कि फर्जीवाड़े की शुरुआत तो 2011 में हो गई थी. मतलब, घोटाला अगर इतने सालों तक जारी रहा तो उसकी वजह बताने की जिम्मेदारी उनकी नहीं. बहरहाल, सोचने की बात यह बनती है कि बैंक से हजारों करोड़ की रकम बिना किसी सवाल के निकल गई तो फिर आखिर सुनील मेहता किस तरह के साफ-सुथरे प्रशासन का हवाला दे रहे थे.

मेहता को जानकारी थी बोर्ड मीटिंग के दौरान बंद कमरे में क्या होता था 

मेहता को यह बताना चाहिए कि जिस बैंक में प्रक्रिया साफ-सुथरे, जिम्मेदार और जरुरतों का ध्यान रखते हुए चलती हैं वहां निगरानी और अंकुश की व्यवस्था होनी चाहिए या नहीं. ध्यान रहे कि लाखों साधारण लोगों का रुपया बैंक में जमा होता है.

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इस बात को भी ध्यान में रखना जरुरी है कि दो ह्वीस्लब्लोअर हरि प्रसाद तथा दिनेश दुबे ने दस्तावेजों के आधार पर बताया है कि हमलोग बरसों से आगाह कर रहे थे कि नीरव मोदी और मेहुल चोकसी बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से तथाकथित फर्जीवाड़ा अंजाम दे रहे हैं.

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इलाहाबाद बैंक के लिए सरकार से नामित किए गए पूर्व डायरेक्टर दिनेश दुबे के खुलासे से सुनील मेहता की भूमिका खास तौर पर शक के घेरे में आती है. पीएनबी के वर्तमान एमडी पहले इलाहाबाद बैंक थे जहां 2013 में यह घोटाला आकार ले रहा था.

दिनेश दुबे ने कहा : 'मैंने बोर्ड(इलाहाबाद बैंक) से कहा कि चोकसी (नीरव मोदी के मामा, व्यावसायिक साथी तथा गीतांजलि जेम्स के मालिक) और उनका फर्म एक दिन बड़े घोटाले का रुप ले सकते हैं. अगर मेरी बात पर ध्यान दिया जाता तो इस घोटाले से बचा जा सकता था. मुझे याद है कि पीएनबी के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर उस वक्त इलाहाबाद बैंक में जेनरल मैनेजर के पद पर थे और उन्हें इस बात की खबर रहती थी कि बोर्ड की मीटिंग के बंद कमरे में क्या कुछ चल रहा है.'

सीबीआई की एफआईआर से पहले निकल लिए नीरव मोदी 

पीएनबी तथा विवाद के घेरे में आए बाकी बैंकों के शीर्ष प्रबंधन को मामले में बहुत सारी बातें स्पष्ट करनी होंगी. निचले स्तर के दो कर्मचारियों पर दोष मढ़ने भर से वे बचकर नहीं निकल सकते. यह बात सही है कि मेहता ने सीबीआई में एफआईआर की थी लेकिन यह कदम बहुत देर से उठाया गया और मामले की गंभीरता के लिहाज से इसे पर्याप्त भी नहीं कहा जा सकता. उम्मीद की जा सकती है कि जांच एजेंसी मामले की तह में जाएगी और मैनेजमेंट के शीर्ष स्तर के अधिकारियों को अपने घेरे में लेगी.

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ध्यान देने की बात यह भी है कि सीबीआई ने जैसे ही एफआईआर दर्ज की मेहुल चोकसी और नीरव मोदी विदेश भाग गए. जब दोनों देश छोड़कर भागे उस घड़ी लोगों की नजर में यह बात नहीं थी कि सीबीआई ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है. सो यह बात जाहिर है कि किसी ने अंदरखाने से ही यह जानकारी उन्हें दी होगी और जानकारी देने वाला व्यक्ति बैंक का भी हो सकता तथा कहीं और का भी.

हर्षद मेहता, विजय माल्या और नीरव मोदी से जुड़े घोटाले तथा नोटबंदी के बाद के वक्त में कुछ बैंक तथा उनके अधिकारियों ने जो भूमिका निभाई है उससे बैंकों में जारी भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े होते हैं.

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