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पीएनबी घोटाला: बिजनेसमैन की लेट नाइट पार्टियों में रचा जाता है यह 'खेल'

सीबीआई ने मंगलवार को पंजाब नेशनल बैंक के 10 अधिकारियों से भी पूछताछ की. इसका मकसद यह पता लगाना था कि क्या बैंक के आला अधिकारी इस सरकारी बैंक में चल रहे इस ‘खेल से वाकिफ थे

Updated On: Feb 21, 2018 08:51 PM IST

Yatish Yadav

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पीएनबी घोटाला: बिजनेसमैन की लेट नाइट पार्टियों में रचा जाता है यह 'खेल'

घोटालाबाजों के लिए सरकारी बैंकों से लोन हासिल करने की दो 'जरूरी' शर्तें हैं- बड़े फार्म हाउसों में देर रात तक चलने वाली पार्टियां और बैंकों के आला अधिकारियों को मोटी रिश्वत. उन्हें (घोटालेबाजों को) पूरी तरह पता होता है कि इस लोन का एनपीए बनना लगभग तय है.

पीएनबी घोटाले में फ़र्स्टपोस्ट की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि भ्रष्टाचार सरकारी बैंकों की नस-नस में पहुंच चुका है. यह पीएनबी, यूको और केनरा बैंक सहित सिर्फ कुछ बैंकों का अपवादस्वरूप मामला नहीं है. मोदी-मेहुल चोकसी घोटाले में भी इन बैंकों की भूमिका सामने आई है.

फ़र्स्टपोस्ट ने खासतौर पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की एक गोपनीय रिपोर्ट और स्टर्लिंग बायोटेक का स्टेटमेंट हासिल किया है. इस कंपनी का मालिकाना हक नितिन और चेतन संदेसारा के पास है, जिन्होंने पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक और अन्य से 5,000 करोड़ का लोन लिया था. यह लोन भी एनपीए में तब्दील हो गया.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 अक्टूबर 2017 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून की धारा 50 (2) के तहत संदेसारा की कंपनियों में डायरेक्टर सुनील यादव का बयान दर्ज दिया गया था. इसे न्यायिक कार्यवाही और अदालत में स्वीकार्य माना जाता है. यादव के बयान से देश के बैंकिंग सिस्टम में फैले सड़ांध की झलक मिलती है.

देर रात तक चलने वाली पार्टियां और बैड लोन

ईडी के अधिकारियों ने यादव से पूछा था, ‘क्या कोई बैंक अधिकारी या उनके परिवार के सदस्य कभी नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में मौजूद 12 राजदूत मार्ग या जी-6 पुष्पांजलि फार्म हाउस गए थे?’ इस पर यादव का जवाब था, ‘कुछ बैंक अधिकारी वहां जाते थे और जी-6 पुष्पांजलि फार्म हाउस पर मिलते-जुलते थे. गगन धवन (चेतन के करीबी सहयोगी) भी ऐसी मुलाकातों में मौजूद रहते थे. मैं ठीक तरह से बैंक अधिकारियों का नाम याद नहीं कर सकता, लेकिन मुझे उन बैंकों के नाम याद हैं, जिनके अधिकारी आते थे. चेतन अधिकारियों का जिक्र उनके बैंक के जरिए करते थे. मिसाल के तौर पर वह मुझसे कहा करते थे कि पंजाब नेशनल बैंक के एक अफसर जी-6 पुष्पांजलि फार्म हाउस पर पहुंचेंगे, लिहाजा मैं उनके लिए खाने-पीने का इंतजाम करूं.’

उनके मुताबिक, ‘कुछ बैंक जिनके अधिकारी यहां पहुंचकर धवन की मौजूदगी में चेतन से मिले, वे पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक से जुड़े थे.’

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकारी पैसे के दुरुपयोग के लिए संबंधित पक्षों को बैंक की सील भी उपलब्ध कराई जाती थी. इनकम टैक्स की जांच रिपोर्ट में कहा गया, ‘केनरा बैंक, मुख्य कॉरपोरेट शाखा, मुंबई के मामले में बैंक की सील के साथ दस्तखत किए गए खाली लेटरेहड पाए गए, जिसे बाद में कंपनी ने भरा.’  बैंक के लेटरहेड पर केनरा बैंक के उप-महाप्रबंधक टी के बजाज के दस्तखत थे. बाद में इसे स्टर्लिंग बायोटेक नेअपनी मर्जी से भरा गया.

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भरे हुए लेटरहेड में कुछ इस तरह से लिखा गया था, ‘स्टर्लिंग पोर्ट लिमिटेड को 1,875 करोड़ का टर्म लोन. हम इसकी पुष्टि करते हैं कि उपरोक्त टर्म लोन के तहत हमारा भुगतान एस्क्रो/टीआरए खाता नंबर 11611100001626 के जरिए किया जाएगा, जो आंध्रा के वड़ोदरा शाखा से जुड़ा है.

इनकम टैक्स अधिकारियों के मुताबिक, खाली लेटरहेड और भरी हुई मंजूरी दरअसल बैंकिंग सेक्टर में बड़े घोटाले की तरफ इशारा करते हैं. इनकम टैक्स विभाग ने इस रिपोर्ट को ईडी के साथ भी साझा किया है, ताकि इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच हो सके. जांच एजेंसी ने 13 जनवरी को आंध्रा बैंक के पूर्व डायरेक्टर अनूप प्रकाश गर्ग को गिरफ्तार किया था. उन्होंने संदेसारा के मालिकाना हक वाली फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम देने के मामले में पकड़ा गया था.

भुगतान और बैड लोन

संदेसारा की मालिकाना हक वाली कंपनियों से इनकम टैक्स विभाग ने कुछ आंकड़े जुटाए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक, गर्ग को नकद भुगतान की शुरुआत अक्टूबर 2008 में हुई. जब्त आंकड़ों की पहली एंट्री यह दिखाती है कि उन्हें 27 अक्टूबर 2008 को 10 लाख रुपए का भुगतान किया गया.

इसके बाद 14 फरवरी 2009 को इस शख्स को 5 लाख रुपए दिए गए और फिर 15 अप्रैल 2009 को 20 लाख दिए गए. पांच दिनों बाद उन्हें और 20 लाख रुपए दिए गए. मई 2009 में बैंकर को चार किस्तों में कुल 97.5 लाख का भुगतान किया गया. बाद में बैंक के लोन को बेनामी इकाइयों की तरफ शिफ्ट कर दिया गया.

इनकम टैक्स रिपोर्ट में बताया गया, ‘भारत में ग्रुप (स्टर्लिंग बायोटक) द्वारा लिए गए बैंक लोन को पूंजीगत संपत्तियों/सामानों की सप्लाई की खरीद के लिए एडवांस पेमेंट की आड़ में सीधा इन बेनामी इकाइयों को भुगतान किए गए. हालांकि, इनमें से किसी भी कंपनी का वास्तव में बिजनेस ऑपरेशन नहीं है. लिहाजा, इन इकाइयों में जमा की गई फंड की राशि थर्ड पार्टी चेक के जरिये नकद में निकाल ली जाती है.’

बैंक और बाकी सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता के बारे में रिपोर्ट में कहा गया, ‘नकद भुगतान भी बैंक डायरेक्टरों, सेबी और सिकॉम जैसे वित्तीय संस्थानों के नाम पर दर्ज किए गए. दस्तखत वाले बैंकों के खाली लेटरहेड पाए गए, जिन पर बैंक अधिकारी के दस्तखत थे, जिनका बाद में इस्तेमाल अपने हिसाब से चीजें लिखने में किया गया. बैंक की सील भी पाई गई है.’

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘सबूतों से साफ है कि हेराफेरी को अंजाम देने वालों के सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक शख्सियतों, बैंकरों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों से रिश्ते काफी मजबूत थे. साथ ही, बही-खाते से इतर कैश के जरिए ऑपरेशन का दायरा काफी व्यापक था.’

मोदी-चोकसी केस में बैंक अधिकारियों की भूमिका का खुलासा

सीबीआई और ईडी को मोदी-चोकसी मामले में भी पंजाब नेशनल बैंक के आला अधिकारियों के शामिल होने का शक है. जांच एजेंसी ने मंगलवार को मुंबई में अपनी याचिका में पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों की हिरासत की मांग करते हए कहा कि ‘बड़ी साजिश के पर्दाफाश, बाकी सहअभियुक्तों की पहचान/भूमिका का पता लगाने, नीरव मोदी और अन्य के बड़े पैमाने पर सरकारी पैसे की हेराफेरी आदि के लिए बेचू तिवारी, यशवंत जोशी और प्रफुल प्रकाश सावंत से हिरासत में लगातार पूछताछ जरूरी है.’

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि 2015 से 2017 के दौरान पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के फॉरेक्स डिपार्टमेंट में चीफ मैनेजर के तौर पर काम करने वाले तिवारी ने फर्जीवाड़े और अवैध लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) की निगरानी नहीं की, जिसे बिना किसी जांच-पड़ताल के गोकुलनाथ शेट्टी द्वारा जारी किया जा रहा था.

जांच एजेंसी के मुताबिक, ‘उन्होंने बैंक के स्विफ्ट टर्मिनल के जरिए भेजे गए एलओयू पर निगरानी रखने के मकसद से 19 फरवरी 2016, 7 फरवरी 2017 और 14 मार्च 2017 को सर्कुलर जारी किए, लेकिन इसके बाद न तो कुछ हुआ और न ही इस बात के लिए कदम उठाए कि क्यों उनके निर्देशों का पालन शेट्टी, जोशी या सावंत द्वारा नहीं किया जा रहा है. जानबूझकर बरती गई इस लापरवाही के कारण गुपचुप गड़बड़ी का सिलसिला जारी रहा और पंजाब नेशनल बैंक पर विदेशी बैंक की तरफ से लायबिलिटी काफी बढ़ गई.’

जोशी की भूमिका के बारे में सीबीआई ने कहा, ‘2015 से 2018 के दौरान पंजाब नेशनल बैंक के फॉरेक्स विभाग में स्केल-2 मैनेजर रहे जोशी ने स्विफ्ट मेसेज के मामले में जान-बूझकर रोजाना रिपोर्ट नहीं सौंपी और पंजाब नेशनल बैंक को सैकड़ों करोड़ का चूना लगाने के लिए साजिश में भूमिका निभाई और इसे बढ़ावा दिया.

बैंक के स्विफ्ट टर्मिनल के जरिए भेजे गए एलओयू और इसके कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस में एंट्री की पुष्टि की निगरानी और जांच-पड़ताल के लिए सर्कुलर के बावजूद इन निर्देशों को नजरअंदाज किया गया.’ सीबीआई ने मंगलवार को पंजाब नेशनल बैंक के 10 अधिकारियों से भी पूछताछ की. इसका मकसद यह पता लगाना था कि क्या बैंक के आला अधिकारी इस सरकारी बैंक में चल रहे इस ‘खेल से वाकिफ थे.

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