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PNB फ्रॉड केस: एक अदना कर्मचारी ने ऐसे लगवाया 11 हजार करोड़ का चूना

शुरुआती जांच में पता चला है कि मुंबई के एक ब्रांच के स्टाफों की मिलीभगत से इतना बड़ा फ्रॉड सामने आया

Updated On: Feb 15, 2018 05:47 PM IST

FP Staff

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PNB फ्रॉड केस: एक अदना कर्मचारी ने ऐसे लगवाया 11 हजार करोड़ का चूना
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पंजाब नेशनल बैंक फ्रॉड केस के बाद अन्य बैंकों के भी कान खड़े हो गए हैं. बैंकों के अधिकारियों ने 11,400 करोड़ के इस महाघोटाले के तौर-तरीकों पर गौर फरमाना शुरू कर दिया है, ताकि आगे कोई ऐसा घपला सामने न आए. पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने एक पत्र में कहा है कि शुरुआती जांच में पता चला है कि मुंबई के एक ब्रांच के स्टाफों की मिलीभगत से इतना बड़ा फ्रॉड सामने आया. पीएनबी ने यह बयान प्राइवेट और सरकारी दोनों बैंको को जारी किया है.

कैसे हुई धोखाधड़ी?

पीएनबी का पत्र बताता है कि ब्रांच के एक अनधिकृत जूनियर अधिकारी ने स्विफ्ट ट्रेल के जरिए फर्जीवाड़ा करके नीरव मोदी समूह की कुछ कंपनियों की तरफ से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी किया. स्विफ्ट एक ग्‍लोबल फाइनेंशियल मैसेजिंग सर्विस है. इसके जरिए लाखों डॉलर की रकम अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भेजी जाती है. ये ट्रांजेक्‍शन कोर बैंकिंग सिस्‍टम (सीबीएस) के दायरे में नहीं आते हैं और न ही सीबीएस को लूप में रखा जाता है. सीबीएस में डेली बैंकिंग ट्रांजेक्‍शन आते हैं.

पूरे घोटाले की जड़ में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) है. यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंट होल्‍डर को पैसा देते हैं. अब यदि खातेदार डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाए का भुगतान करे. पीएनबी के मामले में संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजेंक्‍शंस बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हुए.

सामान्‍य तौर पर बैंकों के बीच इस तरह के लेनदेन के लिए एक तरह की आपसी सहमति होती है. और अगर एक बैंक इस तरह का लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करता है तो दूसरा बैंक उसका सम्‍मान करते हुए ट्रेडर्स या बायर्स को इतने का क्रेडिट उपलब्‍ध कराता है.

घोटाले का असल कारण क्या?

भारत के इन बैंकों की विदेशी शाखाओं के संबंध वहां चर रही जूलरी कंपनियों से होते हैं. ऐसे में इन आउटलेट्स ने बैंककर्मियों की मिलीभगत से काफी अधिक फायदा उठा लिया. इसके अलावा, पीएनबी कर्मियों की ओर से फर्जी अंडरटेकिंग भी जारी की गई, जो इस घोटाले का असल कारण है.

ऐसे सामने आया घोटाला

इन जूलरी कंपनियों के विदेशी ठिकानों जैसे- हांगकांग, दुबई और न्‍यूयॉर्क में दुकानें हैं. ये दुकानें एलओयू के आधार पर बायर्स क्रेडिट का लाभ 2010 से ही लेती रही हैं. लेकिन मामला तब गड़बड़ा गया, जब पिछले 25 जनवरी को की जाने वाली पेमेंट नहीं हो पाई.

सूत्रों की मानें तो, पीएनबी के अधिकारी जूलरी कंपनियों से ऐसी सुविधा के लिए 10 फीसदी अतिरिक्‍त रकम भी लेते थे. बाद में जूलर्स ऐसा करने में अब सक्षम नहीं थे, ऐसे में पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया. उधर पीएनबी ने जारी एलओयू के एवज में पैसे देने से इंकार कर दिया, ऐसे में अन्‍य बैंकों में एक ने मामले को हांगकांग मॉनेटरी अथॉरिटी को रिपोर्ट कर दी, जो लोकल रेगुलेटरी है. इसी तरह

इस बैंक ने आरबीआई को भी इसकी जानकारी दे दी. इस स्‍कैम की शुरुआत डायमंड कंपनियों- गीतांजलि जेम्‍स, गिली इंडिया, नक्षत्र और नीरव मोदी ग्रुप की कंपनियों के रफ डायमंड के आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट या लेटर ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने के मामले में पीएनबी से संपर्क साधने के साथ हुई.

(सीएनएन-न्यूज18 के लिए रौनक कुमार गुंजन की रिपोर्ट)

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