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अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए जेटली से मिलेंगे मोदी

बैठक में आर्थिक वृद्धि को गति देने, रोजगार सृजन और निजी निवेश को पटरी पर लाने के उपायों पर चर्चा की जा सकती है

Updated On: Sep 18, 2017 11:00 PM IST

FP Staff

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अर्थव्यस्था को पटरी पर लाने के लिए जेटली से मिलेंगे मोदी

नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली के तमाम वादों-इरादों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार घटती चलती जा रही है. नोटबंदी और जीएसटी की वजह से देश की आर्थिक ग्रोथ घटकर तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है. वहीं दूसरी तरफ महंगाई में लगातार तेजी आ रही है. महंगाई अपने पांच महीने के हाई पर है. इसके अलावा चालू खाता घाटा भी बढ़कर चार साल के पीक पर पहुंच गया है. ये सब आंकड़ें भारतीय अर्थव्यवस्था की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं.

अर्थव्यवस्था की बिगड़ती हालत के बीच नरेंद्र मोदी मंगलवार को फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली और दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक करने वाले हैं. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मोदी आर्थिक हालात पर जेटली और वित्त मंत्रालय के सचिवों के साथ चर्चा करेंगे. उनका फोकस अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने पर रहेगा.

चिंताजनक आंकड़ों से परेशान है मोदी सरकार

हाल ही में जारी पहली तिमाही के जीडीपी वृद्धि आंकड़े आने के बाद यह बैठक हो रही है. फाइनेंसियल इयर 2017-18 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि 5.7 प्रतिशत रही जो तीन साल का न्यूनतम स्तर है. इससे पूर्व फाइनेंसियल इयर 2016-17 की पहली तिमाही में यह 7.9 प्रतिशत और पिछली तिमाही जनवरी-मार्च तिमाही में 6.1 प्रतिशत रही थी.

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर लगातर छठी तिमाही में घटी है. आर्थिक समीक्षा-दो में यह अनुमान जताया गया है कि अपस्फीति (डिफ्लेशन) दबाव के कारण चालू वित्त वर्ष में 7.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करना संभव नहीं होगा. निर्यात के समक्ष भी चुनौतियां हैं और औद्योगिक वृद्धि दर पांच साल में न्यूनतम स्तर पर आ गई है.

अप्रैल-जून तिमाही में चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर जीडीपी का 2.4 प्रतिशत या 14.3 अरब डालर पहुंच गया. मुख्य रूप से व्यापार घाटा बढ़ने से कैड बढ़ा है. बैठक में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने के साथ हो रही कठिनाइयों, नोटबंदी के बाद के प्रभाव और राजकोषीय गुंजाइश जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

इसमें प्रत्यक्ष एवं परोक्ष कर संग्रह के साथ-साथ साल के अनुमान को भी प्रधानमंत्री के समक्ष पेश किया जा सकता है. सरकार के वित्त के बारे में पूरी तस्वीर पेश करने के लिए विनिवेश राशि के बारे में भी प्रधानमंत्री को जानकारी दी जा सकती है. सूत्रों के अनुसार बैठक में आर्थिक वृद्धि को गति देने, रोजगार सृजन और निजी निवेश को पटरी पर लाने के उपायों पर चर्चा की जा सकती है.

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