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आलोचकों को नजरअंदाज कर बुलेट ट्रेन पर मजबूती से आगे बढ़ें पीएम मोदी

दुनिया के दूसरे देशों में बुलेट ट्रेन यात्रियों की कम संख्या और ज्यादा कमाई न होने से लगातार घाटे में है. लेकिन भारत में विशाल आबादी को देखते हुए ऐसी समस्या नहीं होगी

FP Staff Updated On: Jan 22, 2018 07:18 PM IST

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आलोचकों को नजरअंदाज कर बुलेट ट्रेन पर मजबूती से आगे बढ़ें पीएम मोदी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने यह वादा किया है कि भारत में अगले 5 साल में बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी. कैबिनेट ने वर्ष 2015 में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना को अपनी मंजूरी दी थी. इसके दो साल के भीतर इस परियोजना पर काम शुरू हो गया है.

सरकार ने बुलेट ट्रेन के लिए पहले 2023 तक की डेडलाइन रखी थी. हालांकि पिछले साल रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इसके एक साल से अधिक समय से आगे बढ़ाने की घोषणा की.

रेल मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच 15 अगस्त, 2022 को, देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के अवसर पर, अपना पहला सफर करेगी.

लेकिन सवाल उठता है कि बुलेट ट्रेन को भारत में कामयाब होने के लिए क्या चाहिए?

दुनिया में जहां भी बुलेट ट्रेन नाकाम हुआ है, यात्रियों की कम संख्या उसकी प्रमुख वजह है. भारत के लिए उसकी विशाल आबादी इस लिहाज से बुलेट ट्रेन के लिए वरदान साबित होगा. भारत में बुलेट ट्रेन कामयाब होगा या नहीं, इसका जवाब है कि यहां कई बुलेट ट्रेन चलाने की जरूरत होगी.

सरकार ने पूरे देश में 6 और हाई स्पीड रेल (एचएसआर) परियोजनाओं की योजना बनानी शुरू कर दी है. इसके लिए जरूरी है कि टिकट की कीमत को काफी कम रखा जाए ताकि वो हवाई किराए से प्रतिस्पर्धा कर सकें.

Ahmedabad: Prime Minister Narendra Modi and his Japanese counterpart Shinzo Abe during the ground breaking ceremony for high speed rail project in Ahmedabad on Thursday. PTI Photo/ MEA (PTI9_14_2017_000023B) *** Local Caption ***

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने पिछले साल अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी

दुनिया में पहली बार जापान ने 1964 में बुलेट ट्रेन चलाया था

1964 में जापान ने अपनी तकनीकि उन्नति का परिचय देते हुए दुनिया में पहली बार बुलेट ट्रेन चलाया था. देश के दो सबसे बड़े शहरों टोक्यो और ओसाका के बीच शिन्कानसेन ट्रेन दौड़ी थी.

यह अब जापान के 2,764.6 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है और इसमें सफर करने वाले यात्रियों की संख्या कई गुणा बढ़ी है. शिन्कानसेन आरामदायक सवारी प्रदान करता है और दुर्घटनाओं के प्रति इसका रिकॉर्ड शून्य होने का दावा है. हालांकि, भविष्य में शिन्कानसेन के यात्रियों की संख्या में कमी आने की  संभावना को देखते हुए जापान अब अन्य देशों को, विशेष रूप से उभरते हुए देशों के लिए हाई स्पीड रेल (एचएसआर) के आइडिया को बेचने की कोशिश कर रहा है.

इस मामले में जापान का चीन के साथ जो कि दुनिया में सबसे बड़ा एचएसआर नेटवर्क चलाता है, स्पर्धा जारी है. जापान को बुलेट ट्रेन तकनीक बेचने के लिए  संघर्ष करना पड़ा है. अमेरिका के साथ इस सिलसिले में कई वर्षों तक चली बातचीत के बाद, लॉस एंजिलिस और सैन फ्रांसिस्को के बीच एक हाई स्पीड रेल लिंक चलाने पर विचार हो रहा है, जापान को आखिर में भारत में सफलता मिली.

दुनिया के दूसरे देशों में बुलेट ट्रेन यात्रियों के कम उपयोग और ज्यादा कमाई न होने से लगातार घाटे में है. लेकिन भारत में विशाल आबादी को देखते हुए ऐसी समस्या नहीं होगी.

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